केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा 20 को

तेदेपा की ओर से पेश अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में चर्चा के लिए स्वीकार / उस दिन सदन में न तो प्रश्नकाल होगा और न ही गैर-सरकारी कामकाज/ शुक्रवार को सुबह 11 बजे से शुरू होगी चर्चा और उसी दिन प्रस्ताव पर होगा मतदान/ मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में पहली बार आया अविश्वास प्रस्ताव

नयी दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) की ओर से पेश अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में चर्चा के लिए बुधवार को स्वीकार कर लिया गया और इस पर चर्चा तथा मतदान शुक्रवार को कराया जायेगा। उस दिन सदन में न तो प्रश्नकाल होगा और न ही गैर-सरकारी कामकाज। सुबह 11 बजे से चर्चा शुरू की जायेगी और उसी दिन प्रस्ताव पर मतदान भी कराया जायेगा। मोदी सरकार के चार साल से ज्यादा के कार्यकाल में उसके खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव आया है।

तेदेपा के श्रीनिवास का प्रस्ताव मिला सबसे पहले

मानसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के बाद जरूरी कागजात सदन पटल पर रखवाने के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन को सूचित किया कि उन्हें तेदेपा के के. श्रीनिवास, थोटा नरसिम्हन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तारिक अनवर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मोहम्मद सलीम, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल तथा रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन की ओर से अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस मिले हैं। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास का प्रस्ताव सबसे पहले मिला है इसलिए वह उन्हें प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दे रही हैं।

विभिन्न दलों के 50 से अधिक सदस्य प्रस्ताव के समर्थन में हुए खड़े

इस पर श्रीनिवास ने एक पंक्ति का अपना प्रस्ताव पढ़ा, जिसमें कहा गया, ‘यह सभा सरकार के खिलाफ अविश्वास व्यक्त करती है।’ इसके बाद अध्यक्ष ने जानना चाहा कि सदन में कितने सदस्य प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। विभिन्न दलों के 50 से अधिक सदस्यों के प्रस्ताव के समर्थन में खड़े होने पर उन्होंने कहा कि वह प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार करती हैं, लेकिन चर्चा का दिन और समय बाद में तय किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के लिए स्वीकार किये जाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है।

कांग्रेस के नेता खड़गे ने जतायी नाराजगी

सदन में कांग्रेस के नेता खड़गे ने इस पर नाराजगी जतायी कि अध्यक्ष ने उन्हें प्रस्ताव पेश करने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा विपक्षी दल होने के नाते उनकी ओर से दिये गये प्रस्ताव को पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिये थी। इस पर श्रीमती महाजन ने कहा कि श्रीनिवास ने सबसे पहले प्रस्ताव का नोटिस दिया था इसलिए नियमों के अनुरूप उन्हें प्रस्ताव पेश करने का मौका दिया गया। इसमें बड़े या छोटे दल का कोई सवाल नहीं है।

तृणमूल के सदस्यों ने चर्चा का दिन 20 जुलाई रखने का किया विरोध

भोजनावकाश के बाद श्रीमती महाजन ने सदन को सूचित किया कि प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान 20 जुलाई को कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि उस दिन सुबह न तो प्रश्नकाल होगा और न ही गैर-सरकारी कामकाज। तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने चर्चा का दिन 20 जुलाई रखने का विरोध करते हुए कहा कि अगले दिन 21 जुलाई को पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल में ‘शहीद दिवस’ मनाया जाना है, जिसके लिए सदन के सदस्यों को वहां जाना होगा। पार्टी सदस्य दिनेश त्रिवेदी ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि प्रस्ताव पर चर्चा आगामी सोमवार को करायी जाये। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव है और एक दल के 35 सांसद सदन से अनुपस्थित रहेंगे, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा। खड़गे ने भी उनकी बात का समर्थन किया, लेकिन अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने इस बारे में अपना निर्णय दे दिया है और अब इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
उल्लेखनीय है कि तेदेपा के सदस्यों की ओर से बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान कई बार अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था, जिसे अध्यक्ष ने हर बार सदन में रखने का प्रयास किया, लेकिन विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते उसे नहीं लिया जा सका था। मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही तेदेपा ने यह घोषणा कर दी थी कि वह इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव लायेगी। मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने घोषणा की थी कि 12 विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमत हुए हैं।

अविश्वास प्रस्ताव का गला घोंट देगा राजग : अनंत कुमार

सरकार ने उसके खिलाफ लाये गये विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को पूरी तरह अनुचित बताते हुए बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राजग पूरी मजबूती तथा जनादेश के साथ सरकार चला रहा है। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को पूरी तरह अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि भले ही प्रस्ताव लाना विपक्ष का हक है लेकिन यह इसका उचित समय नहीं है और विपक्ष इसके बहाने कुछ बेवजह के मुद्दे उठाना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘एकजुट राजग इस अविश्वास प्रस्ताव का गला घोंट देगा।’
अनंत ने कहा कि राजग पूरी तरह एकजुट है और सरकार को सौ फीसदी भरोसा है कि वह भारी बहुमत से जीत हासिल करेगी। उन्होंने दावा किया कि मोदी के नेतृत्व को राजग के बाहर से भी समर्थन मिलेगा। हालांकि उन्होंने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने गुरुवार और शुक्रवार दो दिन के लिए अपने सदस्यों को सदन में रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
अनंत ने कहा कि वर्ष 2014 में भारी बहुमत मिलने के बाद से राजग को विभिन्न राज्यों में हुए चुनाव में जबरदस्त जनादेश मिला है और 21 राज्यों में उसकी सरकार चल रही है। ऐसे में विपक्ष के प्रस्ताव का कोई मायने नहीं है। विपक्ष कुछ मुद्दों को लेकर देश में भ्रम फैला रहा है और वह अब इन मुद्दों को अविश्वास प्रस्ताव के बहाने संसद में उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह कोशिश नाकामयाब होगी और सरकार हर बात तथा सवाल का जवाब देने के साथ अपनी चार साल की उपलब्धियों का ब्योरा देश के सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि इस अविश्वास प्रस्ताव के दौरान इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि उसने बजट सत्र की तरह इस बार भी जानबूझकर प्रस्ताव देने में देर की और बाद में तर्क वितर्क पर उतर आयी। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने सत्र के पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इस पर शुक्रवार को चर्चा तथा मतदान होगा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आ रहा कि विपक्षी दल अब क्यों हिचकिचा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव पेश किये जाने के 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा करानी होती है।
अनंत ने दोहराया कि राजग पूरी तरह एकजुट है और मंगलवार को हुई सहयोगी दलों की बैठक में सहमति बनी थी कि विपक्ष के प्रस्ताव का जोरदार तरीके से जवाब दिया जायेगा।

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