इस्तीफे व समाधि की छौंक पर जश्न और विरोध का तड़का

देवघर के गांधी वाचनालय भवन के मलबे पर बिछी सियासी बिसात/ मामले में कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व के हस्तक्षेप नहीं करने से नाराज जिलाध्यक्ष ने भेजा इस्तीफा/ इस्तीफा नामंजूर कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कानूनी पक्षों की पड़ताल में जुटी

देवघर/ संवाददाता। टावर चौक स्थित गांधी वाचनालय भवन को जर्जर बताकर प्रशासनिक देखरेख में तोड़े जाने के बाद से देवघर की सियासत गरम है। यह भवन कांग्रेसियों के लिए विचार-विमर्श का एक ठिकाना भी था और इसे भाजपा के शासनकाल में तोड़े जाने को लेकर कांग्रेसी और भाजपाई आमने सामने हैं। भवन तोड़े जाने को ‘कांग्रेस मुक्त देवघर’ बताते हुए स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया तक दे दी। सांसद की इस प्रतिक्रिया के जवाब में कांग्रेस समर्थकों ने भवन के मलबे के पास की जगह को वहीं पर एक तख्ती गाड़ कर मोटे-मोटे हफ्रों में श्री दुबे का समाधि स्थल लिख दिया। इससे मामला और गरमा गया। अगले ही दिन भाजपाईयों ने भवन तोड़े जाने पर जश्न मनाया और मिठाईयां बांटी। जबकि गुरुवार को संताल परगना के कई दिग्गज कांग्रेसियों ने धरना देकर और काला दिवस मनाकर सरकार के खिलाफ विष वमन किया।

जिला कांग्रेस चाहती है राज्यव्यापी मुद्दा बनाये प्रदेश पार्टी नेतृत्व

बहरहाल, भवन तोड़े जाने को लेकर प्रशासन ने जहां कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है तो कांग्रेस नेता इसे भाजपा की साजिश करार दे रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस के अंदर से निकली खबर के अनुसार मामले में कांग्रेस प्रदेश कमेटी से नाराज जिलाध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दे दिया है। हालांकि प्रदेश नेतृत्व ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। जिला कांग्रेस चाहती है कि मामले में प्रदेश कमेटी हस्तक्षेप करे और इस मुद्दे को राज्यव्यापी बनाया जाये। इस बाबत जिला कांग्रेस ने प्रदेश कमेटी को अपनी इच्छा जता दी है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रदेश कमेटी फिलहाल इस मामले में कानूनी पक्षों की पड़ताल कर रही है। इधर पूरे मामले में जनता की स्थिति ऐसी हो गयी है कि वह किसका समर्थन करे, किसका नहीं- समझ नहीं पा रही। फिलहाल कांग्रेसी कह रहे हैं कि गांधी वाचनालय की ईंट को गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में भेजा जाएगा, ताकि मोदी के जादू का असर आम लोगों से कम किया जा सके।

 वर्ष 1942 में बना था गांधी वाचनालय

स्वतंत्रता सेनानी नथमल सिंहानिया ने अपने निजी खर्च पर नगरपालिका से भूमि लीज पर लेकर गांधी वाचनालय का निर्माण कराते हुए महापुरुषों की प्रतिमा को भवन की चहारदिवारी पर लगाया था। साथ ही ऊपरी तल पर थाना कांग्रेस का कार्यालय संचालित किया। वर्ष 1980 में नगर कांग्रेस ने यहीं सेना शिविर संचालित किया। गांधी वाचनालय में गांधी साहित्य का व्यापक प्रचार-प्रसार होता रहा था। लेकिन, दीमक से किताबें नष्ट होने से अध्ययन में काफी कठिनाई हो रही थी। इसी बीच भवन तोड़े जाने से गांधी साहित्य भी मलबे में दफन हो गया है।

1942 में गांधी जी पहुंचे थे इस स्थल पर

हरिजनों को मंदिर में प्रवेश कराने को लेकर विनोबाभावे के चलाये गये कार्यक्रम के दौरान जब गांधी जी टावर चौक पहुंचे तो झोपड़ीनुमा गांधी वाचनालय में गांधी जी इस स्थल पर रुके थे। जो बाद में भवन का आकार ले लिया। इसी चौक पर तीर्थ पुरोहितों ने गांधी जी की कार पर पथराव भी किया था। नथमल सिंहानिया में गांधी वाचनालय स्थल पर प्याऊ आदि का संचालन कर समाजसेवा का कार्य भी किया। बाद में उन्होंने इनगरपालिका से भूमि लीज पर लेकर गांधी वाचनालय का निर्माण कराया था।

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