झामुमो को धूल सुंघाएंगे कृष्णा मार्डी और सूर्य सिंह बेसरा!

हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो की जड़ों में मट्ठा डालने और झामुमो मार्डी गुट को तीसरा विकल्प बनाने की कवायद

झामुमो की जड़ों में मट्ठा डालने के लिए पूर्व सांसद कृष्णा मार्डी और झारखंड पीपुल्स पार्टी के संस्थापक और पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने हाथ मिला लिया है। दोनों का मकसद झारखंड में मजबूत विकल्प बनकर उभरना है। दोनों ही दिग्गज झारखंड की सियासत के मजबूत हस्ताक्षर रहे हैं। सूर्य सिंह बेसरा अलग राज्य के सवाल पर विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देकर आदिवासियों-मूलवासियों के हीरो बन गये थे। जबकि कृष्णा मार्डी ने झामुमो से अलग गुट बनाकर झामुमो के विधायकों की संख्या दो अंकों से घटाकर एक अंक पर ला दी थी।

बहरहाल, फिर से झामुमो (मार्डी) गुट को जिंदा करने की घोषणा और इसके समर्थन में सूर्य सिंह बेसरा का आगे आना झारखंडी राजनीति की सबसे बड़ी खबर मानी जा रही है। मालूम हो कि पांच दिन पहले ही झारखंड विधान सभा परिसर में कृष्णा मार्डी ने झामुमो के बागियों की बैठक की। बैठक में सर्वसम्मति से झामुमो (मार्डी) को जिंदा करने का फैसला लिया गया। साथ ही एक अध्यक्ष और दस सदस्यीय संयोजक मंडली वाली तदर्थ समिति गठित की गयी थी। बैठक में जमकर झामुमो के बागियों ने झामुमो नेतृत्व पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। बैठक में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के भाई लालू सोरेन भी शामिल हुए थे।

अब झामुमो के बागियों को हरकत में देखकर राजनीतिक प्रेक्षक कई तरह के कयास लगा रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि ढाई दशक बाद फिर से कृष्णा मार्डी झामुमो के लिए परेशानी लेकर आ रहे हैं। वर्ष 1992 में जब मार्डी ने अलग गुट बनाने की घोषणा की तो झामुमो ने उन्हें हल्के में लिया। मगर, झारखंड मु्क्ति मोर्चा 9 अगस्त 1992 को दो भागों में बंट गया था। पहला झामुमो (सोरेन) और दूसरा झामुमो (मार्डी)। दोनों ही खेमों में नौ-नौ विधायक थे। वर्ष 1995 झामुमो में दोनों गुटों ने अलग-अलग अविभाजित बिहार विधान सभा का चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद दोनों गुटों के विधायकों की संख्या आधी से भी कम रह गयी। बाद में वर्ष 1999 में दोनों गुटों का विलय कराया गया।

झामुमो (मार्डी) गुट के दोबारा जीवित होने का नुकसान आजसू को भी हो सकता है। क्योंकि मार्डी गुट को वर्ष 1992 में जमीन पर लाने के कर्ताधर्ताओं में राजकिशोर महतो भी माने जाते हैं। अभी श्री महतो आजसू के टुंडी विधायक हैं। साथ ही वे झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो के पुत्र हैं। सो, स्व बिनोद बिहारी महतो की विरासत को झामुमो (मार्डी) गुट से जोड़ने की कृष्णा मार्डी और सूर्य सिंह बेसरा पूरी कोशिश करेंगे। जब श्री बेसरा ने जेपीपी बनाया था, तब पार्टी का छात्र मोर्चा आजसू को बनाया था। लेकिन, कुछ लोगों ने आजसू को ही पार्टी बना दिया और यह छात्र संगठन श्री बेसरा के हाथ से बाहर निकल आया था। ऐसे में श्री बेसरा की कोशिश आजसू को तोड़ने की होगी। दूसरी ओर झामुमो (मार्डी) गुट जिनता मजबूत होगा, भाजपा को उतनी राहत मिलेगी। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा झामुमो के बागियों को पूरी हवा और खाद-पानी देने की कोशिश करेगी।

इधर, झामुमो (मार्डी) गुट की संयोजक मंडली में शामिल बेनीलाल महतो और राजेश यादव ने बताया है कि अगली बैठक 22 अक्टूबर को रांची, बोकारो या धनबाद में होगी। इस बैठक में झामुमो (मार्डी) गुट की केंद्रीय कमेटी गठित कर सूची संबंधित सरकारी एजेंसी और चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी। साथ ही बताया जाएगा कि पार्टी पुरानी नियमावली पर ही संगठन को संचालित करेगी।

 

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