इस्लामिक स्टेट की हिट लिस्ट में योगी आदित्यनाथ

एक दशक पहले आजमगढ़ में योगी पर हो चुका है जानलेवा आतंकी हमला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन भारतीय नेताओं में शामिल हैं, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की हिट लिस्ट में हैं। खुफिया की एक ताजा रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। दूसरी ओर आतंकी मौलाना मसूद अजहर का संगठन जैश-ए-मोहम्मद भारत के कुछ टॉप नेताओं, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाना चाहता है। भारतीय खुफिया को मिली जानकारी के अनुसार इस मिशन को अंजाम देने के लिए आतंकियों के एक विशेष दस्ते का गठन किया गया है। जानकारी के मुताबिक आतंकियों की इस हिट लिस्ट में उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम सबसे ऊपर है।

इस मामले में पिछले हफ्ते खुफिया एजेंसी ने उन सभी नेताओं के साथ इस जानकारी को साझा किया है, जिनके आतंकी संगठन के निशाने पर आने की जानकारी सामने आयी है। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने इस काम के लिए हाथ मिलाया है। हालांकि, हिट लिस्ट में शामिल योगी पर बात करें तो एक दशक पहले आजमगढ़ के कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला किया था। 7 सितंबर 2008 को योगी के काफिले पर हमला हुआ था। टाइम्स ग्रुप बुक्स की प्रकाशित योगी आदित्यनाथः अ सैफ्रन सोशलिस्ट नाम की एक किताब में इस हमले का जिक्र है।

किताब के मुताबिक योगी आजमगढ़ में विरोधी पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक आतंक विरोधी रैली को संबोधित करने जा रहे थे। 7 सितंबर 2008 की सुबह गोरखनाथ मंदिर से 40 वाहनों का काफिला निकला। यह काफिला अहमदाबाद ब्लास्ट में कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार अबु बशीर के घर की ओर रूख कर रहा था। इस बीच आजमगढ़ में कुछ अनहोनी की आशंका के चलते योगी की टीम ने तैयारियां की थीं। काफिले में योगी की लाल रंग की एसयूवी सातवें नंबर पर थी। दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर जब काफिला टकिया (आजमगढ़ से थोड़ा पहले) से गुजर रहा था तो एक पत्थर काफिले की सातवीं गाड़ी पर आकर लगी। फिर चारों तरफ से पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। बाद में पेट्रोल बम से एक सिंक्रनाइज हमला हुआ।

इससे योगी के समर्थक तितर-बितर हो गए। काफिला तीन हिस्सों में बंट गया। 6 वाहन आगे चले गये और बाकी पीछे रह गए। किताब के मुताबिक जो बीच में थे वे हमले की चपेट में आये। हमलावरों ने वाहनों को घेरकर हमला कर दिया। लेकिन उनका निशाना योगी आदित्यनाथ थे, जिन्हें वह अब तक ढूंढ नहीं पाये थे। योगी के न मिलने पर वह और उग्र हो गये। हमले की सूचना मिलते ही पुलिस स्टेशनों से टीमें भेजी गईं थी। इस बीच आसपास के विक्रेता मदद के लिए दौड़े और गाड़ियों के आसपास सुरक्षा घेरा बना लिया। सिटी सर्किल ऑफिसर शैलेंद्र श्रीवास्तव ने जवाबी कार्रवाई का आदेश दिया। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी।

घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया मगर योगी का अब तक कोई अता-पता नहीं था। जबकि योगी तो पहले ही बहुत आगे निकल चुके थे और बाकी गाड़ियों के आने का इंतजार कर रहे थे। दरअसल, हमले के पहले ही योगी को काफिले की पहली गाड़ी में शिफ्ट कर दिया गया था। यह सब पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में हुआ, जहां काफिला कुछ देर के लिए रुका था। अंतिम समय में किये गये इस बदलाव की जानकारी हमलावरों को नहीं मिल पायी थी।

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