घोषणाओं के बावजूद निर्मल नहीं हो पायी गंगा

गंगा 2019 मार्च तक 80 फीसदी और मार्च 2020 तक सौ फीसदी स्वच्छ हो जाएगी : गडकरी/ मंत्रालय ने ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत सभी परियोजनाओं के निर्माण कार्यों को मंजूरी दी

नयी दिल्ली। मोक्षदायिनी गंगा भले ही अब तक निर्मल और अविरल न बन पायी हो, लेकिन इस साल मोदी सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत इसमें न्यूनतम प्रवाह बनाये रखने की अधिसूचना जारी की और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की भी पहचान कर ली है। मंत्रालय ने ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत सभी परियोजनाओं के निर्माण कार्यों को मंजूरी प्रदान कर दी है और उन पर काम शुरू करने के निर्देश दिये गये हैं। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी का दावा है कि इस साल के बाद ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत इसकी सफाई से जुड़ी किसी परियोजना को मंजूरी देना शेष नहीं रह जाएगा।

उनका यह भी दावा है कि गंगा नदी अगले मार्च तक 80 फीसदी और मार्च 2020 तक सौ फीसदी स्वच्छ हो जाएगी। गडकरी का कहना है कि इस साल उन्होंने गंगा सफाई के लिए गंगा तट पर बसे गांवों को इसमें सक्रिय होकर भागीदार बनाने की जो मुहिम शुरू की, उससे गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में ग्रामीणों की अहम भूमिका होगी। इस दिशा में सबसे पहले इन गांवों को गंगा तट पर शौच जाने से रोकने के लिए पहल की गयी और इस योजना के तहत गंगा तट पर बसे करीब 4500 गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया। सरकार ने इस साल गंगा की सफाई के लिए जो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, उनमें गंगा में न्यूनतम प्रवाह बनाने के लिए अधिसूचना जारी करना और इसकी सफाई के लिए ‘वन ऑपरेटर वन सिटी’ योजना को क्रियान्वित करना है।

निर्मल और अविरल गंगा के लिए 254 परियोजनाओं को इस दौरान मंजूरी दी गयी और पर्यावरण के अनुकूल न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित बनाने पर बल दिया गया। गंगा में जल का प्रवाह सुनिश्चित करने से दो निशानों को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है। इससे एक तरफ जहां गंगा में निरंतर न्यूनतम जरूरी जल प्रवाह बना रहेगा, वहीं जल मार्गों का विकास कर परिवहन की जो नयी पहल गंगा के जरिये की गयी उसको सुचारु रूप से संचालित किया जा सकेगा। इसके तहत वाराणसी से हल्दिया तक जल मार्ग से माल ढुलाई का काम शुरू किया गया है। इसमें ज्यादा रोचक यह है कि अगले माह शुरू हो रहे अर्द्धकुंभ में श्रद्धालुओं को वाराणसी से प्रयागराज तक जल मार्ग से लाने की योजना है।

मंत्रालय ने अक्टूबर में गंगा नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाये रखने के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत गंगा में न्यूनतम जल प्रवाह बनाये रखना सुनिश्चित करना है। अधिसूचना के तहत सभी बांधों को न्यूनतम पानी निरंतर छोड़ना होगा। इस अधिसूचना से यह सुनिश्चित होगा कि गंगा का पानी सिंचाई, जल विद्युत, घरेलू और औद्योगिक उपयोग आदि के लिए प्रयोग किया जाये, लेकिन इसमें जल का न्यूनतम अपेक्षित प्रवाह बना रहे। गंगा में अविरल प्रवाह बने और इसके जलचरों को जरूरी जल प्रवाह में सांस लेने का अवसर मिले, इस दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ योजना के तहत मंत्रालय ने गंगा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहे नालों को इसमें जाने से रोकने के लिए हाल में ही एक समझौता किया है। योजना के तहत कानपुर के जाजमऊ नाले से गिरने वाले गंदे पानी को गंगा में जाने से रोकना है।

जाजमऊ में चमड़ा उद्योग समूह का गंदा पानी गंगा में गिरता है और इसको लेकर यह नाला दुनियाभर में जाना जाता है। मंंत्रालय ने कानपुर के सिसामऊ नाले का भी गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने के लिए कदम उठाये हैं। सिसामऊ व जाजमऊ गंगा नदी को प्रदूषित करने वाले सबसे बड़े कारक हैं। मंत्रालय ने इन गंदे नालों के पानी को गंगा में प्रवाहित होने से रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण काम शुरू किया है। ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए 24 हजार 672 करोड़ लागत की कुल 254 परियोजनाओं को इस साल मंजूरी दी गई। इनमें घाटों और श्मशान गृहों का विकास, नदी तट के कटाव में बचाव, नदी सतह स्वच्छता, संस्थागत विकास, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण, ग्रामीण स्वच्छता व जन भागीदारी जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

इनमें से 131 परियोजनाएं गंगा एवं यमुना नदी में प्रदूषण रोकने के लिए अवजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, पुराने संयंत्रों का जीर्णोद्धार और 4942 किमी सीवर नेटवर्क बिछाने और उनके जीर्णोद्धार का काम शामिल है। मंत्रालय का दावा है कि नदी तट विकास के तहत 145 घाटों और 53 श्मशान गृहों के निर्माण का कार्य किया जा रहा है और इसके आगामी मार्च तक इन कार्यों का पूरा हो जाने की संभावना है। इसके अलावा नदी सतह की स्वच्छता के लिए हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, पटना, साहिबगंज, नबद्वीप, हावड़ा, दिल्ली व मथुरा-वृंदावन में 11 ट्रैश स्किमर्स यानी कचरा साफ करने की मशीनें लगायी गयी हैं।

गडकरी का कहना है कि गंगा को निर्मल और अविरल बनाने का काम वह मिशन के तौर पर कर रहे हैं। गंगा तट पर बसे गांवों में विशेष अभियान चलाया गया और लोगों में गंगा से जुड़ाव का भाव पैदा किया गया। गंगा की सफाई के लिए मंत्रालय ने लंदन और मुम्बई में दो रोड शो किये। मंत्रालय का दावा है कि इसके कारण नमामि गंगे कार्यक्रम में कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है और कॉर्पोरेट घरानों ने गंगा को स्वच्छ बनाने में रुचि व प्रतिबद्धता व्यक्त की है। आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, फिनलैंड व इजराइल जैसे देशों ने गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार के साथ सहयोग करने में रुचि प्रदर्शित की है। गंगा में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण इसके तट पर स्थापित उद्योग हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बाद प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को सूचीबद्ध किया गया। इसके तहत गत नवम्बर तक सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले 961 उद्योगों की पहचान की गयी जिनमें से 795 इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर की ऑनलाइन सतत प्रदूषक निगरानी प्रणाली से जोड़ा गया है।

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