क्या मणिशंकर अय्यर भाजपा को पहुंचाना चाहते हैं फायदा?

वर्ष 2014 के चुनाव के वक्त मोदी को चायवाला कहकर अय्यर ने करा दी थी कांग्रेस की फजीहत, इस बार पार्टी ने मणिशंकर को कांग्रेस से निकाला

कांग्रेस में कैडरों को राजनीति सिखाने वाले दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान से कांग्रेस फिर फंस गयी है। उनका ये बयान गुजरात में चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले आया है। इससे पहले वर्ष 2004 के आम चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी को चायवाला कहकर उन्होंने कांग्रेस की फजीहत करायी थी। जबकि इसे भाजपा ने मुद्दा बना दिया था। इस बार गुजरात चुनाव के ठीक पहले मणिशंकर अय्यर ने मोदी को नीच आदमी कहकर भाजपा को एक मौका दे दिया है। जबकि कांग्रेस और विपक्ष रक्षात्मक मुद्रा में है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बयान के लिए मणिशंकर अय्यर से माफी मांगने के लिए कह दिया है। इसपर अय्यर ने हिंदी कमजोर होने और ट्रांसलेशन का हवाला देते हुए अपने बयान पर माफी मांग ली है। दूसरी ओर सियासी नब्ज की अच्छी समझ रखने वाले राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इस बयान के लिए अय्यर को मानसिक रूप से दिवालिया घोषित कर दिया है। जबकि मणिशंकर के इस बयान पर मौका भुनाते हुए ना सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी, बल्कि वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है।

इधर मणिशंकर अय्यर के इस बयान पर तरह-तरह के कयास लगाये जाने लगे हैं। ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या अय्यर भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की बात कर रहे हैं। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि अय्यर कांग्रेस में राजनीति के धुरधंर माने जाते हैं। वे कांग्रेस के कैडरों को राजनीति सिखाते हैं। वैसे यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह का बयान देकर ना सिर्फ विवाद खड़ा किया है, बल्कि अपनी पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। इससे पहले भी अय्यर ने प्रधानमंत्री को चायवाला कहा था, जिसके बाद उनका यह बयान कांग्रेस पर बहुत भारी पड़ा और इस बयान को 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जमकर मुद्दा बनाया।

लोगों को ये हजम नहीं हो रहा कि कांग्रेस में राजनीति की ट्रेनिंग विभाग के अध्यक्ष मणिशंकर अय्यर गलती से ऐसा बयान देंगे। मणिशंकर पार्टी की नीति प्लानिंग व को-ऑर्डिनेशन विभाग के भी अध्यक्ष हैं। जहां खुद अय्यर पार्टी के नेताओं को राजनीति की ट्रेनिंग देते हैं, वहीं उनके प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने के अर्थ भी निकाले जाने लगे हैं।

मणिशंकर सियासी धुरंधर हैं। साथ ही वे बतौर ब्यूरोक्रैट भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 1963 में उनका चयन आईएएफएस में हुआ और उन्होंने केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव की भूमिका निभायी है। वर्ष 1978 से 1982 के बीच मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान के कराची में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। लिहाजा, बतौर डिप्लोमैट शब्दों की भूमिका काफी अहम होती है। सो, इतने अनुभव के बाद भी अय्यर का पीएम मोदी को लेकर दिया गया बयान उनके राजनीतिक कॅरियर की एक और बड़ी भूल साबित हो सकती है। जिसका फायदा उठाने से भाजपा पीछे नहीं रहना चाहेगी। मणिशंकर अय्यर राजीव गांधी से सीनियर रहे हैं। जब राजीव गांधी दून कॉलेज में पढ़ते थे, तब अय्यर उनके सीनियर थे और जब वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए तो वहां भी अय्यर उनके सीनियर थे।

इधर, गुजरात में फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच आदमी कहने पर अपने नेता मणिशंकर अय्यर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। साथ ही पार्टी ने अय्यर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। पार्टी के इस कदम को डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।

 

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