हिन्दू के साथ इसाई और मुस्लित को साधने में जुटी भाजपा

मेघालय में 37 चर्च के लिए केंद्र सरकार ने दिये 61 करोड़ रुपये, कर्नाटक में कायम है भाजपा का हिन्दुत्व एजेंडा तो पश्चिम बंगाल में करा रही मुसलमानों की बैठकें

सियासत और सत्ता की माया से आप अनजान हैं तो आपको ताज्जुब हो सकता है, लेकिन ये सच है कि अचानक भाजपा के एजेंडे पर हिन्दू और हिन्दुत्व के साथ इसाई और मुसलमान भी आ गये हैं। भगवा पार्टी में यह बदलाव वर्ष 2018 में होने वाले चुनावों के कारण आया है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जीतने के बाद भाजपा हैट्रिक लगाने की जुगत में है। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि भारतीय राजनीति में ऐसा वक्त पहली बार आया जब कोई राजनीतिक दल एक ही समय में तीन अलग-अलग धर्म के मतदाताओं को इस तरह से अपनी तरफ खींचने की कवायद में जुटा है।

इस साल यानी 2018 में मेघालय और त्रिपुरा में सबसे पहले चुनाव होने वाले हैं। भाजपा का जनाधार इन दो राज्यों में कमजोर है। मेघालय में कांग्रेस की सरकार है तो त्रिपुरा में सीपीएम वर्षों से राज कर रही है। इन दोनों राज्यों में ईसाई धर्म के वोटरों की संख्या निर्णायक है। सो, अमित शाह यहां दो रैलियां कर चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी की भी एक रैली हो चुकी है। इन दोनों राज्यों में भाजपा ने स्टार प्रचारक के तौर पर मोदी सरकार में ईसाई धर्म के इकलौते मंत्री अल्फोंस कन्नथनम को बना रखा है। पिछले दिनों केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री अल्फोंस ने मेघालय में 70 करोड़ के पैकेज का ऐलान किया जिसमें से 37 चर्चों को 61 करोड़ रुपये दिये जाएंगे।

इसाईयों की निर्णायक तादाद वाले त्रिपुरा और मेघालय में पहली बार हुआ भाजपा सरकार ने ईसाई धर्म के लोगों को अपनी तरफ खींचने में पूरी ताकत लगा दी है। मालूम हो कि गोवा में भी अरसे तक भाजपा की सरकार नहीं बन पायी थी, क्योंकि ईसाई धर्म के मतदाता उसे अपना नहीं मानते थे। लिहाजा, मनोहर पर्रिकर ने पार्टी से अलग अपनी लाइन पकड़ी और अब भी वे उसी लाइन पर चलते हुए गोवा में भाजपा की सरकार चला रहे हैं। जो हो, मेघालय अगर कांग्रेस के हाथ से निकल गया तो अमित शाह कांग्रेस मुक्त भारत के नजदीक पहुंच जाएंगे। ऐसा होने पर राहुल गांधी के पास सिर्फ तीन राज्यों पश्चिम में पंजाब और दक्षिण में पुडुचेरी और कर्नाटक में सरकार बचेगी।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में भी इसी साल चुनाव होने हैं। सो, यहां भाजपा का पूरा जोर हिन्दू वोटों को एकजुट करने पर है। इसके लिए कर्नाटक में पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को अपना स्टार प्रचारक बनाया है। योगी यहां एक राउंड प्रचार कर चुके हैं और सिद्धारमैया को हिन्दू विरोधी सीएम बताते रहे हैं। हालांकि जवाब में सिद्धारमैया कहते हैं कि उनके नाम में ही राम है। अमित शाह ने भी यहां परिवर्तन रैली की शुरुआत कर दी है। चित्रदुर्ग की सभा में शाह ने सीधे हिन्दू वोट की बात की और कहा कि सिद्धारमैया की सरकार हिन्दू विरोधी है। वैसे, उम्मीद जतायी जा रही है कर्नाटक में हिन्दू वोटों की खातिर कांग्रेस भी एड़ी-चोटी एक करेगी। दक्षिण में इस बार राहुल गांधी का वही रंग दिखेगा जो गुजरात के वक्त था। राहुल कर्नाटक के मंदिरों की भी परिक्रमा करेंगे।

पश्चिम बंगाल में चुनाव होने में अभी देर है लेकिन यहा अभी से धर्म-धर्म और मजहब-मजहब खेला जाने लगा है। पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों का वोट पाने के लिए भाजपा अपनी पूरी ताकत लगा रही है। यहां पिछले एक महीने में सियासत की उल्टी गंगा बही है। ममता बनर्जी की पार्टी बड़ी तेजी से हिंदू मतदाताओं से नजदीकी बनाने में जुटी है। बीरभूम में सूबे के सभी बड़े पंडितों का सम्मेलन बुलाया गया और इसे ब्राह्मण सम्मेलन का नाम दिया गया। ममता इसके बाद खुद गंगासागर मेले की तैयारी में जुट गयीं। ममता सरकार गंगासागर मेले के वक्त भक्तों का ख्याल करती दिखी। मेले में ममता ने ऐसा इंतजाम पहले कभी नहीं किया था।

हालांकि इसके जवाब में भाजपा भी उल्टी गंगा बहा रही है। भाजपा मुस्लिम सम्मेलन करा रही है। तीन तलाक का बिल लोकसभा में पास करवाने को पार्टी ने अपनी विजय बताते हुए इसे जश्न के मौके का नाम देकर कोलकाता में सिर्फ मुस्लिम समाज के लोगों को बैठक में बुलाया है। इस मौके पर इशरत भी मौजूद रहेंगी, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। इशरत ने कुछ दिन पहले ही भाजपा की महिला मोर्चा की सदस्यता ग्रहण की हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में 26 फीसदी मुस्लिम आबादी है। लिहाजा, यहां भाजपा तभी ममता बनर्जी को हरा सकती है जब हिंदुओं के साथ उसे मुस्लिम वोट भी मिले। इसी मकसद से पश्चिम बंगाल में भाजपा और संघ का राष्ट्रीय मुस्लिम मंच 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सक्रिय है।

 

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