ऐसे होते हैं पैराडाइज पेपर के टैक्स हेवन देश

टैक्स हेवन देशों में न के बराबर यानी शून्य हैं टैक्स दरें

पनामा या पैराडाइज के लीक हुए पेपर में खुलासा हुआ कि टैक्स हैवन देशों में धन जमा कर टैक्स चोरी की जा रही है। लेकिन टैक्स हेवन देश कैसे होते हैं, सभी को मालूम नहीं होगा। दरअसल, टैक्स हेवन देशों में न के बराबर यानी शून्य टैक्स दरें हैं। ऐसे देशों में सिंगापुर, हांगकांग, स्विट्जरलैंड और मॉरिशस के अलावा लक्जमबर्ग, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, नीदरलैंड जैसे देश पॉपलुर हैं।

टैक्स हेवन देश राजनीतिक और आर्थिक रूप से स्थिर माने जाते हैं। ऐसे देश वित्तीय जानकारी विदेशी टैक्स अधिकारियों से बहुत कम ही साझा करते हैं। इन टैक्स हेवन देशों में जिन्हें निवेश करना होता है, उन्हें टैक्स दरों में छूट पाने के लिए उस देश में रहने की भी जरूरत नहीं होती। किसी भी निवेश से न केवल निजी निवेशक या कंपनी को बल्कि मेजबान टैक्स हेवन देश को भी फायदा होता है।

कुल मिलाकर इन टैक्स हेवन देशों के बैंकों में बेशुमार पूंजी आती है जो इनके वित्तीय क्षेत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहयोगी साबित होती है। एमएनसी यानी मल्टीनेशनल कंपनियां अपनी होल्डिंग कंपनियों को इन टैक्स हेवन देशों में स्थापित करती हैं। जबकि उनका कारोबार इन देशों में नहीं होता है। सिर्फ टैक्स चोरी के लिए ऐसा किया जाता है। इन टैक्स हेवन से सिर्फ कंपनियों को ही लाभ नहीं मिलता, बल्कि इसका लाभ अमीर और धनी वर्ग भी उठाता है।

उन देशों के लिए टैक्स हेवन की अवधारणा शुरू की गयी थी, जिनके पास सीमित प्राकृतिक संसाधन थे। साथ ही प्रतिस्पर्धा के दौर में जिन देशों के लिए खुद को स्थापित करने के मौके नहीं थे, उनके लिए ही यह अवधारणा शुरू हुई। ऐसे देशों को टैक्स हेवन का दर्जा देते हुए माना गया कि इन तरीकों से यहां विदेशी मुद्रा आकर्षित होगी। मगर बड़े कारोबारियों, राजनेताओं समेत अन्य रसूखदार लोगों ने इसका इस्तेमाल टैक्स चोरी के लिए किया है। जिसका खुलासा पनामा पेपर के बाद लीक हुए पैराडाइज पेपर से हुआ। भारत में टैक्स हेवन का इस्तेमाल राउंड ट्रिपिंग यानी काले धन को सुरक्षित रखने के लिये किया जाने लगा।

बीते सालों में मॉरिशस रूट बहुत चर्चे में रहा। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान मॉरिशस से भारत में तकरीबन 4.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ था। विशेषज्ञ मानते रहे हैं कि मॉरिशस रूट से आने वाला सारा पैसा भारत का ही है। जबकि असल में टैक्स नियमों से बचने के लिए भारत से इस पैसे को बाहर भेजा गया। भारत जैसे देश के टैक्स हेवन बनने की संभावनाओं पर भी सवाल उठते हैं। लेकिन, व्यावहारिक तौर पर यह संभव नहीं है। क्योंकि, भारत प्राकृतिक संसाधनों वाला अमीर देश है। भारत में सरकार अगर टैक्स दरें कम करती है तो देश के सामने बड़ी आर्थिक समस्या पैदा होने का खतरा हो सकता है।

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