अभी रोकनी होगी और भी धर्म यात्राओं की सब्सिडी

आर्थिक संकट झेल रही सरकार को हज यात्राओं की सब्सिडी रोकने के बाद और भी धार्मिक यात्राओं पर बंद करनी होगी फिजूलखर्ची

सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इतर भी आर्थिक संकट झेल रही सरकार के लिए हज यात्रा पर सरकारी सब्सिडी रोकना जरूरी हो गया था। क्योंकि सरकार ने आर्थिक संकट के चलते 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का ऐलान किया था। हालांकि बाद में सरकार ने बताया कि उसे तत्काल 20 हजार करोड़ रुपये ही कर्ज लेने की जरूरत है। कुल मिलाकर इन हालात में पंथ निरपेक्ष भारत के लिए धार्मिक यात्राओं पर सब्सिडी के नाम पर फिजूलखर्ची बेमतलब और अतार्किक ही साबित हो रहे थे। लेकिन, तथ्य बताते हैं कि अभी भी कई धर्म यात्राओं पर सरकार की सब्सिडी जारी है।

हालांकि हजयात्रा पर सब्सिडी रोकने के मामले का मुस्लिम समाज के बड़े तबके ने स्वागत ही किया था। लेकिन, कुछ हिन्दू धर्म यात्राओं के लिए अब भी सब्सिडी जारी है। इसाईयों के लिए भी कुछ ऐसी सब्सिडी अब भी कायम है। देश में राज्य सरकारें भी तीर्थयात्राओं के लिए सब्सिडी देती हैं। मुसलमानों के लिए कुछ धर्मयात्राओं के लिए सब्सिडी अभी बंद नहीं हुई है। असम में वृद्धों के लिए वर्ष 2004-05 में कांग्रेस ने धर्मज्योति योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत 20 के समूह में जाने वाले यात्रियों को बस यात्रा का आधा खर्च दिया जाता है। इसी तरह पुण्यधाम यात्रा वर्ष 2017 में भाजपा सरकार ने शुरू की। इस योजना में सरकार जगन्नाथ मंदिर, मथुरा, वृंदावन, अजमेर शरीफ और वैष्णो देवी की यात्रा का खर्च उठाती है।

ऐसी ही अन्य धार्मिक यात्राओं पर सरकारी सब्सिडी पर नजर डालें तो इसी हफ्ते दिल्ली की कैबिनेट ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना शुरू की है। हर विधानसभा सीट से 1100 वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के तहत तीर्थयात्रा करायी जाएगी, जिसका पूरा खर्च सरकार उठायेगी। उन्हीं को इस यात्रा का लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक कमाई 3 लाख रुपये से कम है। यात्रियों को 2 लाख के इंश्योरेंस के अलावा आने जाने, ठहरने और भोजन का खर्च मिलेगा। वर्ष 2001 से गुजरात में शुरू कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सब्सिडी योजना जारी है। सिंधु दर्शन और श्रावण तीर्थदर्शन योजना इस साल से शुरू हुई है। मानसरोवर के लिए 23 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान भी है।

सिंधु दर्शन के लिए 15,000 और श्रावण तीर्थ दर्शन के लिए 50 लोगों के समूह में जाने पर यात्रियों को बस यात्रा का आधा खर्च दिया जाता है। जबकि हरियाणा में मौजूदा सरकार 50 बुजुर्ग यात्रियों को सिंधु दर्शन यात्रा के लिए 10 हजार रुपये देती है। मानसरोवर की यात्रा के लिए 50 दूसरे यात्रियों को 50 हजार रुपये मिलते हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत हरेक साल सूबे के वरिष्ठ नागरिकों को इसका लाभ मिलता है। उन्हें बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथपुरी, द्वारका, वैष्णोदेवी, गया, हरिद्वार, शिर्डी, तिरुपति, अजमेर शरीफ, काशी, श्रावण बेलागोला और वेलांकन्नी चर्च की यात्रा के लिए सरकार सब्सिडी मुहैया कराती है।

कर्नाटक के लोगों को सरकार की तरफ से चार धाम यात्रा के लिए 20 हजार रुपये प्रति यात्री सहयोग दिये जाते हैं। कांग्रेस सरकार ने यह योजना वर्ष 2014 में शुरू की थी। इससे पहले भाजपा सरकार ने मानरोवर यात्रा के लिए 30 हजार रुपये प्रति यात्री सब्सिडी देना शुरू किया था। वर्ष 2017 में एक और नयी सब्सिडी के तहत राज्य में तीर्थ पर जाने वाले सभी धर्मों के लोगों को खर्च का 25 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। वर्ष 2013 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल से मुफ्त तीर्थयात्रा योजना शुरू की थी। भाजपा सरकार ने पिछले साल इस योजना का नाम बदलकर इसमें विमान यात्रा को भी शामिल करा दिया। फिलहाल 13 तीर्थस्थलों के लिए यह सुविधा मिलती है। वर्ष 2013 से लेकर अब तक 80 हजार से ज्यादा लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है।

दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हिन्दुओं को मानसरोवर और मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए सब्सिडी दी जाती है। येरुशलम की यात्रा पर यहां से जाने वाले ईसाई भी सब्सिडी पा सकते हैं। मानसरोवर और मुक्तिनाथ की सब्सिडी वर्ष 2012 में शुरू हुई। मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को इस योजना के तहत 40 हजार और मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए 10 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। येरुशलम जाने वालों को 20000 रुपये बतौर सरकारी सहयोग मिलते हैं। उड़ीसा में वर्ष 2016 में सरकार ने वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना शुरू की। इसमें वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ यात्रा का पूरा खर्च मिलता है। इसके लिए सरकार ने पहले वर्ष में 5 करोड़ रुपये की रकम तय की थी।

सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में आयी भाजपा सरकार ने ऐसी कुछ सब्सिडी दोगुनी कर दी। कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले यहां के लोगों को अब एक लाख रुपये प्रति यात्री मिलेंगे। साथ ही समाजवादी पार्टी की सरकार ने श्रावण यात्रा के लिए विशेष रेलगाड़ी की व्यवस्था की थी, जिसमें वरिष्ठ नागरिक ही सफर कर सकते हैं। वर्ष 2014 में उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने ‘मेरे बुजुर्ग, मेरे तीर्थ’ नाम से योजना शुरू की। जिस योजना में वरिष्ठ नागरिकों को राज्य के तीर्थस्थलों की यात्रा करायी जाती है। भाजपा सरकार ने आते ही इसका नाम बदल दिया। यहां पीरन कलियार दरगाह समेत कई और तीर्थ स्थानों को भी इसमें शामिल किया गया। उत्तराखंड संस्कृति मंत्रालय कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वालों को इस साल से 30 हजार रूपये की सब्सिडी देगा।

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