बलात्कारी बाबा की मुरीद भाजपा-कांग्रेस

एक केंद्रीय मंत्री, हरियाणा के दो मंत्री और कांग्रेस सरकार के एक मंत्री डेरा को दे चुके हैं अनुदान

गुरमित राम रहीम उर्फ बलात्कारी बाबा के देश भर में पांच करोड़ और केवल हरियाणा में एक करोड़ अनुयायी होने की वजह से इस बाबा का खास रसूख है। बाबा चुनावों में सीधे तौर पर किसी दल के समर्थन की घोषणा भी करते आये हैं। सो, केवल भाजपा नहीं कांग्रेस भी बाबा की मुरीद रही है। इतना ही नहीं एक केंद्रीय मंत्री, हरियाणा के दो मंत्री और कांग्रेस सरकार के एक मंत्री डेरा को अनुदान भी दे चुके हैं। आज जब बाबा को अदालत से दोषी साबित किये जाने पर उनके अंध भक्तों ने जगह-जगह हिंसा बरपा किया और देशद्रोहियों की तरह राष्ट्र की संपति बर्बाद की तो देश में सियासत गर्म है। ऐसे में बाबा के सियासी कनेक्शन पर रोशनी डालना जरूरी हो गया है।
वर्ष 2014 में जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे तो उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के सामाजिक कार्यों की खूब तरीफ की थी। इस चुनाव में बाबा राम रहीम के डेरे पर बीजेपी डोरे डालने में कामयाब रही। जबकि इससे पहले के चुनाव में बाबा कांग्रेस के साथ थे। मगर 2014 के चुनाव में बाबा का समर्थन लेने के लिए खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने उनसे जाकर मुलाकात की थी। लिहाजा, डेरा सच्चा सौदा ने वोटिंग से तीन दिन पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया था। डेरा के इतिहास में ये पहला मौका था जब खुलकर उसने किसी सियासी पार्टी के पक्ष में समर्थन किया था। इस अपील का असर भी हुआ और भाजपा को फायदा हुआ।
मालूम हो कि कई मंत्रियों ने बाकायदा डेरा को अनुदान भी दिया है। इनमें एक केंद्रीय मंत्री और तीन हरियाणा के मंत्री शामिल हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा ने डेरा मुखी के जन्मदिन पर 51 लाख रुपये डेरा को अनुदान देने का ऐलान किया था। इससे पहले रुमाल छू प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के लिए खेल मंत्री अनिल विज ने 50 लाख रुपये और सहकारिता राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर ने खेल लीग के दौरान 11 लाख रुपये का अनुदान दिया था। इतना ही नहीं केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल भी स्टेडियम बनाने के लिए 30 लाख रुपये की मदद कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा व पंजाब में कई डेरे यानी आश्रम ऐसे हैं, जिनके लाखों अनुयायी हैं। इन गुरुओं का आशीर्वाद लेने पार्टियों के नेता आते रहे हैं। ताकि उनके समर्थकों का वोट मिले। लेकिन बाबा गुरमीत राम रहीम ने तो सीधे-सीधे पार्टियों को समर्थन देकर नई शुरूआत की। बाबा राम रहीम की महत्वाकांक्षाएं शुरु से ही अलग थीं। जो बाबा के कॉन्सर्ट शोज, रॉक स्टार लुक, एलबम्स और फिल्मों में दिखती भी रही हैं। डेरा पॉलिटिक्स की शुरुआत ज्ञानी जेल सिंह से मानी जाती है। अकालियों की पॉलटिक्स धर्म के इर्द गिर्द घुमती थी। तब पंजाब में कांग्रेसियों के नेता ज्ञानी जेल सिंह ने इन डेरों पर जाना शुरू कर दिया। इस तरह डेरों पर नेताओं का जाना 1972 से ही शुरू हो गया था। हालांकि डेरे के गुरु खुलकर राजनीतिक पार्टियों के समर्थन से बचते रहे। वर्ष 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद यही फॉर्मूला कैप्टन अमिरंदर सिंह ने भी आजमाया। उन्होंने डेरों पर जाना शुरू कर दिया।
