हिन्दुत्ववादी राजनीति का ये चेहरा अटल-आडवाणी का था विरोधी

अब प्रवीण तोगड़िया ने प्रेस कांफ्रेंस कर पीएम नरेंद्र मोदी से कड़वे हुए सबंधों का दिया साफ संकेत

90 के दशक में साथ-साथ स्कूटर से घुमने वाले विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सबकुछ सही नहीं है। मगर इससे पहले तोगड़िया ने अपेक्षाकृत उदार माने जाने वाली अटल-आडवाणी की जोड़ी के खिलाफ भी मोर्चा खोला था। छह साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान वाजपेयी को अगर किसी ने सबसे ज्यादा परेशान किया तो वह तोगड़िया ही थे। हिंदुत्व के एजेंडे से भाजपा का जो भी शीर्ष नेता तनिक भी टस से मस हुआ उसे तोगड़िया ने जमकर कोसा।

तोगड़िया एक साथ अटल-आडवाणी पर राम मंदिर आंदोलन से पीछा छुड़ाने की तोहमत जड़कर जुबानी हमले करते रहे। एक बार तो तोगड़िया ने यहां तक कह दिया था कि वाजपेयी और मुलायम सिंह की विचारधारा में कोई अंतर नहीं है। बाद में उन्होंने द्वापर युग के एक प्रसंग के जरिए वाजपेयी की बलराम से तुलना की और कहा था कि इस देश को बलराम जैसे नेताओं की जरूरत नहीं है, जो लड़ाई लड़ते-लड़ते अपना लक्ष्य भूल जाते हैं। इतना ही नहीं वाजपेयी को तब राजनीति छोड़कर यात्रा पर चले जाने की भी तोगड़िया ने सलाह दी थी और कहा था कि वह टिकट करा देंगे।

तोगड़िया हमेशा कहते रहे कि जिस राम मंदिर की बदौलत भाजपा को सत्ता मिली, वह उसी एजेंडे से भटक गयी है। तोगड़िया के अतीत के बयानों को देखने का यह निष्कर्ष है कि भाजपा की चाहे जो सरकार रही, तोगड़िया से उसकी पटरी नहीं बैठी। दो अक्टूबर 2002 में जब केंद्र में वाजपेयी सरकार के दौर में लखनऊ रैली में विहिप और बाजपेयी सरकार के बीच चल रही अंतरकलह खुलकर सामने आयी थी। विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने मंच से खुलकर अटल-आडवाणी की जोड़ी पर हमले किये। कहा कि इस देश को एरियल शेरॉन और जॉर्ज बुश जूनियर जैसे नेताओं की जरूरत है, जो आतंकवाद के खिलाफ कठोर हैं।

मालूम हो कि एरियल शेरॉन इजरायल के 11 वें प्रधानमंत्री रहे, विश्व के बड़े सैन्य नेताओं में भी व शुमार होते हैं। आतंकवाद को कुचलने के चलते शेरॉन को ‘बुलडोजर’ कहा जाता था। चार मार्च 2002 को एक साक्षात्कार में तोगड़िया ने आतंकवाद रोकने में बाजपेयी सरकार को पूरी तरह विफल बताया था। कहा था कि वाजपेयी सरकार में कश्मीर के रास्ते देश की संसद के दरवाजे तक आतंकवाद पहुंचा है। तोगड़िया ने कहा था कि मुस्लिम वोटों के लिए घुटने टेकना खतरनाक प्रवृत्ति है।

हालांकि वर्ष 2002 में गोधरा दंगे के बाद नरेंद्र मोदी विहिप की नजरों में हीरो बने। लखनऊ की उस रैली में तोगड़िया ने वाजपेयी की ओर इशारा करते हुए कहा था कि देश के नेता सुन लें, अगर जेहादियों के खिलाफ कठोर एक्शन नहीं लेंगे तो देश गृहयुद्ध की चपेट में आयेगा। फिर जगह-जगह मोदी ही खड़े दिखेंगे। तब मोदी के साथ तोगड़िया की ट्यूनिंग बेहतर थी। बाद के दिनों में मोदी के लिए तोगड़िया देश की हर रैली में माहौल भी बनाने में जुटे थे। मगर, आज वही तोगड़िया केंद्र में मोदी सरकार के भी खिलाफ हैं।

 

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