विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग जारी रखेंगे नीतीश

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के नहीं थे पक्षधर / तत्कालीन पीएम ने प्रतिनिधिमंडल को नहीं दिया था मिलने का समय : नीतीश कुमार/ कहा, विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर उन्हें सभी दलों का सहयोग हासिल

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जा दिये जाने की मांग आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दुहराते हुए सोमवार को कहा कि प्रदेश के लोगों की यह जायज मांग है। इस मुद्दे पर उन्हें सभी दलों का सहयोग हासिल है। नीतीश ने यहां ‘लोकसंवाद’ के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह काफी लंबे समय से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग करते रहे हैं। इसके लिए राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों से सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पारित किया गया है। विशेष दर्जा से संबंधित ज्ञापन देने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय नहीं दिया था, इसलिए राज्य के एक करोड़ से अधिक लोगों के हस्ताक्षर के साथ ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि इस ज्ञापन में आग्रह किया गया था कि बिना किसी देरी के वह राज्य को विशेष दर्जा दिये जाने की मांग को स्वीकार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद ऐसा समझा जाने लगा कि किसी राज्य को अब विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना संभव नहीं है। कुछ सप्ताह पहले भी विशेष दर्जे की मांग पर सर्वदलीय बैठक बुलायी गयी थी, जिसमें सभी दलों ने राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग का समर्थन किया था। बैठक में सभी दलों की ओर से 15वें वित्त आयोग को विशेष दर्जे की मांग से संबंधित ज्ञापन देने पर सहमति बनी है। ऐसे में किसी भी पार्टी के अलग होने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस मुद्दे पर सभी का सहयोग है।

बिहार के पास विशेष राज्य का दर्जा पाने का मजबूत आधार

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा पाने का मजबूत आधार है। क्योंकि, यह एक स्थलरुद्ध प्रदेश है। यहां कोई तटीय क्षेत्र नहीं है और यह प्रदेश हर साल बाढ़ व सुखाड़ जैसी आपदा झेलता है। बाढ़ का कारण पड़ोसी देश नेपाल से आने वाली नदियां हंै। बिहार एक पिछड़ा राज्य है। यहां प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योगों का जाल बिछाने के लिए करों में छूट दिये जाने की जरूरत है। विशेष राज्य का दर्जा मिलने से उद्योगों को यह रियायत मिल सकेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा निवेशक आकर्षित होंगे और राज्य में रोजगार का सृजन होगा। उन्होंने कहा कि बिहार कई सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है और इस राज्य के विकास दर में तेजी लाये जाने के लिए इसे विशेष दर्जा दिया जाना आवश्यक है।

दर्जा मिलने पर केंद्र की योजनाओं में 10 फीसदी ही भार उठायेगा बिहार

कुमार ने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र और 10 प्रतिशत ही प्रदेश सरकार को वहन करना पड़ेगा। यदि बिहार को यह दर्जा मिले तो राज्य के पास कल्याणकारी व विकास से जुड़ी कई योजनाएं शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन होंगे। मुख्यमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करने के उद्देश्य से लागत मूल्य का आकलन करने के लिए अपनाये जाने वाले फॉर्मूले पर पूछे जाने पर बताया कि कृषि उत्पादों का लागत मूल्य तय करने के लिए केंद्र सरकार के अधीन एक प्रकोष्ठ कार्यरत है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय तक कृषि मंत्री भी रहे हैं, इसलिए उन्हें पता है कि यह प्रकोष्ठ एक स्वतंत्र निकाय है और कृषि उत्पादों का लागत मूल्य निर्धारित करने के लिए यह हमेशा राज्य के संपर्क में रहता है। उन्होंने बताया कि एमएसपी निर्धारण के आकलन में यह प्रकोष्ठ लागत मूल्य में 50 प्रतिशत लाभ को जोड़ देता है।

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