विधायकों की सदस्यता रद्द करने को हाई कोर्ट जाएगा झाविमो

रांची। झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो-प्रजातांत्रिक) पार्टी की टिकट पर वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल हुये छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। झाविमो ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव द्वारा इन छह विधायकों हटिया से विधायक नवीन जायसवाल, कृषि मंत्री एवं सारठ से विधायक रणधीर सिंह, डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, सिमरिया विधायक गणेश गंझू, बरकट्ठा विधायक जानकी यादव तथा खेल एवं पर्यटन मंत्री व चंदनकियारी से विधायक अमर कुमार बाउरी के भाजपा में शामिल होने को वैध ठहराये जाने के बाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है।

सभाध्यक्ष के समक्ष झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी की ओर से पैरवी करने वाले वकील राज नंदन सहाय ने यहां कहा कि सभाध्यक्ष के कोर्ट ने उनके मुवक्किल की छह विधायकों की सदस्यता रद्द किये जाने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। इसलिए, झाविमो न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सहाय ने कहा, ”यदि दो तिहाई बहुमत के आधार पर छह विधायकों का झाविमो के भाजपा में विलय हो जाने का दावा वैध है तो सवाल उठता है कि तब बाबूलाल मरांडी कहां हैं। वहीं झाविमो के केंद्रीय महासचिव खालिद खलील ने कहा कि आज का निर्णय लोकतंत्र की हत्या है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों लोकतंत्र की हत्या की है उन्हें ही विजयी घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष मरांडी इन छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश करेंगे। उल्लेखनीय है कि झाविमो की टिकट पर वर्ष 2014 में आठ लोगों ने विधानसभा चुनाव जीता था। इनमें से छह ने नौ फरवरी 2015 को सभाध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा में झाविमो के अन्य विधायकों से अलग बैठने की अनुमति मांगी थी। इस पर मरांडी और विधायक प्रदीप यादव ने सभाध्यक्ष को पत्र लिखकर दल-बदल कानून के तहत इन छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।

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