दुमका के भी 8 नवजात गिरोह के हाथों बेचे दिये गये

मिशनरीज ऑफ चौरिटी में नवजातों को बेचने के मामले में नया खुलासा/निर्मल हृदय पहुंचाने में एजेंट की भूमिका निभाता था उर्सिला नर्सिंग होम/सीडब्ल्यूसी के समक्ष दो बिन ब्याही माताओं ने किया खुलासा

दुमका/निज संवाददाता। मिशनरीज ऑफ चौरिटी की ओर से पैसे लेकर नवजातों को बेचने के गैरकानूनी धंधे की शिकार दुमका की लड़कियां भी हुई हैं। दुमका की ऐसी 8 माताओं की छानबीन दुमका पुलिस कर रही है, जिसमें दो को अबतक पुलिस ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश किया है। सीडब्ल्यूसी के बंेच ऑफ मजिस्टे्रट के समक्ष दोनों लड़कियों के बयान से उजागर हुआ है कि शहर के बक्सी बांध रोड में मिशनरीज से संचालित उर्सिलियन नर्सिंग होम नामक अस्पताल बिन ब्याही मांओं को रांची के मिशनरी ऑफ चैरेटी के ‘निर्मल हृदय’ तक पहुंचाने में बतौर एजेंट काम कर रहा था।

पीड़िता की आपबीती से खुलता गया मामला

गुरुवार को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत जामा थाना क्षेत्र की पीड़िता ने बताया कि चार माह की गर्भवती होने के बाद जब उसकी मां उसे लेकर उर्सिलियन नसिंर्ग होम गयी तो वहां से उसे पहले दुमका के कुरूवा में स्थित सिस्टर्स ऑफ चैरिटी के सेंटर में भेजने के बाद रांची के निर्मल हृदय भेज दिया गया। पांच माह तक उसे वहां रखा गया और जब उसने बेटे को जन्म दिया तो उससे बच्चा ले लिया गया, उसे देखने तक नहीं दिया गया। 20 दिनों पूर्व टोंगरा थाना क्षेत्र की लड़की ने भी ऐसा ही बयान सीडब्ल्यूसी को दिया था। सीडब्लूसी ने पहला बयान टांेगरा थाना क्षेत्र की बिन ब्याही मां का बयान 20 अगस्त को दर्ज किया था। उसने बताया था कि उर्सिलियन नर्सिंग होम से उसे रांची के निर्मल हृदय पहुंचाया गया। जहां उसने बेटी जन्मा। मगर, बच्चा उसे नहीं दिया गया। दोनों ही लड़कियां आदिवासी हैं।

जन्म के बाद नहीं देखने दिया बच्चे का मुंह

सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष मनोज साह, सदस्य सुमिता सिंह, रंजन कुमार सिंहा, धर्मेंद्र प्रसाद और रमेश प्रसाद साह के समक्ष जामा थाना क्षेत्र की बिन ब्याही मां ने भी ऐसा ही बयान दिया। उसने बताया कि बेटे के जन्म के बाद बच्चे से मिलने की लाख इच्छा जाहिर की लेकिन उसे नहीं दिया गया। जामा की अविवाहित मां ने दोबरा अपने बच्चे से मिलने के लिए निर्मल हृदय पहुंची लेकिन निराश रही। अविवाहित लड़की की मां ने भी पोता से मिलने की कोशि की, लेकिन उसे भी निराशा हाथ लगी। अध्यक्ष मनोज कुमार साह ने बताया कि रांची डीसी ने दुमका डीसी को पत्र भेजकर बताया है कि मिशनरी ऑफ चैरेटी ‘निर्मल हृदय’ रांची में अविवाहित लड़कियों को माता बनने का सत्यापन करते हुए बाल कल्याण समिति से उन बच्चियों का बयान दर्ज करवा कर सूचित करने का आग्रह किया है। सीडब्ल्यूसी दुमका की बाकी 6 बिन ब्याही माताओं का भी बयान जल्द दर्ज कराया जाएगा। समिति पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने और उनके पुर्नवास की पहल भी करेगी।

वर्ष 2016 में ही विशेष शाखा ने कर दिया था आगाह

मालूम हो कि 2016 में ही विशेष शाखा ने सरकार को रिपोर्ट भेजकर कहा था कि निर्मल हृदय से बच्चों को बेचने का धंधा चल रहा है। जांच में पाया गया था कि 2016 में निर्मल हृदय में 108 गर्भवती महिलाएं थीं और संस्था ने मात्र 10 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया। शेष 98 बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। आशंका है कि इन्हें दूसरे राज्यों में बेच दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक एजेंट बिन ब्याही आदिवासी गर्भवती लड़कियों से संपर्क कर झांसे में लेते हैं। उन्हें मुफ्त में रहने, डिलिवरी का खर्च उठाने सहित अन्य सुविधाओं का प्रलोभन दिया जाता है। उनसे अंग्रेजी में लिखे कागज पर दस्तखत लिया जाता है। उसमें लिखा होता है कि जन्म के बाद बच्चे पर उनका कोई अधिकार नहीं होगा।

नाबालिग कैसे बनी मां

वर्ष 2016 में जामा की यह किशोरी दुमका मेंं रहकर 9वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। वह रसिकपुर में रहती थी। उसी समय एक लड़के के संपर्क में आई। दोनों ने शारीरिक संबंध बना लिया। किशोरी गर्भवती हो गई। किशोरी ने यह जानकारी डर से अपने परिजनों को नहीं दी। किशोरी ने घटना की जानकारी परिजनों को तब दी जब उसका गर्भ 4 माह का हो गया। परिजन किशोरी को लेकर दुमका के उर्सिला नर्सिंग होम पहुंचे जहां गर्भपात संभव नहीं होने की बात कहते हुए उसे कुरूवा मेंं संचालित मिशनरी ऑफ चैरेटी भेज दिया गया। मिशनरी ऑफ चैरेटी कुरूवा के चिकित्सक ने किशोरी और परिजनों को समस्या के समाधान के लिए मिशनरी ऑफ चैरेटी निर्मल हृदय रांची भेज दिया। निर्मल हृदय में किशोरी को और पांच माह रखा और जब उसे बेटा हुआ तो बच्चा उससे लेकर उसे खाली हाथ घर भेज दिया गया।

 

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *