शराब के शौकीनों की जेब पर रोजाना दो लाख का डाका

शराब बिक्री करने वाले कर्मचारियों को हटाकर हवा में तलवार भांग रहा उत्पाद विभाग/ हटाये गये कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, खोले कई राज

देवघर/संवाददाता। सरकारी शराब दुकान से तय मूल्य से अधिक पर शराब बेचने का गौरखधंधा जिले बदस्तूर जारी है। उत्पाद विभाग शराब के शौकिनों की शिकायत पर शराब बिक्री करने वले पांच कर्मचारियों को हटा चुकी है। लेकिन मूल्य से अधिक दाम ग्राहकों से वसूले जाने पर रोक नहीं लग सकी है। लिहाजा, सभी सरकारी शराब दुकानों में छोटे बोतल पर 5 रुपया, मंझले पर 10 रुपया व बड़े पर 20 रुपये अधिक की वसूली प्रति बोतल की जाती है। सूत्रों के अनुसार रोजाना दो लाख रुपये के लगभग अवैध वसूली ग्राहकों से शराब बिक्री के नाम पर हो रही है। इस खेल में कौन-कौन शामिल है यह जांच का विषय है। रविवार को व्हाट्सएप पर अधिक मूल्य लेने का ऑडियो वायरल होने पर उत्पाद विभाग खिसियानी बिल्ली की तरह दैनिक मजदूरी पर कार्यरत शराब बिक्री कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर मामले की खानापूरी कर ली। मगर, शराब के शौकीनों की जेब पर रोजाना डाका जैसे मर्ज का स्थायी निदान नहीं खोजा गया। हालांकि कार्रवाई के नाम पर इससे पहले भी चार कर्मचारी को इसी मामले में हटाया जा चुका है।

फ्रंटलाईन एनसीआर प्राइवेट लिमिटेड के इशारे पर खेल जारी

पूर्व में हटाये गये शराब बिक्री करने वाले कर्मचारी प्रेम कुमार, दिलीप सिंह, चंदन कुमार, महेश सिंह, अमित कुमार सिंह ने सोमवार को उत्पाद अधीक्षक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए कार्यालय में उपायुक्त के नाम आवेदन सौंप कर अपनी शिकायत दर्ज करायी है। कर्मियों ने बताया कि फ्रंटलाईन एनसीआर प्राईवेट लिमिटेड के सुधाकर सिंह व धर्मेंद्र कुमार ने शराब की बिक्री अंकित मूल्य से अधिक पर करने का दबाव डालता रहा है। ऐसा नहीं करने वाले कर्मचारी को हटा दिया जाता। जुलाई  मेें इस घटना का शिकार कम्पोजिट शराब दुकान कर्मचारी प्रेम कुमार हुआ है। इनलोगों ने कहा कि फं्रटलाईन ने लगातार धमकी दी है कि जो रेट बढ़ाकर शराब नहीं बेचेगा उसे हटा दिया जायेगा। जिससे अन्य कर्मचारी भी भयभीत हैं।

मूल्य से अधिक पर शराब बिक्री गैर कानूनी

उत्पाद कार्यालय ने इस संबंध में बताया कि सभी शराब दुकानों में मूल्य तालिका लगी है और बोतलों पर दाम अंकित है। इससे अधिक मूल्य लेना गैर कानूनी है। कोई भी सरकारी शराब दुकान में अधिक मूल्य लेने की शिकायत करना है तो कार्रवाई होगी। वहीं शराब की लत के शिकार शराब खरीदारी के दौरान 5 रुपया से 20 रुपया अधिक मूल्य देने पर मजबूर हैं। साथ ही अधिक मूल्य लेने का कोई पुख्ता सबूत भी नहीं रहने से ग्राहक चुप्पी साधना ही उचित समझते हैं।

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