पंजाब में भाजपा और हिमाचल में कांग्रेस को झटका

विनोद खन्ना के निधन से खाली पंजाब की सीट कांग्रेस ने झटकी, हिमाचल में कांग्रेसी मंत्री पहुंचे भाजपा कैंप

सियासी बिसात पर शह-मात के खेल में एक तरफ भाजपा ने कांग्रेस को तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने भाजपा को पटखनी दी है। कांग्रेस उम्मीवार सुनील जाखड़ ने पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की है। जाखड़ ने भाजपा प्रत्याशी सवर्ण सिंह सलारिया को 1,93,219 मतों के अंतर से हरा दिया है। इस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत हुई थी। इस सीट पर चार बार सांसद रहे विनोद खन्ना के अप्रैल में निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी। इस सीट के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था।

जबकि दूसरी तरफ विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को झटका देते हुए हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा रविवार को वीरभद्र सरकार छोड़कर भाजपा कैंप में शामिल हो गए। पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम के बेटे शर्मा ने कहा कि उन्हें भाजपा का टिकट दिया गया है और पार्टी ने इस बारे में सूचित कर दिया है। मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश में नौ नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और शर्मा के इस कदम से वीरभद्र सिंह को जबरदस्त झटका लगा है, जिन्हें पिछले ही हफ्ते पार्टी का चुनावी चेहरा घोषित किया गया था।

इधर पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिंद्धू ने कहा कि हम लोगों ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लाल रिबन में पैक करके दिवाली का उपहार भेंट किया है। उप चुनाव परिणाम आने से आज भाजपा यह समझ जाएगी कि अकाली दल पंजाब में बड़ा बोझ बन गई है। उधर हिमाचल में कांग्रेस को अलविदा कह चुके प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके पिता को कांग्रेस पार्टी ने दरकिनार और नजरअंदाज किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव ने मंडी में राहुल गांधी की रैली में सुखराम को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन जब वह वहां पहुंचे तो उनसे रैली में शामिल न होने को कहा गया।

मालूम हो कि सुखराम ने वर्ष 1962 से नवंबर 1984 तक मंडी सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 1984 में वह लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 1993 में उनके बेटे अनिल शर्मा ने मंडी से जीत हासिल की थी। तब तक दूरसंचार घोटाले में नाम सामने आने पर सुखराम को कांग्रेस से निष्काषित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस (एचवीसी) पार्टी बनाई। चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन कर एचवीसी सरकार में शामिल हुई। जहां एक ओर सुखराम मंडी से जीते वहीं वर्ष 1998 में अनिल शर्मा राज्यसभा के लिए चुने गए।
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों में सुखराम हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी से जीतने वाले पार्टी के एकमात्र सदस्य थे। वह मंडी से जीते थे। लेकिन वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अनिल शर्मा ने वर्ष 2007 और 2012 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मंडी सीट से दुबारा जीत हासिल की थी। इस बार वह भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

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