झारखंड में पारा शिक्षकों की हड़ताल से चरमराई शिक्षण व्यवस्था

शिक्षा से वंचित हो रहे हैं समाज के अंतिम कतार के बच्चे/मध्यान्ह भोजन के नहीं मिलने से भूख से परेशान हो रहे आदिवासीदलितगरीब के बच्चे

विशद कुमार

झारखंड में पिछले एक महीने से पारा शिक्षक हड़ताल पर हैं। जिसके कारण राज्य में 14 हजार नव प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह बंद हैं, वहीं इन विद्यालयों में प्रारंभिक शिक्षा (1ली से 5वीं कक्षा तक) ग्रहण करने वाले 42 लाख बच्चे एक महीने से शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं। वैसे कहने को राज्य के मध्य विद्यालय खुल तो रहे हैं, मगर केवल मध्यान्ह भोजन के लिए। क्योंकि इन विद्यालयों में भी पारा शिक्षकों की ही संख्या अधिक है और वे हड़ताल पर हैं, ऐसे में इन विद्यालयों में भी पढ़ाई बाधित है। वहीं बंद विद्यालयों के बच्चे पढ़ाई से वंचित तो हैं ही साथ ही वे मध्यान्ह भोजन से भी वंचित हैं, जिससे काफी गरीब परिवार के बच्चों को भूखे भी रहना पड़ रहा है। बता दें कि सिमडेगा की 12 वर्षीय संतोषी की भूख से मौत का कारण स्कूल का कई दिनों तक बंद का होना था। क्योंकि उसे स्कूल के मध्यान्ह भोजन का खाना नहीं मिल सका था और वह कई दिनों से भूखी ”भात—भात” कहते मर गई थी।

जहां राज्य के नव प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह पारा शिक्षकों के भरोसे संचालित हैं, वहीं कई प्राथमिक विद्यालय जिन्हें उत्क्रमित करके उत्क्रमित मध्य विद्यालय में परिवर्तित कर दिया गया है, वे भी पारा शिक्षकों के भरोसे हैं। अत: ऐसे में कई उत्क्रमित मध्य विद्यालय (1ली से 8वीं कक्षा तक) भी बंद हैं। दूसरी तरफ जो मध्य विद्यालय अपग्रेड होकर हाई स्कूल में परिवर्तित हुए हैं, वे विद्यालय भी पारा शिक्षकों के भरोसे हैं। राज्य में ऐसे हाई स्कूलों की संख्या लगभग 1600 हैं। मतलब कुल मिलाकर राज्य के लगभग 50 लाख बच्चे अभी शिक्षा और मध्यान्ह भेजन से वंचित हो रहे हैं।

बताते चलें कि आंदोलनकारी पारा शिक्षकों द्वारा जारी भाजपा के सांसदों विधायकों के आवास पर धरना कार्यक्रम के तहत राज्य की कल्याण मंत्री लुईस मरांडी के दुमका स्थित आवास के सामने धरना पर बैठे पारा शिक्षक कंचन कुमार दास की पिछले 15 दिसंबर की रात को ठंड लगने की वजह से मौत हो गई। वे रामगढ़ प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चिनाडंगाल में कार्यरत थे। कंचन कुमार दास की मौत के तीसरे दिन यानी 17 दिसंबर को एक और पारा शिक्षक उज्ज्वल कुमार राय की मौत हो गयी। सारठ थाना क्षेत्र के पारबाद गांव के रहनेवाले उज्ज्वल कुमार राय 15 नवंबर को रांची में पारा शिक्षकों के आंदोलन के दौरान पुलिस के डंडे से गंभीर रूप से घायल हो गये थे। रांची से लौटने के बाद उनका सारठ सीएचसी में प्राथमिक उपचार किया गया था। उस वक्त डाक्टर ने बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया था। इसके बाद इलाज के लिए उज्ज्वल सीएमसी वेल्लोर भी गये। मगर आर्थिक तंगी के कारण बेहतर इलाज नहीं करा सके तथा उनका निधन हो गया। उज्ज्वल सारठ प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बस्की में बतौर पारा शिक्षक कार्यरत थे।

बता दें कि राज्य में अबतक 9 पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी हैं। जबकि एक अभी तक लापता है और एक पारा शिक्षक की बेटी की मौत पिता के जेल जाने के बाद हो गई थी।

