कई दल कर चुके हैं सवर्ण गरीबों को आरक्षण की मांग

बसपा, सपा, सीपीएम, कांग्रेस, तेलुगू देशम और लोजपा पहले ही कर चुकी है सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण की मांग

मोदी सरकार ने सवर्ण गरीकों को आरक्षण की मांग कर विपक्ष को पशोपेश में डाल दिया है। क्यांकि कोई दल सवर्ण गरीबों को आरक्षण का विरोध कर उनकी नाराजगी मोल लेना चाहते हैं। हालांकि सवर्ण गरीबों को आरक्षण दिलाने में सरकार को संवैधानिक मुश्किलें आयेंगी। मगर, इस मुद्दे पर भी विपक्ष सरकार के खिलाफ बहुत हमलावर नहीं हो पा रहा है। सरकार के इस फैसले का विरोध तो कुछ दलितवादी दल भी नहीं कर पा रहे। क्योंकि कई पार्टियां पूर्व में गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग कर चुकी हैं। गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग करने वालों में दलित नेता और बसपा सुप्रीमो मायावती भी शामिल हैं। मायावती ने सवर्ण गरीबों को आरक्षण की कई बार मांग की है। वर्ष 2011 में लिखे पत्र में मायावती ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में गरीब सवर्णों को आरक्षण मिलना चाहिए।

तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को मायावती ने लिखा था कि संविधान के अनुच्छेद नौ में संशोधन कर आर्थिक आधार पर कमजोर सवर्ण वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि इसे अदालत में भी चुनौती नहीं दी जा सके। मायावती ने वर्ष 2007 में सत्ता में आने के फौरन बाद भी इस मुद्दे को उठाया था। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में मायावती ने वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो गरीब सवर्णों को आरक्षण देगी। वर्ष 2015 और 2017 में भी मायावती ने सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने की मांग की थी। मायावती के पत्र पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि अगर अन्य समुदाय के लोगों के गरीब बच्चों की समस्याओं की बात भी सामने आएगी तो उस पर भी ध्यान दिया जाएगा।

दूसरी ओर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी यानी सपा ने सवर्ण आयोग या उच्च जाति आयोग के गठन का वादा किया था। सपा ने कहा था कि ये आयोग इस बात पर विचार करेगा कि सवर्ण जातियों के गरीबों को कैसे और कितना आरक्षण मिले। उधर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू ने भी वर्ष 2016 में संकेत दिए थे कि उनकी सरकार भी अगड़ी जाति के गरीब लोगों को भी आरक्षण पर विचार करेगी। नायडू ने कहा था हम सर्वेक्षण करावाने के बाद हमें आर्थिक आधार पर कमज़ोर लोगों को आरक्षण देने में कोई परेशानी नहीं होगी। चारेक हफ्ते पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी माकपा के नेता और केरल सरकार में मंत्री कदकम्पल्ली सुरेंद्रन सुरेंद्रन ने कहा था कि आरक्षण की व्यवस्था जाति के बजाय आर्थिक आधार पर होनी चाहिए। लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा था कि गरीबी की एक ही जाति होती है।

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