पीयू रिसर्च सही तो मोदी को तानाशाह बोल फंसे राहुल

अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक पीयू रिर्सच के अनुसार भारतीयों को चाहिए तानाशाह

इस हफ्ते मिलती जुलती दो बातें सामने आयी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी को तानाशाह बताया। जबकि दूसरी ओर अमेरिका का प्रतिष्ठित थिंक टैंक संस्थान पीयू रिसर्च के शोध ने बताया कि भारत के लोगों को तानाशाह पसंद हैं। पीयू रिसर्च के सर्वे से सामने आया कि भारत में ज्यादातर लोगों की पंसद शासक के तौर पर एक तानाशाह है। ऐसे में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जब चुनाव हो रहे हैं तब राहुल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकतांत्रिक तानाशाह बताना राजनीतिक लाभ की जगह नुकसान दे सकता है।

मालूम हो कि राहुल गांधी ने विदेशी अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे एक लेख में बुधवार को नोटबंदी की पहली वर्षगांठ पर पीएम मोदी को लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया तानाशाह बताया। राहुल ने केंद्र सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों की कड़ी आलोचना की। दूसरी ओर पीयू रिसर्च कहता है कि भारतीय एक मजबूत नेता चाहते हैं। इसका मतलब सैनिक शासक नहीं हैं। लेकिन लोग चाहते हैं भारत का शासक फौरन और सख्त निर्णय ले। सर्वे का सार यही रहा कि भारतीय इंदिरा के शासनकाल वाला इमरजेंसी भी नहीं चाहते हैं। मगर, ऐसा मजबूत नेता और तानाशाह चाहते हैं, जिसकी तानाशाही व्यवस्था सुधारने में काम आये। जबकि लेख में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि नोटबंदी का फैसला भ्रष्टाचार का सफाया करने के लिए है, लेकिन इस एक साल में उन्होंने केवल हमारी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर से भरोसे का सफाया किया है।

राहुल गांधी ने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेरोजगारी के कारण उपजे गुस्से को सांप्रदायिक घृणा में बदलने का आरोप लगाया है। लिखा है कि नोटबंदी से भारत के जीडीपी में दो फीसदी की गिरावट आई है। इसने असंगठित क्षेत्र को तबाह कर दिया। साथ ही कई लघु व मध्यम व्यवसायों को खत्म कर दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र के अनुसार 2017 के पहले चार महीनों में नोटबंदी से 15 लाख से अधिक लोगों की नौकरियां गयी हैं।

लेकिन, पीयू रिसर्च का सर्वे बताता है कि भारतीय एक मजबूत नेता चाहते हैं। इसलिए वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लोकसभा में बहुमत प्राप्त कर प्रधानमंत्री बने। उधर, 10 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहने के बाद मनमोहन सिंह की छवि एक कमजोर और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निर्भर रहने वाले नेता की बन गई थी। बावजूद इसके मनमोहन अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ थे। सो, उनका पहला कार्यकाल सफल माना गया। क्योंकि जनता ऐसे मंत्रियों और प्रधानमंत्रियों से आजिज आ गई थी जिन्हें अपने मंत्रालय के मामलों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *