काफी कुछ देखा-झेला, अब देंगे कांग्रेस को नेतृत्व

मां सोनिया संग सात सालों तक सियासत से दूरी के बाद राहुल लौटे तो मजाक भी बने और आलोचनाएं भी झेली

आखिरकार कांग्रेसियों के युवराज राहुल बाबा की ताजपोशी के लिए औपचारिक यात्रा सोमवार को पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उनके नामांकन भरने से शुरू हो गयी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनके प्रस्तावक बने। मौके पर दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद थे। माना जा रहा है कि 11 दिसंबर को ही राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष घोषित कर दिये जाएंगे।

इससे पहले राहुल गांधी को काग्रेस में समय-समय पर अलग-अलग जिम्मेवारी सौंपी गयी। इस दौरान वे मजाक भी बने और उन्होंने आलोचनाएं भी झेली। आलोचक राहुल गांधी को एक अनिच्छुक राजनेता कहते रहे। लेकिन, कांग्रेस में उन्हें लगातार आगे बढ़ाया गया है। वर्ष 2007 में उन्हें पार्टी महासचिव के तौर पर अहम जिम्मेदारी सौंपी गयी। वर्ष 2009 के आम चुनावों में 262 सीटों के साथ कांग्रेस ने अपना आधार और मजबूत किया, पर उसका श्रेय राहुल को नहीं दिया गया। जबकि वर्ष 2013 में राहुल गांधी को पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया। 2014 के चुनाव में उन्होंने पार्टी का नेतृत्व किया, लेकिन कांग्रेस को लोकसभा में सिर्फ 44 सीटें ही मिल पायीं। कई अहम राज्यों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा। लिहाजा, राहुल अकसर आलोचकों के निशाने पर रहे।

हालांकि देखें तो उनकी दादी इंदिरा गांधी ने भी आलोचनाएं झेली थीं। आलोचक उन्हें गूंगी गुड़िया कहते थे। मगर, इंदिरा ने खुद को साबित किया। बाद इंदिरा आयरन लेडी कही गयीं। वे लंबे समय तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। लेकिन, वर्ष 1984 में उनके अंग रक्षकों ने ही उनकी हत्या कर दी। बाद में कांग्रेस और प्रधानमंत्री के तौर पर देश की जिम्मेदारी राहुल के पिता राजीव गांधी के कंधों पर आयी थी। मगर, वर्ष 1991 में एक चुनावी सभा के दौरान अपने पिता राजीव गांधी की हत्या राहुल गांधी और उनके परिवार के लिए बहुुत बड़ा धक्का था। राजीव गांधी तमिलनाडु की एक सभा के दौरान श्रीलंकाई तमिल चरमपंथियों के आत्मघाती बम धमाके में मारे गये थे।

सात साल के भीतर परिवार में दो हत्याओं ने राहुल और उनकी मां सोनिया गांधी पर बुरा असर डाला। ऐसे में सोनिया गांधी और उनके दोनों बच्चों ने सियासत और कांग्रेस से दूरी बना ली। वर्ष 1992 के आम चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही। मगर, पार्टी का आधार खिसकता गया। सो, पार्टी में नई जान फूंकने के लिए सोनिया गांधी ने वर्ष 1998 में राजनीति में आने का फैसला किया। 13वीं लोकसभा में वह विपक्ष की नेता बनीं। जबकि राहुल गांधी वर्ष 2004 में अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीते। राहुल का जन्म 19 जून 1970 को भारत के सबसे अहम राजनीतिक घराने में हुआ था। उनके पिता, दादी और परनाना देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

बहरहाल, अब राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी का स्थान लेंगे जो 17 साल से पार्टी की अध्यक्ष हैं। लेकिन, आलोचक कहते हैं कि इतने सालों से राजनीति में रहने के बाजवूद अभी तक राहुल गांधी शायद जनता की नब्ज नहीं पकड़ पाये हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर अक्सर मजाक और तंज कसा जाता रहा है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के भीतर इन आलोचनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया और राहुल गांधी को लगातार पार्टी का नेतृत्व सौंपने की तैयारियां जारी रहीं। अब वह घड़ी आ गयी जब राहुल गांधी पार्टी के प्रमुख बनने वाले हैं। हालांकि एक तबका ऐसा भी है जो उनकी बहन प्रियंका को पार्टी में लाने की वकालत करता रहा है।

 

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