एसपी की हत्या व 50 वारदातों में शामिल नक्सली ढेर

ताला दा के साथ माओवादी लड़ाका नंदलाल मांझी भी मुठभेड़ में मारा गया

झारखंड में वर्ष 2014 में प्रवीर दा उर्फ प्रवील दा उर्फ हिरेंद्र मुर्मू की गिरफ्तारी के बाद इस इलाके में संगठन का बागडोर संभाल रहे नंदलाल मांझी उर्फ विजय दा उर्फ हितेश उर्फ पवित्र दा के संग 32 वर्षीय सहदेव राय उर्फ ताला दा उर्फ रितेश रविवार को शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित छातूपाड़ा में नक्सली-पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। रविवार के अहले सुबह एलआरपी पर निकली एसएसबी और पुलिस की टीम से छातुपाड़ा में हुई मुठभेड़ में ताला दा के अलावा एक नक्सली को गोली लगी है। ताला दा की मौत पुलिस के लिए बड़ी सफलता है।

ताला दा की संलिप्ता एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड समेत संताल परगना के विभिन्न जिलों में हुए तकरीबन चार दर्जन से अधिक छोटे-बड़े मामलों में है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पलासी में एंबुस लगाकर पांच पुलिस कर्मी समेत आठ लोगों की हत्या में भी ताला ने अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 2013 में 27 जुलाई को काठीकुंड थाना क्षेत्र के गंदर्प गांव में एक संवेदी कंपनी के पांच वाहनों को आग के हवाले कर ताला दा के दस्ते ने अपनी उपस्थिति का एहसास कराया था। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को बाधित करने लिए नक्सलियों के गोपीकांदर, रामगढ़ एवं काठीकुंड में संवेदी कंपनियों से लेवी वसूलने का मामला शामिल है। ताला दस्ते के नाम अब तक की सबसे बड़ी नक्सली वारदातों में 2014 के लोकसभा चुनाव के तीसरे व अंतिम चरण में आठ की हत्या करने का मामला दर्ज है।

इस घटना में दुमका के शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पलासी-सरसाजोल के बीच उग्रवादी पोलिंग पार्टी पर हमला कर पांच पुलिस कर्मी व तीन मतदान कर्मियों को लैंड माइंस ब्लास्ट के जरिए मौत की नींद सुला कर अपने नापाक इरादे में सफल हुए थे। उग्रवादी इस घटना को अंजाम देने के बाद पुलिस के हथियार भी लूट ले गए थे। इससे पूर्व दो जुलाई 2013 में काठीकुंड थाना के आमतल्ला में एंबुस कर नक्सलियों ने दिनदहाड़े पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार समेत चार जवानों को शहीद कर हथियार लूटते हुए ठाठ से जंगलों में बनी अपनी सुरक्षित मांद में चले गए थे। तब दो जुलाई की घटना इस इलाके की सबसे बड़ी उग्रवादी घटना थी। अमरजीत बलिहार की हत्या में भी प्रवील दस्ते की संलिप्तता थी और इसमें ताला दा ने लीड भूमिका निभाई थी। इससे पूर्व काठीकुंड और शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र में हुए पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में भी इस दस्ता की संलिप्तता सामने आई थी। शिकारीपाड़ा के मुठभेड़ में वहां के तत्कालीन थानेदार शमशाद अंसारी और काठीकुंड के तालपहाड़ी मुठभेड़ में सतानंद शहीद हुए थे।

ताला दा संताल परगना में तकरीबन 50 से अधिक वारदातों में शामिल था। अभी पुलिस का सर्च अभियान जारी है। पुलिस ने मौके से हथियार व पिठ्ठू जब्त किए हैं, जिसका हिसाब-किताब भी किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि मुठभेड़ के दौरान करीब 20 नक्सली शामिल थे, जिसमें कई को गोली लगने की संभावना है। मुठभेड़ के दौरान तकरीबन 500 राउंड फायरिंग हुई है।
वाईएस रमेश, एसपी दुमका।

एसपी का असली कातिल कौन

एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या मामले में फांसी की सजा पाये प्रवीर दा उर्फ ताला दा और मुठभेड़ में ढेर ताला दा में कौन है असली, पर उठा सवाल। पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या ताला दा ने की थी। लेकिन नक्सली संगठन में दो ताला दा हैं। ऐसे में एक ताला दा यानी प्रवीर दा एसपी की हत्या का दोषी करार दिया जा चुका है। उसे फांसी की सजा मिली है। जबकि दूसरा ताला या यानी सहदेव राय रविवार को मुठभेड़ में मारा गया है। ऐसे में असली ताला दा के सवाल पर फिर से तरह-तरह की चर्चा है।

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