झारखंड के गांवों में कुछ ऐसे आयेगा ग्राम स्वशासन

ग्राम सभा सदस्यों से घर-घर जाकर पंजी में हस्ताक्षर लेना गलत परंपरा की है शुरूआत

राजेश पाठक

ग्राम स्वशासन झारखंड की जरूरत है और राज्य का एक पुराना सपना भी। राज्य गठन के 17 साल बीतने और वर्ष 2010 से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो जाने के बाद भी ग्राम सभा के सशक्तिकरण का कार्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। शोध व अध्ययन बताते हैं कि आम तौर पर ग्राम सभाओं में गणपूर्ति (ग्राम सभा के कुल सदस्यों का 1/10 भाग जिसमें 33 फीसदी महिला सदस्य का होना जरुरी) नहीं हो पाती है। ग्राम सभा में भागीदारी के प्रमाण स्वरुप घर-घर जा कर ग्राम सभा सदस्यों से ग्राम सभा पंजी में हस्ताक्षर लिए जाने की परंपरा विकसित हो रही है। यह परंपरा पंचायती राज व्यवस्था के सारतत्व पर नकारात्मक डाल रही है।

सर्वविदित है कि ग्राम सभा में ही विकास की संपूर्ण योजनायें परिकल्पित और रेखांकित होती हैं। साथ ही पारित प्रस्तावों के आधार पर कार्यरूप में आती हैं। सो, ग्राम सभा में ग्राम सभा सदस्यों की समुचित भागीदारी व उसकी कार्यवाही में पूर्ण पारदर्शिता का होना जरूरी है और ऐसा सुनिश्चित करके हम ग्राम सभा को सशक्त व पंचायती राज व्यवस्था के मूल तत्व को अक्षुण्ण रख सकते हैं। इस मामले में कुछ सुझावों पर अमल करते हुए ग्राम सभा सशक्त बनायी जा सकती है।

सबसे पहले ग्राम सभा आयोजन की तिथि, समय व स्थान की सूचना देने से संबंधित तंत्र को मजबूत करना होगा। सूचना देने के लिए उपयोग में लायी जाने वाली सामग्रियों मसलन ध्वनि विस्तारक यंत्र, ढोल, हैंडबिल, पोस्टर आदि का प्रयोग समुचित तरीके से किया जाना जरूरी है। इतना ही नहीं आज अधिकांश ग्राम पंचायतें इंटरनेट सेवा से जुड़ी हैं। लिहाजा, ग्राम सेवा के प्रचार प्रसार के लिए सोशल साइट्स का उपयोग भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत का फेसबुक पर अपना एक पेज होना जरुरी है, जिससे ग्राम पंचायत के बहुसंख्यक लोग उससे जुड़ कर पंचायतों की क्रियाविधि से खुद को संगत रख सकेंगे।

ग्राम सभा की सूचना देते समय ग्राम सभा में चर्चा किये जाने वाले मुख्य एजेंडों को प्रचारित किया जाना चाहिए। ऐसा किये जाने से विषयों से संबंधित हितग्राही व्यक्ति अपने अन्य कार्यों के ऊपर ग्राम सभा में भाग लेने के कार्य को प्राथमिकता दे सकेंगे। इससे ग्राम सभा में सदस्यों की भागीदारी बढ़ेगी। ग्राम सभा स्थल भी ग्राम सभा के सदस्यों की भागीदारी को प्रभावित करता है। सो, सभा स्थल के चयन में पूर्ण सतर्कता व गंभीरता बरतनी चाहिए। सभा स्थल का सुरक्षित होना और सदस्यों के उपयोग के लिए पेयजल के साथ महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालयों से युक्त भवन भी श्रेयस्कर माना जाता है।

ग्राम सभा की बैठक शुरू करने से ठीक पहले, यदि उस ग्राम में पिछली बैठक और वर्तमान बैठक के अंतराल में कोई असह्य दुर्घटना घटी हो तो उस संदर्भ में उस घटना के प्रति शोक संवेदना व्यक्त किया जाना व्यावहारिक प्रतीत होता है। ऐसा करने से लोगों का आपस में संवेदनात्मक जुड़ाव के साथ सरकारी तंत्र के संवेदनशील व मित्रवत होने का जीवंत साक्ष्य मिल सकेगा और वे ग्राम सभा में अपनी-अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने में ज्यादा सहज महसूस कर सकेंगे। प्रत्येक ग्राम सभा की शुरुआत एक प्रेरक गीत से की जानी चाहिए। जिसमें सामुदायिक गीत की प्रधानता के साथ अभिवंचित परिवारों के लाभ के प्रति जन सामान्य का सहयोगी रवैया प्रतिध्वनित हो।

ग्राम सभा में प्रस्तावों पर चर्चा के बाद लिए गए विधिसम्मत निर्णय का दस्तावेजीकरण ग्राम सभा के दौरान ही होना चाहिए। औपचारिक दस्तावेजीकरण का कार्य ग्राम सभा स्थल से हटकर या अन्य दिनों में नहीं किया जाना चाहिए। ग्राम सभा के प्रति लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए यह एक आवश्यक तत्व है। ग्राम सभा के सशक्तिकरण के लिए सुझाये गये उपर्युक्त उपायों को व्यवहार में लाकर हम ग्राम सभा को वास्तविक स्वरुप प्रदान करने में सफल हो सकेंगे। साथ ही ग्राम सभा को एक नया कलेवर दिया जा सकेगा जो किसी न किसी रूप में आम जनों की उत्तरोत्तर सहभागिता के मार्ग को प्रशस्त करता दिखाई देगा।

लेखक सांख्यिकी पर्यवेक्षक हैं। संपर्क- 9113150917

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