धर्मों की बिसात पर ममता और अमित शाह का दांव

सांप्रदायिकता की आंच में पश्चिम बंगाल के पिघलने का खतरा और मजहब-मजहब खेल रही टीएमसी-भाजपा/ उलबेरिया लोकसभा सीट के लिए उप चुनाव की घोषणा से पहले ही दोनों पार्टियां खोज रही हैं हुकुम का इक्का/आरएसएस का कार्यक्रम रद करने से भी बखेड़ा

पश्चिम बंगाल सांप्रदायिकता की आंच में पिघलने के मुहाने पर है। ऐसे हालात सियासत को अपने-अपने एजेंडे पर सैंकने की भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की तैयारियों से पैदा हुए हैं। नया विवाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दुर्गा पूजा के विसर्जन को लेकर जारी आदेश सेे हुआ है। इसी आदेश से भाजपा को खाद पानी मुहैया हुआ।

विश्व हिंदू परिषद की राज्य इकाई और आरएसएस ने साफ तौर पर मुख्यमंत्री ममता के इस आदेश को मानने से इंकार कर दिया है। इस मामले में भाजपा और टीएमसी में घमासान है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह समेत राज्य स्तरीय भाजपा नेताओं ने इस आदेश के लिए ममता की आलोेचना की है। हालांकि पूरे विवाद की जड़ धर्म नहीं बल्कि सियासत बतायी जा रही है। राजनीतक प्र्रेक्षकों का कहना है कि उलबेरिया से टीएमसी सांसद सुलतान अहमद के निधन के बाद यहां चुनाव होना है। टीएमसी इस सीट को दोबारा अपने खाते में लाना चाहती है। इस मुस्लिम बहुल सीट पर वामपंथियों की भी पकड़ रही है। जबकि भाजपा मुस्लिम बहुल इस सीट पर एक त्रिकोण बनाकर किला फतेह करना चाहती है। हालांकि उप चुनाव की घोषणा अभी बाकी है।

लिहाजा, उलबेरिया लोकसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव को साधने की तैयारी में ही टीएमसी और भाजपा यहां मजहब-मजहब खेल रहे हैं। टीएमसी विसर्जन को साधने में लगी है तो मौका पाकर भाजपा हिन्दुओें के भीतर टीएमसी के प्रति विरोधी तो अपने प्रति स्नेह भाव जागृत करने पर अमादा है।

बहरहाल, पिछले साल की तरह इस साल भी मोहर्रम और दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन एक ही दिन होना है। इस मसले पर बुधवार को ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा आयोजकों, मुस्लिम समुदाय और अन्य धर्मों के नेताओं की एक बड़ी बैठक के बाद मूर्ति विसर्जन का समय 30 सितंबर को शाम छह बजे तक ही सख्ती से तय किया है। जारी आदेश पर विवाद के बाद आदेश में कुछ जोड़ते हुए ममता ने ट्वीट कर कहा है कि जो पूजा समितियां 30 सितंबर को छह बजे शाम तक विसर्जन नहीं कर सकेंगी, उसे मोहर्रम के बाद दो अक्टूबर या उसके बाद प्रतिमा विसर्जन करने की इजाजत होगी। क्योंकि एक अक्टूबर को मोहर्रम का ताजिया निकाला जाना है। दूसरी ओर जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनका तर्क है कि 30 सितंबर को विजया दशमी है। इसके एक दिन बाद ही विसर्जन शास्त्र सम्मत होता है। मगर इसी दिन विजर्सन पर प्रतिबंध लगा है।

पिछले साल राज्य सरकार को लगी थी कोर्ट की फटकार  

मालूम हो कि पिछले साल भी इसी तरह राज्य सरकार ने मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध जारी किया था। पिछले साल 11 अक्टूबर को दशहरा था और 13 अक्टूबर को मोहर्रम। ममता के इस फैसले के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के दौरान कोलकाता हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी।

आरएसएस का कार्यक्रम रद किये जाने से भी विवाद  

प्रतिमा विसर्जन संबंधी आदेश पर वैसे तो ममता ने सफाई दी है, लेकिन आरएसएस का कार्यक्रम स्थल रद किये जाने को लेकर भी नया विवाद उठा है। अपनी सफाई में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर किसी पूजा पंडाल के पास से विसर्जन के वक्त मोहर्रम का जुलूस गुजरा तो समस्या हो सकती है। इसलिए ऐसा आदेश जरूरी था। उधर आरएसएस का कार्यक्रम स्थल बुकिंग के बाद रद किये जाने को संघ और भाजपा समेत समर्थित संगठनों ने अलोकतांत्रिक बताया है।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को हिस्सा लेना था। कार्यक्रम तीन अक्टूबर को कोलकाता के महाजाति सदन में होना था। इसकी बुकिंग कराई गई थी। ये कोलकाता में सरकार नियंत्रित मुख्य आडिटोरियम है। कार्यक्रम में बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम सिस्टर निवेदिता की भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भूमिका विषय पर आधारित था। इधर आडिटोरियम की बुकिंग रद किये जाने के खिलाफ सिस्टर निवेदिता ट्रस्ट ने अदालत जाने की चेतावनी दी है। जबकि संबंधित अधिकारी ने बुकिंग रद किये जाने का कारण आडिटोरियम में मरम्मत कार्य कराने जाने को बताया है।

आरएसएस की गतिविधियों से परेशान ममता

माना जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन संबंधी आदेश जारी करने के पहले से ही ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में आरएसएस की गतिविधियों से परेशान और चैकन्ना रहीं हैं। सो, लोग जारी आदेश को संघ की गतिविधियों का जवाब मानते हैं। संघ की कार्यक्रम स्थल की बुकिंग रद किये जाने की कार्यवाही को भी इसी तौर पर देखा जा रहा है। इन दिनों लगातार संघ, विहिप, बजरंग दल, संस्कार भारती जैसे संगठनों की गतिविधि बढ़ी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के दौरे का डर ममता बनर्जी का सियासी तौर पर चैकन्ना रहने की प्रवृति का हिस्सा माना जा रहा है। ममता को लग रहा है कि संघ और भाजपा जितनी मजबूत होगी उनका आधार उतनी ही तेजी से खिसक जाएगा। मालूम हो कि कृष्ण की नगरी वृंदावन में दो दिन पहले ही खत्म हुई आरएसएस की बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हाजिरी लगाई थी। शाह ने संघ के सामने भाजपा-संगठन की गतिविधियों को भी रखा था और बंगाल में पार्टी के विस्तार और मजबूती के लिए संघ से मदद की गुहार भी लगाई थी।

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