अकाउंटेंट चंदन ने ग्राहकों के दो करोड़ रुपये गटके

ग्राहकों के खाते से एसबीआइ का लेखापाल निकाल रहा था रुपये/शिकायत के बाद बैंक प्रबंधन ने की आरोपों की जांच/जांच से खुलासा, एक-एक कर ग्राहकों के खाते से निकाल रहा था रुपये

साहिबगंज/ निज संवाददाता। बैंक में आपके रुपये जमा हैं तो समय-समय पर चेक करते रहें, शायद अब वहां भी रुपये सुरक्षित नहीं हैं। साहिबगंज के भारतीय स्टेट बैंक की पीबीबी शाखा के लेखापाल ने आस्तीन का सांप बन कर कई ग्राहकों के खाते से अवैध निकासी कर ली है। उसने करीब दो करोड़ रुपये ग्राहकों के विभिन्न खातों से निकाल लिया है। मामला पता तब चला जब एक ग्राहक ने फोन कर शाखा प्रबंधक सत्यजीत चक्रवर्ती को जानकारी दी कि उनके खाते में बैलेंस जीरो हो गया है। जबकि उन्होंने अपने खाते में काफी रुपये रखे हैं। ग्राहक की इस शिकायत पर प्रबंधक ने मामले की जांच की तो वे अचंभित रह गये। बैंक का ही एक लेखापाल चंदन कुमार सिर्फ उसी ग्राहक का नहीं कई ग्राहकों के खाते से रुपये ट्रिकी तरीके से निकासी कर चुका है। अब जांच के बाद प्रबंधक के पैरों तले जमीन खिसक गयी। 29 दिसंबर को जांच के बाद मामले का खुलासा हुआ और प्रबंधक ने 30 दिसंबर को थाने में आवेदन देकर इसकी शिकायत की। अब पुलिस ने इस मामले को लेकर जांच शुरू कर दी है।

लंबे समय से फर्जीवाड़े की पैक्टिस में था चंदन

ग्राहकों के खाते से रुपये की चोरी का खेल लेखापाल चंदन लंबे समय से कर रहा था। सूत्रों की मानें तो नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत एसबी राय रोड स्थित होटल कलिंगा के निचले तल्ले पर मौजूद भारतीय स्टेट बैंक की पीबीबी शाखा में उक्त हेराफेरी का खेल बहुत दिनों से चल रहा था। लेकिन इसका भंडाफोड़ बाद में हुआ।

प्रबंधक को शक हुआ चंदन पर

ग्राहक की शिकायत के बाद बैंक के प्रबंधक सत्यजीत चक्रवर्ती को लेखापाल चंदन पर शक हुआ। उन्होंने जांच का तीर सीधे तौर पर चंदन पर चलाया। हकीकत जांच में बाहर आ गयी। प्रबंधक का संदेह सच साबित हुआ।

शेयर बाजार में चंदन ने लगाये रुपये

जांच के बाद जब मामले से पर्दा उठा तो लेखापाल चंदन कुमार ने स्वीकारा कि उसने ग्राहकों के दो करोड़ रुपये निकाल लिये हैं। उन सभी दो करोड़ रुपये को उसने शेयर बाजार में लगा दिया है।

क्या कहा बैंक प्रबंधक ने

बैक प्रबंधक सत्यजीत चक्रवर्ती ने कहा कि लेखापाल चंदन कुमार ग्राहकों की राशि का क्रमवार आहरण कर रहा था। जांच के बाद उनसे पूछताछ में पता चला कि हेराफेरी पहले से की जा रही थी। इसके बाद 30 दिसंबर को लेखापाल ने स्वीकारोक्ति पत्र में आत्महत्या की आशंका व्यक्त की। मामले के उजागर होने के बाद बैंक प्रबंधन ने लेखापाल के बैंक खाते पर रोक लगा दी है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

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