अमृतसर रेल हादसा ‘जिहादी षड्यंत्र’ ‘आरक्षण’ और ‘मेरिटधारी ब्राह्मण’ की देन है!

अमृतसर ट्रेन हादसे की जवाबदेही तय किए जाने की बहस के बीच इस घटना पर सोशल मीडिया का निठल्ला चिंतन देखने लायक़ है

अमृतसर ट्रेन हादसा किसकी लापरवाही की वजह से हुआ, इस सवाल को लेकर चल रही बहस तीन पक्षों के इर्द-गिर्द घूम रही है. मीडिया और सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि इस हादसे के लिए रेलवे ज़िम्मेदार है. कइयों के मुताबिक़ दशहरा कार्यक्रम के आयोजक सौरभ मदान इस हादसे के ज़िम्मेदार हैं. वहीं, यह कहने वालों की भी कमी नहीं है कि हादसे में मारे गए और घायल हुए लोग ख़ुद इसके लिए ज़िम्मेदार हैं. उधर, इन तीनों पक्षों में से एक भी ख़ुद की ग़लती मानने को तैयार नहीं. सभी अपने-अपने तर्कों से दूसरे पक्ष को दोषी ठहरा रहे हैं.

बहरहाल, इस बहस के बीच सोशल मीडिया का ‘निठल्ला चिंतन’ भी देखने लायक़ है. हादसे के लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस सवाल का जवाब सोशल मीडिया के निठल्ले चिंतकों ने अपने-अपने लॉजिक से दे दिया है. नीचे कुछ मिसालें देखें.

‘अजय सिंह राजपूत – गिरासे’ नाम के एक फ़ेसबुक पेज से कहा गया है कि अमृतसर ट्रेन हादसा दरअसल एक ‘जिहादी षड्यंत्र’ था जिसे ‘इम्तियाज़ अली’ नाम के ट्रेन ड्राइवर ने अंजाम दिया. इस दावे को सही साबित करने के लिए हादसे की तुलना यूरोप में हुई कुछ हालिया घटनाओं से की गई है जिनमें वाहनों के ज़रिए बड़ी संख्या में लोगों को मारने की कोशिशें की गई थीं. इसके साथ ही हादसे की न्यायिक जांच की भी मांग की गई है. इसी तरह की कई और पोस्ट भी सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही हैं. ज़ाहिर है कि इनका मक़सद अमृतसर हादसे को सांप्रदायिक रंग देना है.

अमृतसर ट्रेन हादसे को मुसलमानों से जोड़ रहे सोशल मीडिया पोस्टों में से एक का स्क्रीनशॉटअमृतसर ट्रेन हादसे को मुसलमानों से जोड़ रहे सोशल मीडिया पोस्टों में से एक का स्क्रीनशॉट

एक और निठल्ले चिंतन के मुताबिक़ जिस ट्रेन ने 60 से ज़्यादा लोगों की जान ली उसका चालक ‘मेरिटधारी ब्राह्मण’ था जिसका नाम ‘मनोज मिश्रा’ है. इस निठल्ले चिंतन के ज़रिए आरक्षण विरोधियों पर तंज़ कसा गया है. कहा गया है कि अगर ट्रेन का चालक कोई दलित होता तो ख़ुद को ज़्यादा योग्य कहने वाले सवर्ण समाज के लोग अब तक आरक्षण के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ चुके होते. इसमें यह भी कह दिया गया है कि चूंकि ड्राइवर ब्राह्मण है इसलिए उसे कोई सज़ा नहीं दी जाएगी. साथ ही चालक पर ‘अंधभक्ति’ का भी आरोप लगाया गया है. यह शब्द आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थकों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

फ़ेसबुक पर वायरल कई भ्रामक पोस्टों में से एक (स्क्रीनशॉट)फ़ेसबुक पर वायरल कई भ्रामक पोस्टों में से एक (स्क्रीनशॉट)

वहीं, तीसरे दावे में चालक के आत्महत्या करने की बात कही गई है. ट्विटर-फ़ेसबुक पर एक तस्वीर वायरल है जिसमें एक व्यक्ति का शव फंदे से लटका देखा जा सकता है. कहा जा रहा है कि यह शव उसी ट्रेन चालक का है जो अमृतसर हादसे के समय ट्रेन चला रहा था. यहां मीडिया पर भी दोष मढ़ा गया है. कहा जा रहा है कि उसने ट्रेन ड्राइवर के चरित्र को लेकर ऐसे हमले किए कि तंग आकर उसे आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ा.

ड्राइवर अरविंद कुमार की आत्महत्या की झूठी जानकारी देता एक ट्वीटड्राइवर अरविंद कुमार की आत्महत्या की झूठी जानकारी देता एक ट्वीट

अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर तेज़ी से वायरल हो रहे ऐसे तमाम निठल्ले चिंतनों का सच्चाई से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. इन्हें लोगों का ध्यान असल मुद्दे से हटाने और उन्हें ग़ैर-ज़रूरी मुद्दों की तरफ़ आकर्षित करने के लिए गढ़ा गया है. सच यह है कि अमृतसर ट्रेन हादसा कोई जिहादी षड्यंत्र नहीं है और न ही ट्रेन का ड्राइवर कोई मुसलमान है. वह हिंदू है. यहां हमें तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए ‘हिंदू’ शब्द का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. और हां, यह जरूर है कि सरकार और रेलवे ने ड्राइवर के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कार्रवाई से इनकार कर दिया है. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा साफ़ कर चुके हैं कि इस हादसे को लेकर ड्राइवर के ख़िलाफ़ विभाग की तरफ से कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि उनके मुताबिक़ इस दुखद दुर्घटना में ड्राइवर और विभाग की तरफ़ से नियमों की कोई अनेदखी नहीं की गई.

वैसे अरविंद कुमार को ‘मनोज मिश्रा’ बताने वाला निठल्ला चिंतन आरक्षण व्यवस्था के ग़ैर-ज़रूरी विरोध का भी नतीजा है. सवर्ण समाज का बड़ा तबक़ा आरक्षण का विरोध करने के चक्कर में उसे किसी भी अप्रिय घटना के लिए ज़िम्मेदार बताने लगता है और दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज के लोगों को अयोग्य घोषित कर देता है. अमृतसर हादसे में भी यह देखा जा सकता है. ऊपर हमने आपको बताया है कि कैसे हादसे के लिए ज़िम्मेदार ठहराए जा रहे ड्राइवर को ‘मेरिटधारी ब्राह्मण’ बताया जा रहा है. अब नीचे आरक्षण विरोधियों के पोस्ट देखिए जिनमें इस घटना को आरक्षण की देन बताया गया है. हालांकि किसी को नहीं पता कि अरविंद की जाति क्या है, लेकिन आरक्षण समर्थक और विरोधी एक-दूसरे के ख़िलाफ़ जमकर ‘निठल्ला चिंतन’ कर रहे हैं.

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