इस्पात बनती सरकार और अम्बानी की सरसों-रोटी

सालबोनी टू सिंगूरः पश्चिम बंगाल की राजनीति का हाल और उसकी हकीकत

उत्तम मुखर्जी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वामपंथियों की सत्ता उखड़ने व ममता बनर्जी के उत्थान की प्रयोगशाला अगर सिंगूर-नंदीग्राम है तो सालबोनी सरकार गठन की पाठशाला। मिदनापुर का यह इलाका दीदी के लिए टर्निंग पॉइंट है। बंगाल के मशहूर कवि सुकांत के भतीजे और तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को लगा कि बंगाल में राजनीति बहुत हुई। अब कुछ काम हो। टाटा का नैनो उन्होंने सिंगूर में लाया। नंदीग्राम में भी उद्योग मंगाए। दुर्गापुर को राष्ट्रीय नक्शे में ला दिया। कोलकाता का राजारहाट विकसित होने लगा। सलेम को कारखाने के लिए इंडोनेशिया से बुलाया। पूरी दुनिया ने उनका स्वागत किया और बंगाल ने उन्हें खारिज कर दिया।

वामपंथियों ने भी सलेम का विरोध किया। उनके दादा ने कम्युनिस्टों का कत्लेआम कराया था। ईमानदार-कवि सीएम बुद्ध को लगा था कि लोग उन्हें सर पर बैठाएंगे। ज्योति बसु जब सीएम थे तब ऐसे कार्यों का विरोध करते थे। भूमि सुधार उनका एजेंडा था। बखूबी उन्होंने ने यह काम पूरी तन्मयता के साथ किया भी।

हां, तो बात हो रही थी सालबोनी की। जिंदल का यहां प्लांट लग रहा था। बुद्ध की गाड़ी निकल गयी। केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान की गाड़ी निकलनेवाली थी कि एक आदिवासी किशोर ने पूंजीपतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए पटाखे फोड़ दिए। माओवादी बताकर उक्त किशोर के साथ पुलिस ने बेइंतहा जुल्म किया। बच्चे की एक आंख नष्ट हो गयी। प्रतिवाद शुरू हुआ। वामपंथियों के ’बदले-चेहरे‘ का लाभ ममता ने खूब उठाया।

लालगढ़ में छत्रधर महतो ने छापामार युद्ध शुरू किया। माओवादी किसन जी की एंट्री हुई। उनके कंधे का इस्तेमाल खूब हुआ। सालबोनी, सिंगूर, नंदीग्राम दहकने लगे। इस आग में वामपंथियों का गढ़ ध्वस्त हो गया और कम्युनिस्टों की लाइन पर ममता ने इसे हाइजेक कर लिया।

ममता की सरकार ने किसनजी को साफ कर दिया। सालबोनी में जिंदल फिर सक्रिय हैं। तस्वीर खुद देख लें। सिंगूर-नंदीग्राम में डेढ़ हजार करोड़ का स्ट्रक्चर ध्वस्त कर सरसों की मामूली खेती हो रही है। जिंदल, कोटक, बियानी सभी दीदी के भाई बन गये। मोदीजी के करीबी समझे जानेवाले मुकेश अंबानी भी दीदी के प्रबल भक्त बन गये।

अब तो मुल्क के टॉप बिजनेस टाइकून बना रहे हैं पाॅलिसी। तेजी से बदलते इस समीकरण के बीच मुझे सालबोनी में जाने का मौका मिला। जिंदल के अधिकारी तो मिले लेकिन दीदी से बातें बाकी हैं। शायद सिंगूर में मुकेश भाई पहुंचे। बंगाल पंजाब में तब्दील हो जाये और टाटा के फाइव स्टार होटल ताज बेंगल में अंबानी को सरसों रोटी पसंद आ जाये…।

आलेख का दूसरा हिस्सा जल्द ही।

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