प्रकृति के बहाने कला को सहेजने की पहल

अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर ‘प्रकृति 2018’ के चितेरों ने कराया कला की बारीकियों से साक्षात्कार/ फ्रांस और बांग्लादेश समेत देश के सभी राज्यों से पहुंचे कलाकार

हजारीबाग / संवाददाता। हजारीबाग के स्वर्ण जयंती पार्क में प्रकृति के बहाने कला को सहेजने की वन विभाग ने अनूठी पहल की है। हजारीबाग के रिजनल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट संजीव कुमार के प्रयास से यहां ‘प्रकृति 2018’ के नाम से अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कैनवॉस पर अपनी कूची से चितेरों ने एक से बढ़कर एक पेंटिंग बनायी। जिसे लोगों ने खूब सराहा। इन चितेरों की चित्रकारी से पर्यावरण का कलात्मकता से रिश्ता बनता दिखा। कला व पर्यावरण के इस संगम में देश के सभी राज्यों के अलावा फ्रांस और बांग्लादेश के भी चित्रकारों ने भाग लिया। यहां सभी पेंटिंग प्रकृति को सहेजने की थीम पर तैयार की गयी।

झारखंडी पेंटिंग कोहवर को लोगों ने सराहा

इस अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर ‘प्रकृति 2018’ में राज्यों के कलाकारों ने अपनी लोक चित्रकला को नुमायां किया। हालांकि झारखंडी पेंटिंग ‘कोहवर’ और बिहार की ‘मिथिला पेंटिंग’ को लोगों ने खूब सराहा। हालांकि शिविर में बाहर के देशों व राज्यों से आये 50 चितेरों की पेंटिंग को भी खूब वाहवाही मिली। सभी पेंटिंग्स कलात्मकता की बारीकियों से कला प्रेमियों को साक्षात्कार कराने में कामयाब रही। पुणे से शिविर में पहुंची कला समीक्षक सोनलिका ने भी लोक चित्रकला की प्रशंसा की।

धनबाद से हुई थी अनूठे शिविर की शुरूआत

वन विभाग की ओर से अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर की शुरूआत धनबाद से हुई थी। उस वक्त संजीव कुमार धनबाद के डीएफओ थे। उनकी पहल पर पेंटिंग एग्जिविशन में कई पेंटिंग ऊंची कीमतों पर बिकी। धनबाद के बाद संजीव कुमार मुख्य वन संरक्षक पद पर प्रोन्नत होकर जमशेदपुर जोन गये तो उन्होंने 2011 में वहां भी अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर का आयोजन किया था। जो हो, हजारीबाग में लगे अंतर्राष्ट्रीय कला शिविर ‘प्रकृति 2018’ का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने किया। इस मौके पर श्री संजीव कुमार के अलावा वन विभाग के कई पदाधिकारी और कलाकार मौजूद थे।

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