भाजपा में जाना तय कर चुके थे नीतीश, मगर…

अपनी आत्मकथा ‘लाइफ अमंग स्कॉरपिअन्स’ में जया जेटली ने किया खुलासा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निजी हितों को सबसे ऊपर रखते हैं। उन्होंने एक समय भाजपा में जाना लगभग तय कर लिया था। लेकिन, बाद में उन्हें अलग रास्ता दिख गया। यह बात अपनी आत्मकथात्मक किताब ’लाइफ अमंग स्कॉरपिअन्स‘ में जया जेटली ने कही है। एक समय देश की प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहीं जया जेटली ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। जबकि लालू प्रसाद याद, शरद यादव और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं पर निशाना साधा है।

अपनी किताब में जया जेटली ने लिखा है कि जॉर्ज साहब की अपील के बावजूद नीतीश कुमार ने मुझे नहीं, बल्कि बिजनेसमैन महेंद्र प्रसाद को राज्यसभा भेजा था। क्योंकि नीतीश के लिए निजी हित प्राथमिकताओं में होते हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से परेशान नीतीश कुमार एक समय भाजपा में शामिल होना चाहते थे। तब दोनों जनता दल में थे। अगर समता पार्टी का गठन नहीं हुआ होता तो शायद नीतीश कुमार भाजपा में शामिल हो जाते।

जया जेटली ने लिखा है कि सहयोगियों की अनदेखी और अहंकार के कारण वाजपेयी सरकार 2004 में दोबारा सत्ता में नहीं लौट पायी। जेटली ने नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। किताब में लिखा है कि नरेंद्र मोदी बहुमत के बावजूद सहयोगियों को साथ लेकर चलते हैं। मोदी विरोधियों से भी मिलते और बात करते हैं। गुजरात में नरेंद्र मोदी ने बदलाव लाया है। लेकिन, देश में अच्छे काम और बदलाव को कुछ लोग आसानी से मान नहीं पाते हैं।

अपनी आत्मकथा में जया जेटली ने लंबे राजनीतिक जीवन के अनुभवों के साथ नेताओं की सोच को भी बताया है। उन्होंने लिखा है कि लालू और शरद यादव केवल यादव भाषणों में ही समाजवादी हैं। मधु लिमये, जेपी और राममनोहर लोहिया की जुबान और उनका आचरण एक था। शरद यादव ने कहा था कि मैं यादव हूं। लालू और मुलायम ने परिवारवाद को जितना बढ़ाया, लोहिया और मधु लिमये होते तो एक मिनट भी बर्दाश्त नहीं करते।

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