मोदी और भाजपा पर तोगड़िया की किताब का हमला

हिन्दुत्व के नाम पर देश भर के युवाओं में त्रिशूल बांटने वाले तोगड़िया को लग रहा है कि भाजपाई सियासत ने हिन्दुओं को ठगा है

‘सैफरान रिफलेक्शनः फेसेस एंड मास्क’ लेखक-प्रवीण तोगड़िया

अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के जरिये देशभर के युवाओं को संघ परिवार से जोड़ने वाले और बजरंग दल से लेकर विश्व हिन्दू परिषद को नयी पहचान दिलाने वाले प्रवीण तोगड़िया ने अपनी पुस्तक से मोदी और भाजपा पर हमला बोला है। उनकी किताब ‘सैफरान रिफलेक्शनः फेसेस एंड मास्क’ (केसरिया प्रतिबिंब-चेहरे और मुखौटे) कहती है कि सियासत ने हिन्दुओं को राम मंदिर के नाम पर ठग लिया है। पुस्तक कहती है कि सत्ता में आने के लिए भाजपा ने हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया है।

‘सैफरान रिफलेक्शनः फेसेस एंड मास्क’ लिखकर तोगड़िया ने भाजपा की उस राजनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह पुस्तक लिखने वाले तोगड़िया वही शख्स हैं, जिन्होंने एक समय हिन्दुओं के जागरण के नाम पर देश भर में घुम-घुम कर युवाओं को हाथों में त्रिशूल बांटते दिखते थे। वर्ष 1990 में आडवाणी की निकली रथयात्रा और 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से भाजपा की राजनीति को बारीकी से पुस्तक ने छुआ है। जिस राजनीति के बूते सत्ता पाने की भाजपा में बेचैनी थी, उसका भी जिक्र किया है।

तोगड़िया ने पुस्तक में संकेत दिया है कि सत्तामुखी भाजपा की राजनीति को संघ परिवार बेबस होकर देखता रहा था। उन्होंने लिखा है कि राजनीति ने हिन्दुओं के सामने राम मंदिर को किसी गाजर की तरह ये कहते हुए हिलाया है कि राम मंदिर अब बनेगा, तब बनेगा, जरूर बनेगा। अस्सी के दशक से नरेंद्र मोदी के नजदीकी रहे प्रवीण तोगड़िया ने पहली बार केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। लिखा है कि सरकार ने राम मंदिर के लिए संसद में कानून बनाने की जगह हिन्दुओं की आकांक्षा से खेलना शुरु किया। राम मंदिर को हिन्दुओं का लॉलीपाप बना दिया और भावनाओं को उभार कर चुनाव जीत लिया।

मालूम हो कि राम मंदिर आंदोलन में तोगड़िया की सक्रिय भूमिका देखते हुए दो दशक पहले उन्हंे विहिप का महासचिव और वर्ष 2011 में अशोक सिंघल के जीवित रहते विहिप का अंताराट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। पेशे से चिकित्सक तोगड़िया ने पुस्तक में लिखा है कि राम मंदिर, धारा 370, काॅमन सिविल कोड, बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजना, गोवंश हत्या बंदी, विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं को फिर से बसाने के सवाल पर भी सरकार ने धोखा दिया है। जबकि चुनाव के वक्त इन्हीं मुद्दों को उठा कर हिन्दू यूफोरिया खड़ा किया गया था।

पुस्तक में उन्होंने साफ लिखा है कि हिन्दू एक वाइब्रेंट जिंदा समाज मन है। हिन्दू सांस लेते हैं। उन्हें नौकरी चाहिए। अच्छी व सस्ती शिक्षा चाहिए, किसानों को उचित मूल्य चाहिए, महिलाओं को सुरक्षा चाहिए। महंगाई पर नियंत्रण चाहिए। बेहतर चिकित्सा सुविधाएं चाहिए। मगर, सत्ता साधने वाले राजनेताओं ने हिन्दुत्व आंदोलन को ही चुनावी कठपुतली बना दिया है। बताते चलें कि प्रवीण तोगड़िया सौराष्ट्र के पटेल हैं। किसान परिवार से आते हैं। हिन्दुत्व के चेहरे भी हैं।

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