वर्ष 2007 के चुनावों में अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल ने भी बाबा राम रहीम के डेरे पर बाबा से मुलाकात की। लेकिन, बाबा द्वारा गुरु गोविंद सिंह जैसे कपड़े पहनने की वजह से विवाद भी हो गया। बाबा राम रहीम ने पहली बार अपने समर्थकों से कांग्रेस को वोट देने की अपील की। मगर, पंजाब में सरकार अकालियों की बन गई और बाबा को कांग्रेस को समर्थन देने के चलते मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि बाबा राम रहीम की कांग्रेस से नजदीकी उनके समधी पंजाब के कांग्रेस नेता हरमिंदर सिंह जस्सी के चलते हुई थी। बाबा के बेटे जसमीत की शादी जस्सी की बेटी से हुई है।
डेरा का प्रभाव पंजाब के मालवा क्षेत्र की 65 सीटों पर है। जिसमें से बाबा के समर्थन से 37 सीटें कांग्रेस को मिलीं और अकाली 19 पर ही सिमट गई। ये अलग बात है कि कांग्रेस फिर भी पंजाब हार गई। इधर 2009 में बाबा ने राजनीतिक पार्टियों से दूरी बरतीं, लेकिन माना जाता है कि बाबा ने बादल की पुत्रवधू हरसिमरत बादल की अमरिंदर के बेटे रणिंदर के खिलाफ बठिंडा से पहला ही चुनाव जिताने में काफी मदद की। उसका फायदा डेरा को मिला भी, अकालियों ने डेरा की तरफ अपना रुख थोड़ा नरम कर लिया। पंजाब के कई इलाकों में आश्रम खुलने में मदद की। बाद में डेरा ने 2012 के विधानसभा चुनावों में अकालियों-बीजेपी के उम्मीदवारों को समर्थन दिया और उसी मालवा क्षेत्र में गठबंधन को 14 सीटें ज्यादा आईं। यहीं से बाबा राम रहीम की भाजपा से नजदीकियां बढ़ीं जो हरियाणा में 2014 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में समर्थन के बाद और भी ज्यादा बढ़ गईं।
दरअसल, बाबा की ताकत डेरा के समर्थकों में है। इस विरासत की नींव उनसे पहले के दो गुरुओं ने रखी थी। हरियाणा के करीब 9 जिलों में करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर बाबा के समर्थक बड़ी तादाद में हैं और सीटों पर हार-जीत तय करते हैं। बाबा के समर्थन से इस इलाके में बीजेपी ने नारनोंद, हिसार, बवानी खेड़ा, अंबाला सिटी, टोहाना, उचाना कलां, नारनोंद, भिवानी, शाहबाग, थानेसर, लाड़वा, मौलाना और पेहवा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इससे पहले बीजेपी के खाते में केवल इन सभी सीटों में से केवल भिवानी की ही सीट थी। अब तो डेरा का प्रभाव यूपी के बागपत, मेरठ वाली जाट बैल्ट पर, दिल्ली के जहांगीर पुरी, सीमापुरी, जैसे इलाकों में, राजस्थान में उदयपुर, श्रीगंगानगर, हनुमान गढ़, कोटा, बीकानेर, जयपुर, मध्यप्रदेश के सीहोर, छत्तीसगढ़ के कोरबा, उडीसा के पुरी, महाराष्ट्र के सतारा, गुजरात के भुज, हिमाचल का कांगड़ा और कर्नाटक के मैसूर जैसे इलाकों तक में अपने आश्रमों के जरिए पहुंच चुका है। दरअसल, 1990 में जब बाबा गुरमीत राम रहीम डेरा प्रमुख बने तो उसके बाद से इसके दायरे का काफी विस्तार हुआ। आज उत्तर प्रदेश के बागपत, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और दिल्ली से लेकर राजस्थान में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, जयपुर तक डेरा की शाखाएं फैल चुकी हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर, छत्तीसगढ़ के कोरबा, महाराष्ट्र के सतारा, गुजरात के भुज, कर्नाटक के मैसूर से लेकर उड़ीसा के पुरी तक डेरा सच्चा सौदा के आश्रम स्थापित हैं।

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