पाकिस्तान के बोल सुधरे हैं, सरहद पर हरकत नहीं : जनरल रावत

सेना दिवस से पहले आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में बोले सेना प्रमुख

नयी दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद भले ही पाकिस्तान के बोल में सुधार आया हो, मगर नियंत्रण रेखा पर जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं है और सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मोर्चे पर पूरी तरह तैयार है। जनरल रावत ने सेना दिवस से पहले यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान सरकार आने के बाद काफी परिवर्तन हुए हैं और उनकी बातों तथा बोल में काफी सुधार आया है मगर जहां तक जमीनी हकीकत की बात है वह ज्यों की त्यों है, उसमें बदलाव नहीं हुआ है। अभी भी सीमा पार बड़ी संख्या में आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में रहते हैं और पाकिस्तानी सेना उन्हें घुसपैठ करने और वापस लौटने के लिए फायर कवर देती रहती है। इसके कारण संघर्ष विराम समझौते का बार-बार उल्लंघन होता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना उनकी फायरिंग का जवाब देती है और इसके परिणाम स्वरूप असैनिक भी हताहत होते हैं। सेना की जवाबी कार्रवाई मेंं या तो आतंकी मारे जाते हैं या घुसपैठ में विफल रहने पर लौटने की कोशिश करते हैं या फिर वहीं छिप जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब सेना इनकी तलाशी का काम मानव रहित विमानों से कर रही है और इस दौरान हमारे दो यान गिराये भी गये हैं, मगर यह कोई चिंता का विषय नहीं है। अच्छी बात यह है कि इस काम के लिए जाने वाले जवान अब दुश्मन की बारूदी सुरंग की चपेट में आने से बच जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सेना हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पंजाब सीमा पर घुसपैठ की आशंका वाली रिपोर्टों पर उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है, क्योंकि वहां सीमा पर तकनीकी बाड़ लगायी गयी है, जिसमें राडार और सेंसरों का इस्तेमाल किया गया है। सुरंग के रास्ते घुसपैठ की आशंका से उन्होंने इन्कार नहीं किया मगर साथ ही कहा कि अब इसका पता लगाने की भी प्रौद्योगिकी आ गयी है और उसका इस्तेमाल किये जाने की जरूरत है। जनरल रावत ने कहा कि चीन से लगती सीमा पर स्थिति में अभी काफी सुधार है और सेना में निचले रैंक के स्तर पर भी दोनों पक्षों में अच्छा संपर्क है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान सम्मेलन के बाद जारी किये गये निर्देशों का सकारात्मक असर हआ है और सीमा पर पूरी तरह से शांति तथा मैत्री का माहौल है।

जनरल रावत ने कहा कि दोनों सेनाओं ने हाल ही में ‘हैंड इन हैंड अभ्यास किया है। हल्के अंदाज में उन्होंने कहा, हमने तो वहां भांगड़ा तक करा दिया है। वह दोनों सेनाओं के बीच अभ्यास के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम की ओर इशारा कर रहे थे। चीन की ओर किये गये ढांचागत विकास की भारत से तुलना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दोनों ओर के क्षेत्रों में बहुत अंतर है। हमारे यहां काम करने में कहीं ज्यादा दिक्कत है। ल्हासा की ऊंचाई 12 हजार मीटर है तो हमारे क्षेत्रों की ऊंचाई 16,000 मीटर है। दुर्गम क्षेत्रों में इस ऊंचाई पर काम करने के लिए पुराने और पारंपरिक तरीके छोडकर प्रौद्योगिकी का सहारा लेना पड़ेगा। सुरंग बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि सेना और विशेष रूप से सेना का आधुनिकीकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन्फेंट्री को अत्याधुनिक राइफल, हेलमेट, रेडियो सेट, बुलेट प्रूफ जैकेट, बख्तरबंद वाहन व स्नाइपर राइफलें दी जा रही हैं। स्नाइपर राइफलों की आपूर्ति 20 जनवरी से शुरू हो जायेगी। सेना प्रमुख ने कहा कि सेना के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर तेजी से काम हो रहा है और इस बारे में किये गये अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट महीने के अंत तक सरकार को दे दी जायेगी। भविष्य की लड़ाइयों में प्रौद्योगिकी की बढती भूमिका को देखते हुए रिपोर्ट में कई पहलुओं को शामिल किया गया है। जवानों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सतर्क रहने की सलाह देते हुए जनरल रावत ने कहा कि इसका सकारात्मक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हाल ही में हुए सैनिकों के ‘हनीट्रैप’ के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने हैरानी जतायी कि सचेत करने के बावजूद वे कैसे इसमें फंस जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से बचा नहीं जा सकता और इस पर रोक नहीं लगायी जा सकती मगर जो जानते हुए भी इस चक्कर में पड़ता है और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करते पकड़ा जायेगा तो उसे कड़ी सजा दी जायेगी। सेना प्रमुख ने कहा कि धारा 377 पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का सेना के नियम कानूनों पर असर नहीं पड़ेगा। इस तरह के मामलों में सेना के दूसरे कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैसे सेना उच्चतम न्यायालय या देश के कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन सेना के जवानों पर हर नागरिक को संविधान से मिले सभी अधिकार लागू नहीं होते। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का मानवाधिकार रिकार्ड बहुत अच्छा है और वह संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करती है। सेना पुलिस में महिलाओं की भर्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसका 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और ये महिलाएं इस साल सेना पुलिस में आ जायेंगी। महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में लाने से पहले उनके लिए ढांचागत सुविधाएं जुटायी जानी जरूरी है।

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