नागरिक कानून संशोधन बिल से पूर्वोत्तर के भाजपा सहयोगी खफा

नागरिकता संशोधन विधेयक में की गयी है पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आये गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दिये जाने की व्यवस्था/ लोकसभा में पारित हो चुका है नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिक कानून में संशोधन की भाजपा की कोशिश ने उसके पूर्वोत्तर राज्यों के सहयोगियों को बेचैन कर दिया है। नागरिकता कानून में संशोधन मसले पर पूर्वोत्तर में भाजपा के चार सहयोगी दल भी नाराज हैं। जबकि असम गण परिषद (एजीपी) तो दो दिन पहले भाजपा का साथ छोड़ भी चुकी है। इसके अलावा जो दल नाराज हैं उसमें नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी), मीजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और नगालैंड डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) शामिल है। ये सभी दल भाजपा के नेतृत्व वाले पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) का हिस्सा हैं।

मालूम हो कि एनईडीए में 11 दल शामिल हैं। लोक सभा चुनाव के लिहाज से भाजपा को इस गठबंधन और क्षेत्र से अपने लिए सबसे ज्यादा उम्मीदें है। उधर मेघालय में सरकार चला रही एनपीपी के कॉनराड संगमा ने कहा है कि हम इस संशोधन का समर्थन नहीं करते हैं। हम अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर जल्द ही आगे की रणनीति बनायेंगे। मेघालय में भाजपा की दो सीटें हैं और वह एनपीपी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में है। आईपीएफटी के सहायक महासचिव मंगल देबबर्मा ने भी विरोधी तेवर दिखाया है। . आईपीएफटी का त्रिपुरा में भाजपा सरकार को समर्थन है। आईपीएफटी के पास आठ सीटें। लोकसभा चुनाव के हिसाब से भाजपा के लिए आईपीएफटी का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री और एमएनएफ के प्रमुख जोरामथांगा ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित किए जाने से वे बेहद नाराज हैं। उन्होंने उम्मीद जतायी है कि यह विधेयक राज्य सभा में पारित नहीं होगा। अगर राज्य सभा में यह बिल पारित हुआ तो उन्हें अपना अलग रास्ता खोजना होगा। ज्ञात हो कि मिजोरम में भाजपा के पास सिर्फ एक विधानसभा सीट है। जबकि नगालैंड में एनडीपीपी प्रमुख और मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने अपने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा की। बैठक के बारे में बताया गया कि इस मसले पर केंद्र सरकार से बातचीत की जा रही है। उसे संशोधन वापस लेने के लिए राजी करने की कोशिश जारी है।
एनडीपीपी सरकार में भाजपा शामिल है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार नागरिकता कानून में संशोधन विधेयक लेकर आई है। यह विधेयक फिलहाल राज्य सभा में है। इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को आसानी से भारत की नागरिकता दिए जाने की व्यवस्था की गयी है।

 

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