गुजरात में मुस्लिमों की हमदर्द नहीं दिखना चाहती कांग्रेस

सामाजिक ध्रुवीकरण में जुटी कांग्रेस चुनाव में कई समुदायों को साध रही

गुजरात चुनाव में हिन्दू वोटों को गोलबंद करने के पुराने फार्मूले पर भाजपा अब भी खड़ी है। मगर, कांग्रेस इस बार कई समुदायों को साध रही है। कांग्रेस की कोशिश ध्रुवीकरण की है, ताकि भाजपा से नाराज पटेल समुदाय के अलावा दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय उसके साथ आ सकें। लेकिन, कांग्रेस गुजरात में इस बार के चुनाव में मुस्लिमों की हमदर्द बनती नहीं दिख रही है। ऐसे में इस बार के चुनाव में सांप्रदायिकता कोई फैक्टर नहीं दिख रही।

कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं का दावा है कि पार्टी का परंपरागत वोट बैंक अपनी जगह पर स्थिर है। सो, कांग्रेस चुनावी रणनीति के तहत कहीं भी मुस्लिमों का जिक्र करने से बच रही है, ताकि इसका चुनावी लाभ भाजपा को नहीं मिल सके। मुस्लिमों की बात आते ही हिन्दू मतदाताओं का ध्रुवीकरण भाजपा कर सकती है। पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं, जबकि ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवानी पहले ही कांग्रेस के साथ हैं। इसी तरह आदिवासी नेता छोटू वासावा संग कांग्रेस सीटों का बंटवारा कर चुकी है।

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में भी इन समुदायों को लुभाने के लिए कई घोषणाएं भी की हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप से बचने के लिए कांग्रेस ने मुसलमानों के वास्ते किसी तरह की घोषणा नहीं की है। 22 सालों के बाद गुजरात की सत्ता में लौटने की जद्दोजहद में जुटी कांग्रेस नहीं चाहती है कि मुस्लिमों के नाम पर हिन्दू वोटर्स पार्टी से भड़कें। इसलिए कांग्रेस के थिंकटैंक एक बड़ी रणनीति के तहत पार्टी के मुस्लिम नेताओं को यह समझाने में कामयाब रहे कि मुस्लिम समुदाय के प्रति पार्टी का नजरिया पहले की तरह ही बना रहेगा।

माना जा रहा है कि अपनी इन्हीं रणनीतियों के तहत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पिछले दो महीनों से गुजरात आने पर किसी न किसी मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते नजर आते रहे हैं। मगर, किसी खास मुस्लिम बहुल इलाके में उन्हें चुनाव प्रचार करते हुए नहीं देखा गया। जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय रुपाणी ने अहमदाबाद के मुस्लिम बहुल इलाके जमालपुर-खादिया में भी रोड शो किया। भाजपा मुस्लिम मोर्चा के नेता सूरत में भी मुस्लिम वोटरों को लुभाते नजर आये। हालांकि भाजपा ने किसी भी मुस्लिम चेहरे को चुनावी मैदान में नहीं उतारा है। इसके अलट कांग्रेस ने छह मुस्लिमों को उम्मीदवार बनाया है।

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