नेपाल की सत्ता में कम्युनिस्ट लौटे भारत में नोटबंदी के कारण!

भारतीय मुद्रा रखने से नुकसान उठाये नेपालियों ने भारत समर्थक नेपाली कांग्रेस को छोड़ चीन समर्थक कम्युनिस्टों को अपनाया

भारत में पिछले साल नोटबंदी से नेपालियों को भी बड़ा नुकसान हुआ था। क्योंकि वे समय पुरानी भारतीय मुद्रा नयी मुद्रा में परिवर्तित नहीं कर पाये। अभी भी नेपाल के लोग भारतीय रुपये की नोटबंदी का खामियाजा भुगत रहे हैं। क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नोटबंदी के साल भर बाद भी पुरानी भारतीय मुद्रा को नये से बदला नहीं है। नेपाल के सेंट्रल बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक के साथ 7.85 करोड़ रुपये के विमुद्रीकृत भारतीय रुपये को बदलने से आरबीआई अभी तक इनकार करता रहा है। आकलन के मुताबिक नेपाल के लोगों के पास अभी भी 20 अरब रुपये के पुराने भारतीय नोट हैं। भारत में हुई उस नोटबंदी के भूत ने नेपाल के लोगों का पीछा हाल में वहां हुए चुनाव में भी किया और इसने नेपाली वोटरों को इस हद तक प्रभावित किया कि उन्होंने भारत-समर्थक राजनेताओं और नेपाली कांग्रेस को हराकर चीन-समर्थक नेपाली कम्युनिस्ट पार्टियों को जीत दिला दी।

जो हो, अब केपी शर्मा ओली और प्रचंड नेपाल की सत्ता संभालेंगे। इससे भारत को राजनीतिक झटका लगा है। भारतीय मुद्रा में जो कमाई भारत में नोटबंदी के बाद नेपालियों के बेकार हो गयी थी, की भावना को नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत माक्र्सवादी लेनिनवादी और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओेवादी के कई नेताओं ने जमकर भुनाया। साथ ही नेपाली कांग्रेस के भारत-समर्थक नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। नेपाल के अगले संभावित प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल के चीन-समर्थक नेता केपी शर्मा ओली ने अपने सहयोगी पुष्प कमल दहल प्रचंड के साथ मिलकर संसद की 165 में से 116 सीटें जीत ली हैं।

दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 23 सीटें मिली। राष्ट्रीय जनता पार्टी को 11 और फेडरल सोशलिस्ट फोरम नेपाल को 10 सीटें मिली। हालांकि सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन-एमसी गठबंधन ने 7 प्रांतीय विधानसभाओं में से 6 में भी जीत दर्ज की है। संसद में ओली-प्रचंड की जोड़ी को दो-तिहाई बहुमत मिलने की उम्मीद है। ऐसे में वे नेपाल को आसानी से चीन की गोद में बैठा सकते हैं। इधर नेपाल राष्ट्र बैंक के डिप्टी गवर्नर चिंतामणि शिवकोटि ने कहा है कि भारत में नोटबंदी से नेपाल के लोगों को हुए नुकसान का मामला भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और रिजर्व बैंक के सामने हर स्तर पर कई बार उठाया गया है। लेकिन उनका जवाब नहीं आ रहा है। भारत की दो टीमों ने नेपाल का दौरा किया है। मगर, कुछ नहीं होने से नेपाल के लोगों का भारत और भारतीय मुद्रा से विश्वास उठ रहा है।

 

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