संताल की सियासी बिसात पर भाजपा व झामुमो का दांव

भाजपा और झामुमो के बीच शह मात का खेल जारी/झामुमो के किले में ‘भगवा निशान’ की कवायद में जुटी भाजपा /अपने गढ़ में और मजबूती से उभरने की जुगत भिड़ा रहा है झामुमो

देवघर/संवाददाता। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर संताल परगना की बिसात पर भाजपा और झामुमो ने मोहरों की तैनाती शुरू कर दी है। झामुमो का गढ़ रहा संताल में भाजपा जहां भगवा निशान छोड़ने की कवायद कर रही है तो वहीं झामुमो किसी भी कीमत पर अपने किले को बचाने की जुगत भिड़ा रहा है। पिछले आठ महीने से केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और पार्टी के कई सांगठनिक कार्यक्रमों का आयोजन कर भाजपा ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है तो झामुमो ने भी संघर्ष यात्रा के दौरान शक्ति प्रदर्शित कर सूबे की सत्ता साधने का संकेत दे दिया है।

सियासी योजनाओं पर तेजी से आगे बढ़ रही भाजपा

भाजपा संताल परगना में खुद को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार बढ़ रही प्रयासरत है। झामुमो के गढ़ सेंधमारी कर सत्ता पर पुन: काबिज होने की भगवा कवायद जारी है। इसी मुतल्लिक मुख्यमंत्री रघुवर दास का सबसे अधिक दौरा संताल परगना में हुआ है। जबकि उपराजधानी दुमका मेें मुख्यमंत्री बराबर रणनीति बनाने को लेकर पहुंचते रहे हैं। इसी मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा भी संताल परगना में हो चुका है, जहां पूरे प्रमंडल के जिलों के कार्यकर्ताओं का महासंगम हुआ था। साथ ही उपहार स्वरूप भाजपा सरकार ने साहिबगंज को बंदरगाह भी दिया।

योजनाओं की बौछार

केंद्र व राज्य सरकार झामुमो के किले को तोड़ने के लिए योजनाओं की बौछार कर चुकी है। देवघर में एम्स, एरयपोर्ट निर्माण, दुमका में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, गोड्डा में पावर प्लांट आदि की स्वीकृति ही नहीं, उस पर काम भी जारी है। संताल को कई नई ट्रेनें भी मिलीं। साथ ही कई ट्रेनों की दूरी का विस्तार कर संताल परगना को जोड़ा गया।

संताल परगना की मौजूदा राजनीतिक स्थिति

ज्ञात हो कि संताल परगना में तीन लोकसभा सीट है। इसमें दो पर झामुमो का कब्जा है। जबकि एक सीट पर भाजपा का कब्जा है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर मेंे भाजपा झारखंड के 14 में से 12 लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन संताल परगना में झामुमो के किले को ध्वस्त नहीं कर पायी। 18 विधान सभा सीट वाले संताल परगना में 7 सीट पर ही भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में सिमट गयी थी। भाजपा 2019 के लोकसभा व विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति के तहत काम में भिड़ी है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का संताल परगना में लगातार दौरा और विभिन्न योजनाओं की घोषणा भी जारी है। इतना ही नहीं संताल परगना क्षेत्र से तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।

झामुमो की सक्रियता से भाजपा में बेचैनी

संताल परगना में झामुमो अपने वर्चस्व व किले को बचाए रखने के लिए अपनी तैयारी में जुट चुक है। जाहिर है कि झामुमो की सक्रियता से भाजपा में बेचैनी भी है। खुद को महागठबंधन का मुख्य घटक दल े बतौर पेश कर झामुमो ने कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। झारखंड में बड़े भाई के रूप में झामुमो ने रोल निभाने की कवायद तेज कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी लहर व सत्ता के प्रति आक्रोश के बयार में भी महागठबंधन में 11 सीट अपनी झोली में डालने में पार्टी सफल रही थी। जिसमें झामुमो ने 6 सीट पर, कांग्रेस 3 सीट व झाविमो (प्र.) ने 2 सीट पर जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव में तो झामुमो ने 2 सीट पर जीत दर्ज कर अपना परचम लहराया था। अगामी लोकसभा चुनाव झामुमो संताल परगना के दुमका व राजमहल सुरक्षित सीट को बचाने की तैयारी के साथ-साथ विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन की रणनीति बनाकर कार्यक्रम भी शुरू करता दिख रहा है।

दुमका से झामुमो ने किया चुनावी अभियान शुरू

पिछले 2 फरवरी को उपराजधानी दुमका में झामुमो ने स्थापना दिवस के बहाने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। साथ ही भाजपा को इशारे में बता दिया कि संताल परगना झामुमो का गढ़ है। ये भी इशारा किया कि इस किले को ध्वस्त करना आसान नहीं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 20 फरवरी को देवघर बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना कर संताल परगना की संघर्ष यात्रा की शुरूआत की। साथ ही रोड शो, नुक्कड़ सभा, जनसभा, महापुरूषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। दूसरी ओर राज्य व केंद्र सरकार को अपने सवालों से कटघरे में खड़ा किया। सांसद शिबू सोरेन को चुनाव में पूरे दम-खम के साथ लाने की भी झामुमो की योजना है।

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