एक गांव को नहीं है पुलिस व कोर्ट की जरूरत

40 सालों से सक्रिय आदर्श गांव खंभरा की ग्राम सभा ने पेश किया मिसाल, पुलिस में नहीं पहुंचा एक भी मामला, शहीद महेंद्र सिंह की विरासत संभाले विनोद सिंह चुनाव हार गये लेकिन बगोदर का उनके लिए भरोसा है कायम

झारखंड के गिरिडीह जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर पक्के रास्तों से गुजरते हुए आप आदर्श गांव खंभरा में दाखिल हो सकते हैं। इस गांव को किसी सरकारी माॅडल विलेज स्कीम में शामिल होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, बगैर किसी सरकारी खर्च के इस गांव ने वह कर दिखाया है, जो नामुमकिन तो नहीं था मगर आसान भी नहीं। अगर आप नये हैं, तो आपको लग सकता है कि खंभरा गांव देश के प्रधानमंत्री, सूबे के मुख्यमंत्री या किसी केंद्रीय मंत्री का गांव होगा। लेकिन, ऐसा भी नहीं है। दरअसल, खंभरा पूर्व विधायक विनोद सिंह का गांव है।

विनोद सिंह भाकपा (माले) के नेता और पूर्व विधायक हैं। हालांकि उन्हें विरासत में आदर्श गांव खंभरा मिला। उनके पिता शहीद महेंद्र सिंह ने खंभरा को आदर्श गांव के रूप में गढ़ा था। लेकिन, 12 साल पहले बगोदर के माले विधायक महेंद्र सिंह की राजनीतिक हत्या के बाद बगोदर के विधायक बने विनोद सिह ने खंभरा को आगे और भी संवारने के लिए कई प्रयोग किया। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में विनोद सिंह मामूली वोट से हार गये, लेकिन उनपर बगोदर का भरोसा आज भी कायम है।

जो हो, गांव के लोग अपने जननायक यानी शहीद विधायक महेंद्र सिंह के शहादत दिवस की तैयारी में जुटे हैं। शहीद महेंद्र सिंह ने ही वर्ष 1978 में खंभरा को आदर्श गांव बनाने की नींव रखी थी। इसके लिए उन्होंने 35 सदस्यों की ग्राम सभा का गठन किया था। तब से यहां ग्राम सभा सक्रिय है। गांव के हरेक छोटे बड़े फैसलों का निबटारा गांव में ही होता है। लिहाजा, पिछले 40 सालों से बगोदर थाना में एक भी मामला नहीं पहुंचा है। पुलिस भी मानती है कि गांव की व्यवस्था उनके लिए बड़ी राहत है। सरिया बगोदर अनुमंडल के एसडीपीओ दीपक कुमार भी खंभरा गांव की व्यवस्था को बेहतर मानते हैं। उनका कहना है कि खंभरा की राह पर और भी गांवों को आगे बढ़ना चाहिए।

अभी गांव में जो व्यवस्था है, वह भी अन्य गांवों के लिए प्रेरणादायक है। गांव में पर्यावरण पर भी ग्राम सभा का खास ध्यान है। पेड़ों को काटने पर सख्त मनाही है। यही वजह है कि दूसरे गांवों में जहां जंगल उजड़ रहे हैं, वहीं खंभरा में पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध है। ग्राम सभा के अनुशासन से बंधे ग्रामीण इस प्रतिबंध को भी नहीं तोड़ते। शहीद महेद्र सिंह के बाद पूर्व विधायक विनोद सिंह की देखरेख में ग्राम सभा ने गांव में अलग से वृक्षारोपण भी कराया। 300 एकड़ जमीन पर सखुआ के पेड़ लगे हैं। सैंकड़ों फलदार वृक्ष भी गांव में हैं, जो गांव की जरूरतें भी पूरी करते हैं। ग्राम सभा के गठन के करीब 12 साल बाद महेंद्र सिंह के विधायक बनने के बाद खंभरा ने खुद को विकास के मॉडल के रूप में ढाल लिया।

माले के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि महेंद्र सिंह ने विधायक रहते हुए गांव में जो सामुदायिक भवन बनवाया, वह विकास की मिसाल है। सामुदायिक भवन के लिए मिले पैसे से गांव के लोगों ने जो ढांचा तैयार किया है, वह आलीशान भवन दिखता है। उन्होंने बताया कि गांव में बेहतर तरीके से सिंचाई व्यवस्था के लिए गांव वालों ने अपनी जमीन ग्राम सभा को दे दी। इसमें श्रमदान से दो तालाब और डैम बनाये गये हैं। साथ ही गांव की गलियां पक्की हैं। आड़ी-तिरछी सडकों का पक्कीकरण हुआ है।

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