‘पैराडाइज के इंद्र’ हैं ‘ईमानदार कचरेवाली’ से बेखबर

नासिक की गंगूबाई देंगी पैराडाइज के नामवालों को ईमानदारी का संस्कार

अमित राजा

दुुनिया भर के छोटे से छोटे देशों में टैक्स चोरी का स्वर्ग खोजने वाले पनामा या पैराडाइज पेपर के नामवालों को नासिक की कचरा चुनने वाली गंगूबाई खोज रही हैं। गंगूबाई ने उसी दिन अपनी ईमानदारी साबित की, जिस दिन पैराडाइज पेपर लीक हुआ। नासिक की गरीब और आधा पेट खाकर ही जिंदा रहने वाली गंगूबाई और उसकी दो बच्चियों ने कचरों के ढेर पर मिले सोने-चांदी के जेवरातों से भरे सात लाख रुपये कीमत का बैग उसके सही हकदार को ढूंढ कर लौटा दिया। जबकि अपने ही देश से आने वाले पैराडाइज पेपर के सात सौ से अधिक नामवालों ने चोरी (टैक्स चोरी) का रास्ता चुना।

जो हो, गंगूबाई और उसकी दोनों बच्चियां कुपोषण में जी रही हैं। वह खामोश है। मगर, उसकी कमजोर और थकी-थकी आंखें पैराडाइज पेपर के नामवालों को खोज रही हैं। उसकी खामोशी चीख-चीख कर कह रही है कि पैराडाइज के नामवालों नासिक आओ, तुम्हें ईमानदारी का संस्कार दूंगी। क्योंकि मां-बाप ने तुम्हें सुविधाएं तो दी मगर संस्कार नहीं। तुम्हें ईमानदारी का संस्कार मिला होता तो टैक्स चोरी न होता और भारत का राजकोष थोड़ा तो बड़ा हो जाता।

बहरहाल, पैराडाइज के नामवाले कितने दोषी हैं, इसकी जानकारी जांच के बाद होगी। लेकिन, इतना तो है कि विभिन्न तरीकों से टैक्स चोरी के तरीकों को लोग समझ पायें हैं। अब आईये जरा नासिक की गंगूबाई और उसकी दोनों बच्चियों की इमानदारी को भी देखें। उसने इमानदारी की जो मिसाल पेश की है, उससे साबित हुआ कि अभी भी इंसानियत जिंदा है। हालांकि दोनों को इसके लिए 10 हजार रुपए का इनाम भी दिया गया है। मालूम हो कि गंगूबाई असरूबा घोडे अपनी बेटी मुक्ता और सुनीता के साथ अंबाड के साठनगर की झुग्गियों में रहती है। तीनों कचरा बीनने का काम कर गुजारा करती हैं। कचरा बीनने के दौरान गंगूबाई को एक बैग मिला।

इसमें करीब सात लाख के सोने-चांदी के जेवरात देख गंगूबाई ने उसे पुलिस को सौंप दिया। दिवाली की सफाई के दौरान गलती से इस बैग को फेंक दिया गया था। यह बैग पाथर्डी फाटा इलाके में रहने वाली महिला सरिता दलवी, पति शरद दलवी की थी। दिवाली की सफाई के दौरान जेवरात से भरा बैग गलती से कचरे के ढेर में फेंका गया था। इस संबंध में उन्होंने अंबाड पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज करायी थी। गंगूबाई की ईमानदारी से खुश होकर दलवी ने उसे 10 हजार रुपए का पुरस्कार दिया है।

 

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