गरीबों व किसानों को अब रुपये, मोदी सरकार का दूसरा छक्का

पांच साल के मैच को जीतने के लिए मोदी सरकार ने अंतिम ओवर में एक और छक्का लगाया है। केंद्र सरकार अब गरीबी रेखा (बीपीएल) से नीचे के लोगों के खातों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर की योजना बना रही है। योजना के तहत अब सरकार गरीबों के खाते में सीधा यूनिवर्सल बेसिक इंकम डालेगी। इतना ही नहीं किसानों को भी डायरेक्ट इंवेस्टमेंट सपोर्ट मिलेगा। सूत्र बताते हैं कि सरकार जल्द ही गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवारों के खातों में 2,500 प्रति महीना यूबीआई (यूनिवर्स बेसिक इनकम) की घोषणा कर सकती है।

मालूम हो कि वर्ष 2019 चुनाव से पहले मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी। संविधान संशोधन का ये बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया। राज्यसभा में शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा था कि मैच जिताने वाला यह पहला छक्का नहीं है, अभी ऐसे और भी छक्के लगेंगे।

मोदी सरकार की नयी योजना को लेकर सूत्र बताते हैं कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के खातों में डायरेक्ट पैसे तो आएंगे मगर इसके बाद उन्हें राशन, खाना और रसोई गैस में मिलने वाली सब्सिडी खत्म कर दी जाएगी।
लाभुकों की संख्या इसी बात पर निर्भर करेगी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सरकारी खजाने को कितना फंड देता है। अनुमान है कि देश की 27.5 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है। मालूम हो कि वर्ष 2017 के इकनॉमिक सर्वे में इस योजना के बारे में सबसे पहले बात की गई थी। गरीबी मिटाने के लिए चल रहे सोशल वैलफेयर प्रोग्राम का इस यूबीआई स्कीम को एक अच्छा विकल्प बताया गया था। राजस्थान विस चुनावों में भी यह योजना भाजपा के मेनिफेस्टो का हिस्सा थी।

मोदी सरकार ने दूसरा छक्का जड़ते हुए किसानों को लेकर भी योजनाएं बनायी है। किसानों को डायरेक्ट पैसे मिलेंगे। देश की 47 प्रतिशत आबादी किसानी से जुड़ी है। सो, सरकार तेलंगाना के ‘रितु बंधू स्कीम’ को अपनाने के बारे में सोच रही है। इस स्कीम के तहत एक एकड़ से कम जमीन रखने वाले किसानों को 4 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से डायरेक्ट खाते में मिलते हैं। ये पैसे रबी और खरीफ फसलों के सीजन में मिलते हैं। लेकिन, सूत्रों का मानना है कि अगर किसानों को डायरेक्ट पैसे मिलेंगे तो उन्हें बीज और खाद में मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया जाएगा। वैसे तस्वीर आगामी जुलाई में ही साफ होगी।

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