क्यों राहुल गांधी से हर कदम पर आगे दिख रहे मोदी?

नदीम एस अख्तर

तीन तलाक़ बिल पे ज़ोर आजमाइश से बीजेपी का कोर वोटर खुश है। सही है, तान दिया तलाक़ क़ानून, अब बोलो! 10 फीसद सवर्ण आरक्षण काम कर जाएगा। सुप्रीम कोर्ट भले बाद में इस पे हथौड़ा चला के क़ानून निरस्त कर दे पर मोदी जी ने बिल पास करवा दिया, इसका फायदा बीजेपी को चुनाव में मिलेगा। राम मंदिर पे क़ानून भले नहीं बना पाए पर अगली सरकार बनेगी तो मोदी जी राम मंदिर बनाने का क़ानून भी पास करा देंगे, ये मेसेज चला गया है। सो यहां भी बीजेपी की बल्ले-बल्ले। सीबीआई चीफ आलोक वर्मा करप्ट थे, तभी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीकरी ने भी (हाई पावर्ड कमिटी में) उनको हटाने पे सहमति दी, ये बात भी जनता तक पहुंच रही है। इधर पूर्व जज जस्टिस काटजू ने ट्वीट करके जस्टिस सीकरी को ईमानदार बताकर ये संदेश दिया कि आलोक वर्मा को हटाने के फैसले पे जस्टिस सीकरी ने मोदी जी का साथ तभी दिया होगा जब आलोक वर्मा के खिलाफ मज़बूत दस्तावेज और सबूत होंगे। यानी यहां भी मोदी जी विजयी हुए।

बचा राफेल तो बीजेपी के पास इस मामले पे सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट का हथियार है। जनता को ये बताया जा रहा है कि राहुल गांधी पगला गए हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद मोदी जी पर सवाल उठा रहे हैं। राफेल पे कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में है और जनता कोर्ट की बात मानेगी। यानी यहां भी मोदी जी की जीत। राहुल जी को अगर राफेल पे इतनी ही दिक्कत है तो इस मामले में कांग्रेस खुद कोर्ट क्यों नहीं जाती, सिर्फ जुबानी गोले क्यों दागती है, जनता ये सवाल भी पूछेगी। यानी राफेल पे राहुल के सारे सवालों का जवाब बीजेपी के पास है- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पे भी कांग्रेस अध्यक्ष को भरोसा नहीं। यानी राहुल जी विश्वसनीय नहीं हैं।

इधर बॉलीवुड सितारे मोदी जी के साथ सेल्फी ले रहे हैं। उधर राहुल के बगल में सिर्फ रणदीप सुरजेवाला दिखते हैं। ब्रैंड बिल्डिंग में भी राहुल पिछड़ रहे हैं। राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जो मायावती अभी यूपी में अखिलेश के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाली हैं, चुनाव बाद सत्ता के लिए अपने सांसदों के साथ वो बीजेपी से भी हाथ मिला सकती हैं। कांग्रेस ने हिंदी पट्टी के जिन तीन राज्यों में चुनाव जीतकर सरकार बनाई है, वहां सत्ता की मलाई के लिए आंतरिक कलह चरम पे है। बीजेपी उनसे ज्यादा पीछे नहीं थी, सो मोदी जी के चुनाव मैदान में आते ही बीजेपी वहां come back कर सकती है। नोटबन्दी, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे गौण होते दिख रहे हैं।

चुनावी चक्रम में जनता का मूड बदल रहा है। जीएसटी यानी व्यापारियों से लेकर किसानों तक के लिए मोदी जी course correction कर रहे हैं। कांग्रेस का कैडर अभी भी निढाल पड़ा है और बीजेपी से लेकर संघ तक का कैडर काम में लग गए हैं। ज़मीन पे काम शुरू हो चुका है। दिल्ली के रामलीला मैदान में मुरलीमनोहर जोशी, आडवाणी और मोदी एक साथ मंच पे खड़े हैं। अमित शाह हुंकार भर रहे हैं। कांग्रेस की दुर्दशा ये है कि दिल्ली में फिर उसने बुजुर्ग और जनता की नज़र में कामनवेल्थ घोटाले के काल वाली शीला दीक्षित को कांग्रेस की कमान सौंपी है। ये कांग्रेस और सोनिया गांधी का मानसिक दिवालियापन है। इससे पता चलता है कि राहुल भले कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हों, परदे के पीछे से सोनिया गांधी अब भी कांग्रेस को हांक रही हैं। ये मुगलिया सल्तनत नहीं है कि बुड्ढा बढदुरशाह ज़फ़र ही 1857 के ग़दर का दिल्ली में चेहरा होगा।

कांग्रेस ने एमपी में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत को कमान देकर भी यही संदेश दिया कि भले राहुल युवा हैं पर उनकी टीम को धकिया कर पुराने खडूस कांग्रेसी ही राज करेंगे। जनता उन पुराने कांग्रेसियों और उनके वर्क कल्चर से चिढ़ती है। इसका कांग्रेस को नुकसान होगा। उदाहरण ये है कि कमलनाथ ने एमपी में आते ही वंदे मातरम के गान पे रोक लगा दी। जब लोकसभा चुनाव इतने नज़दीक हों तो कमलनाथ का ये फैसला बेहद बचकाना था जो बताता है कि ये लोग मिलकर राहुल गांधी की कुर्सी के नीचे एटम बम लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

उधर मोदीजी को चाय वाला बोलकर बीजेपी को 2014 का चुनाव जितवाने वाले घाघ मणिशंकर अय्यर अचानक से फिर बिल से निकल आये हैं। अबकी बार 2019 में कांग्रेस को हराने के लिए और घटिया बयान दिया है। कह रहे हैं कि राजा दशरथ के महल में हज़ारों कमरे थे, राम जी कहाँ पैदा हुए ये कौन जानता है?? यानी इस देश की धर्म भीरू जनता को गुस्सा दिलाकर कांग्रेस से छिटकाने का पूरा प्रयास किया है। फिर भी राहुल गांधी चुप हैं। उनको पार्टी में रखे हुए हैं, धकिया के बाहर निकाला नहीं। आप समझ लीजिए कि कांग्रेस की कितनी बुरी गत है और पार्टी किस तरह दिशाहीन है। सभी कांग्रेसी राहुल के सहारे हैं और राहुल ढंके-छुपे माता सोनिया के सहारे। बोलने में आक्रामक ज़रूर हुए हैं पर राफेल में अपनी बात जनता को अभी तक मनवा नहीं पाए।

जब बीजेपी के पास सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी है तो राहुल कानूनी जंग की बजाय जुबानी जंग लड़ रहे हैं। ये डरपोक और बयान बहादुर की निशानी है। मैंने पहले भी कहा था कि जो अपनी बात जनता तक ठीक से पहुंचा देगा, वो चुनाव जीत जाएगा। मोदी जी फिलहाल इसमें कामयाब दिख रहे हैं। राहुल अभी तक इसमें पिछड़ रहे हैं। चुनाव के first phase of voting तक माहौल और बदलेगा। जनता में shifting चालू है। मोदी जी को एक और मौका दो, इस पे वो सोचने लगी है। राहुल को अगर 2019 जीतना है तो सबसे पहले उनको युवा नेतृत्व को लेकर संगठन में जान फूंकनी पड़ेगी। देशभर में। बुजुर्ग कांग्रेसी नेताओं से जनता चिढ़ती है, ये बात मैं बार-बार कह रहा हूँ। 2019 में मोदी जी को हराना राहुल जी के लिए मुश्किल होता जा रहा है। फिलहाल तो यही दिख रहा है।

 

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