अब तो खुदकुशी की इजाजत दे दीजिये सरकार

दुर्गापूजा के तीसरे दिन साहिबगंज के बिजली घाट पर गंगा में लेंगे जल समाधि/संग्राम के बाद अब 19 रैयतों ने भी मांगी इच्छा मृत्यु/ रैयतों ने प्रेस कांफ्रेंस कर रखी अपनी मांग और सुनाया अपना फैसला

साहिबगंज/संवाददाता। खासमहल कानून से पीड़ित साहिबगंज के संग्राम सिंह के बाद अब कुल 19 रैयत भी ुइच्छा मृत्यु की मांग के साथ सामने आ गये हैं। इन सबने सरकार ने खुदकुशी करने की इजाजत मांगी है। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर अपने उस फैसले का खुलासा भी किया है, जिसमें तय किया गया है कि वे सब दुर्गापूजा के तीसरे दिन गंगा में जल समाधि ले लेंगे। हालांकि इस फैसले पर औचपारिक मुहर बुधवार को होने वाली बैठक में लगेगी। जो हो, इन रैयतों का साफ कहना है कि जब जमीन ही नहीं रहेगी तो अनाज कहां उपजायेंगे, खायेंगे क्या। इस जमीन के अधिग्रहण की नोटिस खासमहल विभाग ने दे दी है, लेकिन मुआवजे की कोई बात नहीं की है। यदि मुआवजा भी मिल जाता तो उनका जीवन जमीन जाने के बाद चल सकता है। मगर, मुआवजा नहीं मिला तो सभी रैयतों का परिवार भूख से मर जायेगा। इससे अच्छा हो कि वे मौत को गले लगा लें।

खासमहाल उन्मूलन समिति ने की प्रेस कांफ्रेंस

रैयतों ने मंगलवार को शहर के घोड़माड़ा पुल के निकट प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अपनी मांगें रखी। खासमहाल उन्मूलन समिति के सदस्य सह समाजसेवी मुरली धर तिवारी व श्याम सुंदर पोद्दार के नेतृत्व में हुए प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित रैयतों के वंशज भोला यादव, जितेंद्र यादव, गौरव यादव, उमेश चंद्र लाल, बिनेश्वरी लाल, वीरबहादुर सिंह, संग्राम सिंह, राजेंद्र प्रसाद, उदय कुमार साह, विजय साह, पवन कुमार साह, लाल बाबू मोदी, विनोद मंडल, रामभवन यादव, भिखारी यादव, लालमोहन तिवारी व अन्य ने बताया कि सरकार उनकी जमीन को अगर खासमहाल का नाम देकर अधिग्रहण करेगी तो सभी भुखमरी के कगार पर आ जायेंगे। सरकार सभी रैयतों के वंशजों को जमीन के बदले मुआवजा दे नहीं तो सभी को सपरिवार इच्छा मृत्यु की इजाज़त दे।

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