27 साल बाद लालू फिर से भूरे बाल के खिलाफ!

बिहार तटबंध घोटाले पर कहा, भूरे बाल वाले चूहे खा गये तटबंध

पटना। सवर्णों के लिए भूरे बाल कहकर लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 1990 में पिछड़ी और दलित जातियों को अपनी सियासत के लिए साधा था। अब लालू ने पुत्र के नाम की घोषणा अपनी पार्टी राजद की ओर से बिहार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में करने के बाद ‘भूरे बाल’ शब्द को फिर से उछाला है। नीतीश शासन में घोटालों पर तंज कसने के लिए लालू ने भूरे बाल का इस्तेमाल किया है। राजद सुप्रीमो ने बिहार में हुए तटबंध घोटाले पर नीतीश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बिहार के भूरे बाल वाले चूहे तटबंधों को खा रहे हैं।

लालू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में घोटालों की सेल लगी है। यहां एक घोटाले पर तीन घोटाला फ्री है। बिहार सरकार में एक मंत्री पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के भूरे बाल वाले चूहे तटबंध को खा रहे हैं। दूसरी तरफ लालू यादव के इस बयान पर जदयू प्रवक्ता ने कहा कि लालू यादव जातीय उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। लालू ने ये साबित कर दिया कि उनका राजनीतिक स्तर इतना गिर चुका है।

मालूम हो कि तटबंध घोटाले का आरोप लगने के बाद सरकार ने कहा था कि चूहों के कुतरने से तटबंध कमजोर हुआ था। इसी के बाद लालू ने भूरे बालों वाले चूहे जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे पहले वर्ष 1990 में लालू ने भूरा बाल पर एक बड़ा बयान दिया था, जिसने बिहार की राजनीति में हलचल मचायी थी। देश में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद बिहार में इसका विरोध हो रहा था और लालू ने ‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा दिया था। भूरा बाल भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ जैसी जाति का प्रतिकात्मक शब्द था।

 

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