गुजरात की बिसात पर हार्दिक का दांव व कांग्रेस

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का पलटना कांग्रेस को धोखा या रणनीति का हिस्सा?

भावेश शाह

अमदाबाद। गुजरात के राजनीतिक हलकों में चर्चा यही है कि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने पलटकर कांग्रेस को धोखा दिया है। खबरें भी यही कह रही हैं। लेकिन, खबरों के उस पार झांका गया तो यही बात सामने आयी है कि पटेल का पलटना उनकी रणनीति का ही हिस्सा है।

दरअसल, 25 अगस्त 2015 को ही एक बड़ी रैली से ही हार्दिक पटेल को देश ने जाना। गुजरात के पाटीदारों के लिए वे हीरो बनकर उभरे। लेकिन, इसके बाद कभी-कभार ही वे चर्चा में आये। पहले भाजपा से नाराज चल रही महाराष्ट्र में उसकी सत्ता साझीदार रही शिवसेना ने हार्दिक को साधा। एक साल पहले ही शिव सेना के उद्धव ठाकरे ने हार्दिक पटेल को लेकर गुजरात में भाजपा के खिलाफ चुनाव में उतरने का ऐलान किया। इसके बाद का लंबा अंतराल ऐसा गुजरा जब हार्दिक चारेक बयानों में ही सिमटे रह गये।

लेकिन, गुजरात चुनाव के बाद देश के सबसे बड़े विपक्षी नेता राहुल गांधी से करीबी ने हार्दिक पटेल को फिर से चर्चे में लाया। कांग्रेस के नेताओं की ओर से उन्हें किसी भी सीट से टिकट देने के प्रस्ताव और कांग्रेस की एक हद तक हार्दिक पर निर्भरता ने पटेल को पाॅलिटिकल माइलेज दिया। ऐेसे में अब पटेल का पलटना कांग्रेस को धोखा से ज्यादा उनकी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पहले संभावनाएं थीं कि गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस को अपना समर्थन देंगे। मगर, अचानक एक दिन पहले पटेल ने एक ट्वीट कर सबको चैंका दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कांग्रेस को अल्टीमेटम देते हुए कांग्रेस पाटीदारों को संवैधानिक आरक्षण कैसे देगी, उसे स्पष्ट करने के लिए तीन नवंबर तक वक्त दिया।

पिछले दनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से अहमदाबाद के होटल ताज में हार्दिक पटेल की उनसे मुलाकात को लेकर काफी विवाद हुआ था। मुलाकात हुई या नहीं हुई इस पर भी विवाद था। हालांकि सूत्रों के अनुसार दोनों एक-दूसरे से मिले थे। तभी हार्दिक ने राहुल से पूछा था कि पाटीदारों को आरक्षण देने का संवैधानिक रास्ता क्या होगा।

मालूम हो कि भाजपा ने भी पाटीदारों को ईबीसी के तहत आरक्षण दिया था, मगर सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। ऐसे में हार्दिक पटेल चाहते हैं कि पाटीदारों को आरक्षण को लेकर भाजपा की तरह कांग्रेस भी इसे पेंच में न डाल दे। कानूनन आरक्षण किस तरह मिलेगा, ये हार्दिक पटेल स्पष्ट रूप से जानना चाहते हैं। हालांकि पूरे मामले में ये भी सच है कि पाटीदारों के युवा नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें गुजरात चुनाव के दौर में बढ़ चुकी हैं। उन्हें आशंका है कि भाजपा उनके समाज को आरक्षण नहीं दे रही है और अगर कांग्रेस भी नहीं दे पाई तो उनके लिए समस्याएं खड़ी होंगी।

दूसरी ओर हार्दिक ने पहले से ही भाजपा के खिलाफ रहने का तय कर लिया है और वह जमकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के खिलाफ बोल रहे हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस कोई रास्ता नहीं दिखा सकती है तो उनके लिए यह बड़ी आफत होगी। पिछले 10 दिनों से हार्दिक पटेल गुजरात में चुनावों के मद्देनजर सभाएं और रैलियां कर रहे हैं और जिस तादाद में लोग उनके साथ आ रहे हैं तो उससे ऐसी संभावनाएं जरूर लगाई जा सकती हैं कि वह एक तीसरे मोर्चे की तैयारी में हैं। अब तो उनके एक नयी पार्टी गठित करने की भी बात सामने आ गयी है।

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