मरने वालों के नाम — जीतन खातुन (गोला, रामगढ़)। बहादुर ठाकुर, (चलकुशा, हजारीबाग)। कंचन कुमार दास, (चिनाडंगाल, रामगढ़)। उज्ज्वल कुमार राय, ( बस्की,देवघर)। सूर्यदेव ठाकुर (चलकुशा, हजारीबाग)। प्रियंका कुमारी (चतरा)। उदय शंकर पान्डेय(15 नवंम्बर के दिन ही पुलिस की लाठी से मौत) गढ़वा। जगदेव यादव (चतरा)। रघुनाथ हेम्ब्रम (बोकारो)। शिवलाल सोरेन,लापता (दुमका)। हेमब्रंट मुण्डा की पुत्री की मौत (पिता के जेल जाने की खबर सुनकर)।

इनकी मौत के बाद एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के द्वारा सरकार से मृतक के आश्रितों को 25 लाख रु0 मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग की गई है। इन मौतों से राज्य के पारा शिक्षक काफी आक्रोश में हैं। आंदोलन का उग्र रूप धारण करने की संभावना बढ़ गई है।

 कहना ना होगा कि जहां राज्य की प्रारंभिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अस्त—व्यस्त है, वहीं 10वीं की बोर्ड परीक्षा भी विद्यार्थियों के सिर पर है। ऐसे में 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए इस तरह की स्थितियां काफी चिंताजनक हैं, क्योंकि इस मामले पर सरकार की उदासीनता जस की तस बरकरार है। इस मामले पर सरकार का पक्ष जानने के लिए जब मैंने राज्य की शिक्षा मंत्री नीरा यादव से संपर्क करने की कोशिश की तो उनसे बात नहीं हो सकी। दूसरे दिन भी उनका मोबाइल उनका कोई आदमी उठाया और बताया कि मंत्री जी कार्यक्रम में हैं। जबकि उनके पीएस अभय कु0 सिन्हा ने बताया कि मंत्री जी राज्य से बाहर हैं।

बताते चलें कि शिक्षा से वंचित हो रहे ये बच्चे आदिवासी, दलित व पिछड़े वर्ग के हैं। ऐसे में इस मामले पर सरकार की उदासीनता इस बात का संकेत है कि सरकार चाहती है कि आदिवासी, दलित व पिछड़े वर्ग के बच्चे शिक्षा से महरूम रहें। मामले पर भाकपा (माले) के पूर्व विधायक बिनोद कुमार सिंह कहते हैं कि ”एक तो सरकार विद्यालयों में शिक्षकों एवं छात्रों की कम संख्या को आधार बनाकर स्कूलें बंद कर रही है, वहीं पारा शिक्षकों की जायज मांगों पर अड़ियल रवैया अपनाकर राज्य के प्राथमिक विद्यालयों को बंद होने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे राज्य के आदिवासी, दलित और गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।” बिनोद कुमार सिंह आगे कहते हैं कि ”इसमें कहीं दो राय नहीं कि सरकारी विद्यालयों में राज्य के आदिवासी, दलित और गरीबों के ही बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में सरकार की शिक्षा के प्रति ऐसी उदासीनता इस बात के प्रमाण हैं कि रघुबर दास की सरकार राज्य के दलित, आदिवासी व गरीब के बच्चों को शिक्षा से वंचित करना चाह रही है।” वे बताते हैं कि ”यह सरकार सभी निजी संस्थानों को बढ़ावा देने में लगी है, जिसमें निजी विद्यालय भी शामिल हैं। आज जहां आदिवासी, दलित व अन्य गरीब तबके के लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं, वहीं आज हमारे समाज में शिक्षा के प्रति एक जागरूकता आई है, जिसके कारण बहुत सीमित आय वाले लोग, मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले लोग भी अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना लिए उन्हें अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं और अपनी जरूरतों में कटौती करके अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। जिससे उनका आर्थिक दोहन होने के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई आगे जाकर रूक जाती है। यानी एक तरफ सरकारी विद्यालयों के बंद होने से समाज के अंतिम कतार के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, वहीं उसी कतार में खड़े कुछ लोगों के बच्चे भी अंतत: निजी विद्यालयों की आर्थिक लूट के शिकार होकर शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। यह पूंजीवादी सोंच की एक गहरी साजिश का हिस्सा है।”

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आठ सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष संजय कुमार दुबे कहते हैं कि ”जबतक छत्तीसगढ़ की तर्ज़ पर पारा शिक्षकों को स्थाई करते हुए 5200 रु0 से 20,200 रु0 वेतनमान नहीं कर दिया जाता तबतक हमारा आंदोलन चलता रहेगा।” उन्होंने कहा कि ”अगर सरकार हमारी बात नहीं मानी तो 24 दिसंबर से शीतकालीन सत्र के दौरान झारखंड के सभी विधायकों के आवास के समक्ष हम अनशन पर बैठेंगे। इसके बाद भी सरकार हमारी बातों को नहीं मानती है तो हम दिल्ली की ओर कूच करेंगे और प्रघानमंत्री आवास का घेराव करेगें।”

