प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे कम्युनिकेटर, अच्छा इंटरव्यू

पीएम मोदी के इंटरव्यू का पहला राजनीतिक विश्लेषण पढ़िये, वरिष्ठ पत्रकार नदीम एस अख्तर की कलम से

नदीम एस अख्तर

पीएम मोदी का इंटरव्यू पर पहली बात। राजा को राजधर्म का पालन करना चाहिए था। ये भगवान राम ने वनवास को मना कर रहे अपने पिता को भी समझाया था और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी यही बात कही थी। सो, नो आग्र्युमेंट्स।

दूसरी बात। पहले पीएम मोदी ने चुनकर पत्रकारों को इंटरव्यू दिए तो विवाद हुआ। पकौड़े की थ्योरी वहीं से उपजी। अबकी बार मोदी जी ने न्यूज एजेंसी एएनआई की मालकिन और संपादक स्मिता प्रकाश को इंटरव्यू दिया ताकि एक ही इंटरव्यू से सभी टीभी चैनलों का काम चल जाए, तो इस पे भी विवाद। स्मिता ने दो लोगों (अमित शाह और मोदी जी) द्वारा सरकार-पार्टी चलाने से लेकर नोटबंदी तक सवाल पूछ डाले पर फिर भी चैन नहीं। कि ये नहीं पूछा और वो नहीं पूछा। हो सकता है। एक पत्रकार अपनी सीमाओं के अंदर इंटरव्यू में सवाल जवाब करता है, खासकर जब वो पीएम-राष्ट्रपति (किसी भी देश में) का इंटरव्यू कर रहा होता है।

वरना अगर पत्रकार अपनी शर्त पे जाएगा तो इंटरव्यू ही नहीं मिलेगा। ये पूरी दुनिया में होता है और भारत अपवाद नहीं। सो इंटरव्यू ना मिले, इससे अच्छा है कि इंटरव्यू कर लिया जाए। कुछ तो निकलेगा। पर यहां भी विवाद। तो ठीक है। अगर लोग मेरा आलेख पढ़ते हैं तो उनको मोदी जी को बताना चाहिए कि जल्द से जल्द वो मीडिया में सभी संस्थानों के पत्रकार प्रतिनिधियों के साथ एक सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लें और असहज सवालों के भी जवाब दें। वैसे, असहज सवाल कोई होता नहीं है क्योंकि एक मंजे राजनेता के पास हर सवाल का जवाब होता है। जैसे मोदी जी ने आज राम मंदिर और सबरीमाला पे खुल के बोल दिया। आप कह सकते हैं कि पीएम को ऐसा नहीं बोलना चाहिए पर वो निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। वो जो बोल रहे हैं, उसी के आधार पे जनता उनको जज करेगी और अगले आम चुनाव में वोट करेगी। सो, पीएम को जल्द से जल्द एक सर्वस्वीकार्य प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ही लेना चाहिए। चुनाव में वक्त कम है सो जितनी जल्दी ये हो, उतना अच्छा। वैसे मुझे लगता है कि जल्द ही ये भी होगा। अब क्यों लगता है, ये मत पूछिएगा।

तीसरी बात। लोकतंत्र में वही चुनाव जीतता है जो सबसे अच्छा कम्युनिकेटर होता है यानी अपनी सही-गलत बात अपने मुताबिक जनता तक पहुंचाकर उसे अपनी बात का यकीन दिला देता है। और इसमें भी कोई शक ना करे कि पीएम मोदी एक अच्छे कम्युनिकेटर हैं। आज का उनका इंटरव्यू देख लीजिए। राफेल से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक पे उन्होंने जो भी बोला, अपना मैसेज जनता तक पहुंचा दिया। राफेल पे उन्होंने दो टूक कह दिया कि मुझ पे कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं हैं। सरकार पे है। उधर राहुल गांधी कह रहे हैं कि चैकीदार ही चोर है। सो, जनता के बीच अपना मैसेज कम्यूनिकेट करने का हुनर जिसमें ज्यादा अच्छा होगा, पब्लिक उसकी बात मान लेगी। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन झूठ बोल रहा है या कौन सच या तथ्य क्या हैं।

इस देश की आम आबादी को इतना पता नहीं कि राफेल में पहले कितने जहाज थे, बाद में कितने हुए, क्या दाम बढ़ा आदि आदि। वो तो सिर्फ ये पूछेगी कि क्या घोटाला हुआ? अब आप उसे समझाते रहिए। जो जितनी अच्छी तरह से अपनी बात उसके सामने रख देगा, जनता उसकी बात मान लेगी। ये देश बहुत बड़ा है, सो बुद्धिजीवियों को अपने घर से निकलकर जनता की तरह सोचने की आदत डालनी होगी। नेता ये बात जानते हैं। पत्रकारों को उनसे भी मास कम्युनिकेशन की कला सीखनी चाहिए कि वो कैसे किसी मुद्दे पे अपनी बात रख रहे हैं और जनता को क्या मैसेज दे रहे हैं।

और आखिर में चैथी बात। जनता अपने हिसाब से वोट करती है। अब वो पहले से ज्यादा जागरूक है, खासकर मिडिल क्लास। सोशल मीडिया पे वह सच ढूंढ लेता है। सो, आगामी आम चुनाव को लेकर ना तो किसी नेता को मुगालते में रहना चाहिए और ना किसी पत्रकार को कि वह मिडिल क्लास का जनमत प्रभावित कर देगा। भक्त से लेकर आम गरीब, अनपढ़ वोटर प्रभावित हो सकता है पर मिडिल क्लास नहीं। मेरी ये बात मेरे पॉइंट नंबर- 3 से थोड़ी अलग है। आप हिसाब लगा लीजिये कि आम वोटर कितने हैं और मिडिल क्लास वोटर कितने। फिर मिडिल क्लास वोटर में से भी भक्त वोटर्स को छांट दीजिए। आपको पता चल जाएगा कि आज पीएम ने अपने इंटरव्यू में कब-कब किस सेक्शन के वोटर्स को टारगेट किया। बहुत लंबा इंटरव्यू है। इसे हल्के में मत लीजिएगा। बस मुझे राहुल गांधी के अगले कदम का इंतजार है कि इसके तोड़ में वो क्या करते हैं? वैसे स्मिता प्रकाश का वह सवाल बड़ा दिलचस्प था कि 2जी से लेकर दामाद जी यानी सारे जी लोधी गार्डन में घूम रहे हैं। इस पे पीएम का जवाब कि पैसे के हेरफेर में जमानत पे घूम रहे हैं। उनको कैसे रोका जा सकता है। अब आप गुना भाग करते रहिए कि राफेल में मोदी जी पे भ्रष्टाचार के निजी आरोप क्या हैं और सोनिया जी-राहुल जी पे भ्रष्टाचार के आरोप क्या हैं। जनता को समझाइए और वोट पाइए। कोई खुशफहमी में ना रहे। जो बेहतर कम्यूनिकेट करेगा, वो चुनाव जीतेगा। सिंपल।

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