लालू यादव के जेल जाने से बिखर रहा राजद!

पार्टी के महासचिव ने तेजस्वी की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए दिया इस्तीफा

चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद में इन दिनों घमासान है। पार्टी में टूट की आशंका बतायी ही जा रही थी कि राजद महासचिव अशोक सिन्हा ने संगठन को बाय-बाय बोल दिया। लालू पुत्र और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अशोक सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया है। अशोक सिन्हा ने कहा है कि तेजस्वी यादव की कार्यशैली से वे असंतुष्ट हैं। वे तेजस्वी के साथ काम करने से खुश नहीं थे। दरअसल, लालू यादव के जेल जाने के बाद तेजस्वी यादव के ही नेतृत्व में राजद का काम चल रहा था।

राजद महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद अशोक सिन्हा ने कहा कि राजद मौजूदा समय में अप्रासंगिक हो चुका है। इस संगठन में अपना समय बर्बाद करने से अच्छा है कि पार्टी छोड़ दी जाये। तेजस्वी यादव पार्टी को वैसा नेतृत्व नहीं दे सकते जैसा लालू प्रसाद यादव देते थे। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव को सजा होने के बाद उनकी गैरमौजूदगी में राजद की बागडोर उनके पुत्र और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सौंप दी गयी थी।

बहरहाल, लालू की गैरमौजूदगी में राजद की बागडोर संभाल रहे तेजस्वी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंतर्कलह को खत्म करना ही होगा। लेकिन, पार्टी महासचिव के इस्तीफे के साथ उन्हें पहला झटका मिला है। तेजस्वी के सामने बिहार में पार्टी के परंपरागत वोट को भी साथ बनाये रखने की भी बड़ी चुनौती होगी। लालू के जेल जाने के बाद विरोधियों ने यह कयास लगाना शुरू कर दिया था कि राजद में टूट होगी या पार्टी में घमसान मचेगा। वैसे, तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी को एकजुट रखने का दावा कई नेताओं ने किया था। राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पिछले दिनों दावा किया था कि राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लालू प्रसाद की पार्टी के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, रघुवंश के दावे को कुशवाहा और मांझी सहित एनडीए के नेताओं ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि रघुवंश का राजद में ही कोई अधिकार नहीं है। उन्हें ज्यादा बोलने की आदत है।

 

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