शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार का छोड़ा साथ

केंद्र में गठबंधन तोड़ने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ेगा असर, फडणवीस सरकार के साथ बीएमसी में भी भाजपा के साथ है शिवसेना

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र की भाजपा सरकार से गठनबंधन तोड़ने के बाद मंगलवार को मुंबई में खुल कर भड़ास निकाली। ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व के लिए शिवसेना हरेक राज्य में अपने बल पर चुनाव लड़ेगी। खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंत प्रधान कहते हैं, लेकिन इस्राइल के पीएम को अहमदाबाद ले गये। जबकि उन्हें श्रीनगर के लाल चैक लेकर जाना चाहिए था। जहां इस्राइल के प्रधानमंत्री का रोड शो कराया जाता। क्या उन्होंने लाल चैक पर तिरंगा फहराया है?

दूसरी ओर शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उद्धव ठाकरे ने कंेद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर भी नेवी का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जवानों का असल मायनों में सीना 56 इंच का होता है। उनका अपमान कैसे कोई कर सकता है। मालूम हो कि भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद लोकसभा का चुनाव भी शिवसेना ने अकेले लड़ने का फैसला लिया है।

बहरहाल, शिवसना के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर पड़ने के कयास लगाये जा रहे हैं। बताते चलें कि महाराष्ट्र सरकार के अलावा बाॅम्बे महानगर निगम में भी भाजपा-शिवसेना की गठबंधन सरकार है। शिवसेना ने यह फैसला तब लिया है, जब पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव का मेंबर बनाया गया है।

दरअसल, गठबंधन तोड़ने का यह फैसला शिवसेना ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया है। हालांकि, भाजपा से शिवसेना के लंबे समय से चल रहे मतभेदों को देखते हुए यह फैसला सामान्य ही माना जाएगा। क्योंकि, शिवसेना राज्य की फडणवीस सरकार के साथ केंद्र की मोदी सरकार की बड़ी आलोचक रही है। शिवसेना ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की भी विरोधी रही है। साथ ही जीएसटी जैसे केंद्र सरकार के फैसलों से लेकर हर उस मुद्दे पर शिवसेना अपने भाजपा पर हमलावर रही।

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