वे आगे बताते हैं कि ”हमारे एक साथी कंचन कुमार दास की मौत कल्याण मंत्री लुईस मरांडी के आवास के सामने धरना के दौरान ठंड लगने से हो गई है। अत: एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा  द्वारा सरकार से उनके आश्रितों को 25 लाख रु0 मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग की गई है। हम उन्हें शहीद का दर्जा देते हैं और घोषणा करते हैं कि साथी कंचन कुमार दास की शहादत बेकार नहीं जाएगी।”

बताते चलें कि एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा झारखंड के 67000 पारा शिक्षकों के स्थायीकरण एवं  वेतनमान की मांग को लेकर 15 नवम्बर से प्रारंभ आंदोलन के क्रम में पूरे राज्य में हमारे कुल 9 पारा शिक्षक साथी शहीद हुए हैं तथा 1 पारा शिक्षक साथी लापता हैं। सरकार ने 282 शिक्षकों को भी होटवार जेल भेजने  का काम किया था।

बताते चलें कि आज 19 दिसंबर को बोकारो जिला के जरीडीह प्रखंड में ”एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा” की राज्य स्तरीय बैठक की गई इस बैठक की अध्यक्षता विनोद बिहारी महतो एवं संचालन संजय कुमार दुबे ने किया

 बैठक में निर्णय लिया गया कि भाजपा द्वारा की जा रही पद यात्रा का विरोध किया जाएगा, 21 दिसंबर को प्रखंड में काला झंडा लगाकर मोटरसाइकिल रैली निकाली जाएगी, सभी विधायकों चाहे वे सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के हैं, के आवास पर धरना एवं 24 से 27 दिसंबर तक भूख हड़ताल किया जाएगा और 28 दिसंबर से ग्राम चौपाल पर्चा वितरण एवं भाजपा का पोल खोलो कार्यक्रम तथा सभी पंचायत के मुखिया, प्रमुख, प्रबंधन समिति के सदस्यों का समर्थन पत्र लिया जाएगा। अवसर पर संजय दुबे ने कहा है कि ”पारा शिक्षकों के 16 नवंबर से चल रहा अनिश्चितकालीन हड़ताल में अब तक 10 पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है , हड़ताल को एक महीना से अधिक होने वाला है , लेकिन सरकार इस ओर कोई रुचि नहीं दिखा रही है। पहले तो 15 नवंबर को शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हम पारा शिक्षकों पर लाठीचार्ज करवाया गया , जिसमें हमारे कई पारा शिक्षकों को गंभीर रूप से घायल किसा गया और जेल भी भेज दिया गया। 16 नवंबर से 67000 पारा शिक्षक लोग हड़ताल पर हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है , एक तो विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है , ऊपर से पारा शिक्षकों को पढ़ाने के अलावे और भी कई काम सौंप दी जाती है। दूसरी ओर उन्हें जितना वेतनमान मिलता है , उससे ज्यादा तो प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले मजदूर भी कमा लेते हैं। नेताओं के वेतन – भत्ते तो समय समय पर बढ़ते रहते हैं , सरकार को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है और पारा शिक्षकों को छतीसगढ़ की तरह 5200-20200 पे स्केल देने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि ”पारा शिक्षकों की धैर्य की परीक्षा न ले।  राज्य के पारा शिक्षक बिना वेतनमान लिए वापस नहीं लौटेगें”।  बैठक में बिनोद बिहारी महतो, सिन्टु सिंह, बजरंग प्रसाद, मोहन मंडल दशरथ ठाकुर,  बिजय पाण्डेय,  विरेेन्द्र राय, अजय प्रजापति, मनोज सिंह, अर्जुन सोय, नारायण महथा, संजय पाण्डेय, आशवनी सिंह, एजाजुल हक, अशोक वर्मा,  चितरंजन भण्डारी,   मुकेश साह, कृष्णा पासवान, शकिल अहमद, संजय मेहता, भागवत तिवारी, नेली लुकस, संजय पाठक, परवेज जावेद, मनोज यादव, उमाशंकर शाहदेव, मुकद यादव, घनीराम महतो, निरंजन डे, प्रसन्न सिंह, मनोज कु0 मिश्र, गोविद सिंह, आनंद कुमार, महेंद्र नायक, रामनारायन सहित कई राजनीतिक दल के लोग भी उपस्थित हुए।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *