झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को करारा झटका

छह विधायकों की रद्द नहीं होगी सदस्यता/ विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव की कोर्ट ने बाबूलाल मरांडी व विधायक प्रदीप यादव की याचिका खारिज की/ झाविमो की टिकट पर वर्ष 2014 में आठ लोगों ने विधानसभा चुनाव जीता था/मगर छह विधायकों ने झाविमो से अपने को अलग कर लिया

रांची। झारखंड विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव की कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुये झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के छह विधायकों की सदस्यता रद्द किये जाने की झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी की याचिका बुधवार को खारिज कर दी। सभाध्यक्ष श्री उरांव ने यहां बंद कक्ष में मामले की सुनवाई करने के बाद झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी व विधायक प्रदीप यादव की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने झाविमो की टिकट पर वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव जीतकर बाद में भाजपा में शामिल हुये छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।

दिनेश उरांव ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं, जिसमें अपने पक्ष को बेहतर तरीके से रखने का प्रयास किया गया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि छह विधायकों का भाजपा में शामिल होना वैध था इसलिए मरांडी और यादव की याचिका रद्द की जाती है। झाविमो की टिकट पर चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल हुये छह विधायकों में हटिया से विधायक नवीन जायसवाल, कृषि मंत्री एवं सारठ से विधायक रणधीर सिंह, डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, सिमरिया विधायक गणेश गंझू, बरकट्ठा विधायक जानकी यादव और खेल एवं पर्यटन मंत्री व चंदनकियारी से विधायक अमर कुमार बाउरी शामिल हैं।

झाविमो की टिकट पर वर्ष 2014 में आठ लोगों ने विधानसभा चुनाव जीता था। इनमें से छह ने नौ फरवरी 2015 को सभाध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा में झाविमो के अन्य विधायकों से अलग बैठने की अनुमति मांगी थी। इस पर बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव ने भी सभाध्यक्ष को पत्र लिखकर दल-बदल कानून के तहत इन छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। सभाध्यक्ष के कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी 2015 को शुरू हुई, जो 12 दिसंबर 2018 तक चली। इस दिन सभाध्यक्ष ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में 64 दिनों तक चली सुनवाई में छह विधायक लगातार उपस्थित रहे और 54 गवाह इन विधायकों के पक्ष में रहे। इस आधार पर उन्होंने दावा किया कि दो तिहाई बहुमत होने के आधार पर झाविमो का भाजपा में विलय हो गया है।

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