तोगड़िया और मोदीः भगवा रंग में रंगे, मगर फासले बहुत

जानिये वे वजहें जिसने हिन्दुत्व की विचारधारा में साथ-साथ रहने पर भी प्रवीण तोगड़िया और नरेंद्र मोदी के बीच बना दी दूरी

एक समय था जब संघ पदाधिकारियों से मिलने के लिए नरेंद्र मोदी और प्रवीण तोगड़िया साथ-साथ एक ही स्कूटर पर बैठ कर निकलते थे। दौर 90 के दशक का था। लेकिन, कुछ मतभेद ने दोनों को एक दूसरे का विरोधी बना दिया। ऐसा देखते-देखते हो गया और दोनों नेताओं के 20 साल पुराने रिश्ते का फासला बड़ा और चैड़ा होता गया। विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया की मंगलवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस ने तो चिंगारी को ऐसे भभका दी कि नहीं जानने वाले भी कुछ-कुछ समझने लग गये।

तोगड़िया ने केंद्र के अधीन इंटेलीजेंस ब्यूरो पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इससे निशाना मोदी सरकार की ओर गया। जानकार बताते हैं कि दोनों की दोस्ती में दरार तभी पड़ गयी थी, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। लेकिन, दरार को कम किये जाने की कोशिश नहीं हुई तो यह दिनों-दिन और चैड़ा होता गया। हालांकि जानकारों की मानें तो वर्ष 2002 में मोदी के मुख्यमंत्री बनने में तोगड़िया ने भी मदद की थी। मगर, मोदी और तोगड़िया के रिश्ते बिगड़ने की शुरुआत गुजरात सरकार में तोगड़िया के आउट आॅफ वे जाकर हस्तक्षेप करने से हुई।

वर्ष 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी को पता चला था कि गृहविभाग के कामकाज में तोगड़िया बहुत अधिक हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस पर तोगड़िया को मोदी ने सरकार के कामकाज में दखलंदाजी नहीं करने को कहा था। साथ ही इस मामले में अफसरों को भी नसीहत दी थी। इससे तोगड़िया आहत हुए और उन्हें काफी बुरा लगा। तभी से दोनों के बीच फासला बढ़ने लगा। बाद के दिनों में जब गांधीनगर के विकास के नाम पर दो सौ मंदिरों को तोड़ दिया गया तो तोगड़िया ने इसे मुद्दा बनाया। दूसरी ओर जिन्ना पर आडवाणी की टिप्पणी के विरोध में भी जब विहिप कार्यकर्ता गुजरात में प्रदर्शन कर रहे थे तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इस मसले पर भी विहिप और गुजरात की तत्कालीन मोदी सरकार के बीच मतभेद और टकराव बढ़े थे।

दूसरी ओर वर्ष 2011 में जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सद्भावना कार्यक्रम आयोजित किया तो इसकी तोगड़िया ने जमकर खिल्ली उड़ाई थी। उन्होंने मोदी पर अपनी छवि चमकाने के लिए हिंदुत्व के एजेंडे को डंप करने का आरोप लगाया था। इधर ‘अहमदाबाद मिरर’ में छपी एक रिपोर्ट में विहिप के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है कि संघ और भाजपा की कोशिश विश्व हिंदू परिषद से तोगड़िया को मुक्त करना रही है। ताकि संघ के बैनर तले कुछ नये कार्यक्रम भी आयोजित किये जायें। क्योंकि, तोगड़िया ने इसका विरोध किया है।

हाल ही में विहिप की कार्यकारी परिषद की भुवनेश्वर में हुई बैठक में तोगड़िया और अध्यक्ष रेड्डी के 31 दिसंबर 2017 को खत्म हो रहे कार्यकाल के बाद आगे के लिए मनोनयन पर चर्चा होनी थी। मगर, तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध कर दिया था। बाद में तोगड़िया ने संगठन कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ नेता उन्हें हटाने की साजिश कर रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर ‘अहमदाबाद मिरर’ में छपी रिपोर्ट में विहिप नेता ने कहा है कि इन्हीं सब कारणों से पिछले 15 दिनों में तोगड़िया के खिलाफ 22 साल पुराने केस खुलवाये गये हैं। इसमें एक केस गुजरात और दूसरा राजस्थान से जुड़ा हुआ है।

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