निकाह-ए-हलाला और बहुविवाह का भी विरोध करेगी सरकार?

तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित होने के बाद लोगों के जेहन में उठ रहे हैं सवाल/इस मामले में दिल्ली की समीना बेगम ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है

गुरुवार को लोक सभा से तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित होने के बाद अब लागों के जेहन में ये सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या भाजपा सरकार मुस्लिमों में प्रचलित निकाह-ए-हलाला और बहुविवाह का भी विरोध करेगी। वैसे तीन तकाल मामले में राज्य सभा में इसका इम्तिहान अभी होना है। उम्मीद तो की जा रही है कि यह राज्य सभा से भी पारित हो जाएगा। फिलहाल संकेतों के अनुसार मोदी सरकार निकाह-ए-हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ भी इसी तरह का कदम उठा सकती है। मगर, भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद ही यह मुमकिन हो सकेगा। क्योंकि, आम चुनाव होने में ज्यादा वक्त नहीं है।

जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच बहुविवाह और निकाह-ए-हलाला जैसे मसलों पर भी विचार कर रही है। इस मसले पर दिल्ली की समीना बेगम ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। इन दोनों प्रथाओं पर अपना रुख स्पष्ट करने की उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है। साथ ही 6 अन्य याचिकाएं भी दायर की गई हैं। ये 6 याचिकाएं शबनम, ज़कीरा बेगम, नफीसा बेगम और फरज़ाना के अलावा दो वकीलों अश्विनी उपाध्याय व मोहसिन काथिरी ने लगा रखी हैं।

बीते मार्च में उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की बेंच ने इन याचिकाओं पर विचार करते हुए केंद्र सरकार और अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया था। मगर, सूत्र बताते हैं कि केंद्र की मोदी सरकार ने इस पर अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। वैसे, सैद्धांतिक रूप से मोदी सरकार इन प्रथाओं के खिलाफ दिखती है। साथ ही आने वाले दिनों में इन पर भी सरकार प्रतिबंध लगा सकती है। दरअसल, मुस्लिम पुरुषों को उनके धार्मिक कानून ने विभिन्न हालातों में चार शादियां तक करने की इजाज़त दी हुई है। जबकि निकाह-ए-हलाला की व्यवस्था उस समय अमल में लाई जाती है जब तीन तलाक के ज़रिए छोड़ी गई पत्नी से किसी पुरुष को फिर शादी करना हो। ऐसे में संबंधित महिला के लिए यह ज़रूरी होता है कि वह पहले किसी और पुरुष से निक़ाह करे। फिर उसका दूसरा पति उसे तलाक दे। तभी वह अपने पहले पति से निकाह कर सकती है।

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