फर्श पर ही दिया ‘देश के भविष्य’ को जन्म

‘अव्यवस्था की सुई और दवा’ से लाचार बनी रही प्रसूता/ सदर अस्पताल की मातृ-शिशु इकाई भवन के उद्घाटन के एक दिन बाद की घटना

गिरिडीह/ संवाददाता। सरकार के लाख दावों के बाद भी सरकारी अस्पताल ‘अव्यवस्था की सुई और दवाईयों’ के भरोसे गरीब मरीजों को छोड़ दे रहा है। सदर अस्पताल के ऐसे ही बीमार सिस्टम की शिकार शुक्रवार को एक प्रसूता हुई। उसने अस्पताल की फर्श पर ही शिशू को जन्म दे दिया। क्योंकि, अस्पताल पहुंचने के घंटों बाद उसका इलाज शुरू नहीं हो सका। जबकि उसे फौरन भर्ती करने की जरूरत थी, मगर, स्वास्थ्य विभाग उसे काहिली की घुट्टी ही पिलाता रहा। लिहाजा, प्रसव पीड़ा से बेचैन फर्श पर पड़ी महिला ने आखिरकार शिशू को जन्म दे दिया। जबकि इसी सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री रमेश चंद्रवंशी ने 24 घंटे पहले ही मातृ-शिशु इकाई भवन का उद्घाटन किया था। उन्होंने स्वास्थ्य महकमे की उपलब्धियां भी गिनायीं। पर, एक दिन बाद भी उनके दावों की पोल-पट्टी फर्श पर पड़े ‘देश के भविष्य’ यानी नवजात ने खोल कर रख दी।

जननी सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना से जननी सुरक्षा और सदर अस्पताल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक गिरिडीह की गादी श्रीरामपुर पंचायत के पंडरी गांव के रहने वाले छतरो राय की गर्भवती पत्नी जोनिया देवी को उसके परिजन प्रसव के लिए शुक्रवार सुबह सदर अस्पताल ले आये। उन्हें अस्पताल कर्मियों ने कहा कि मरीज को चैताडीह में बने नये भवन में ले जायें। जबतक परिजन कुछ समझ पाते तब तक गर्भवती महिला की हालत बिगड़ने लगी। वह दर्द से तड़पने लगी और मजबूरन अस्पताल के ओटी के सामने जमीन पर लेट गयी। लेकिन वहां उपस्थित नर्स, सहिया और अन्य लोग बस तमाशा देखते रहे। किसी ने उसे बेड या स्ट्रेचर पर नहीं लिटाया। इस बाबत सवाल पूछने पर नर्स और स्वास्थ्यकर्मी अधिकृत नहीं होने की बात कर कन्नी काट गये। उधर, सदर अस्पताल की इस अमानवीय व्यवस्था पर दूरभाष पे भी बोलने के लिए कोई जिम्मेवार राजी नहीं हुए।

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