बाबा रामदेव की भाजपा से दूरी के मायने ?

….और यह भी साफ हो गया है कि बाबा रामदेव एक व्यापारी मात्र हैं

विशद कुमार

वैसे तो पिछले 16 सितंबर को पांच राज्यों में हुए चुनाव के पहले ही एनडीटीवी के युवा कॉन्क्लेव में बाबा रामदेव ने कहा था – ”मैं सर्वदलीय भी हूं और निर्दलीय भी”। उन्होंने कहा कि ”प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करना लोगों का मौलिक अधिकार है।” बावजूद यह भी कह दिया कि ”पीएम मोदी कठिन मेहनत करते हैं।” महंगाई के सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा था कि ”मैं या आप कहें या ना कहें पर मोदी सरकार को ये महंगाई कम करनी होगी। अगर ये महंगाई कम नहीं की तो ये आग उन्हें ले डूबेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि ”पहले मैं सक्रिय था, मगर अब नहीं। मैं अब सर्वदलीय और निर्दलीय हूं। मैं 2019 में मोदी सरकार का प्रचार नहीं करूंगा।” उन्होंने कहा कि ”मैंने मोदी और सरकार को सुझाव दिया है कि 2019 से पहले तेल के दाम घटा लें।”

बता दें कि बीजेपी से बाबा रामदेव की नजदीकियां किसी से छुपी नहीं है, ऐसे में बाबा रामदेव के बयान के मायने क्या हैं? यह राजनीतिक पंडितों से छुपा नहीं है। अब जब पांच राज्यों में हुए चुनाव के बाद भाजपा को जैसी शिकस्त मिली, उसके बा बाबा रामदेव का एनडीटीवी के युवा कॉन्क्लेव में दिए बयान का अर्थ साफ हो गया है । और यह भी साफ हो गया है कि बाबा रामदेव एक व्यापारी मात्र हैं ।

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँव में वर्ष 1965 को गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर जन्मे बाबा रामदेव का पारिवारिक नाम रामकृष्ण यादव है। अली सैयदपुर गांव से सटा शहजादपुर के एक सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली।  उसके बाद रामकृष्ण ने युवावस्था में ही सन्यास लेने का निर्णय लिया और रामकृष्ण से बाबा रामदेव का नया चोला धारण कर लिया।

बाबा रामदेव ने 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी ने हर सुबह बाबा रामदेव का योग का कार्यक्रम दिखाना शुरू किया जिसके बाद बहुत से समर्थक उनसे जुड़े। योग को जन-जन तक पहुँचाने में बाबा रामदेव की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। योग के इस प्रचार—प्रसार में भारत और विदेशों में उनके योग शिविरों में आम लोगों सहित कई बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भी भाग लिया। जिसमें मुख्य रूप से अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का नाम उल्लेखनीय है।

बाबा रामदेव ने वर्ष 2006 में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नाम से दो संस्थाओं की स्थापना की। इसके माध्यम से बाबा रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रवचन विभिन्न टी० वी० चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होते रहे।

दूसरी तरफ भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा कथित 400 लाख करोड़ रुपये के “काले धन” को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार एवं कथित काले धन के खिलाफ चल रहे बाबा रामदेव के इस मिशन में और काफी लोग जुड़े। इतना ही नहीं उन्होंने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋषिकेश को गोद लेने की घोषणा भी की।

बाबा रामदेव ने जब 27 फ़रवरी 2011 को रामलीला मैदान में जनसभा की थी, उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर 5 अप्रैल 2011 से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी।

4 जून 2011 को प्रात: सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ। रात को बाबा रामदेव पांडल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड़ में घुस गये। 5 जून 2011 को सुबह 10 बजे तक बाबा को लेकर अफ़वाहों का बाजार गर्म रहा। यह सिलसिला दोपहर तब जाकर रुका जब बाबा ने हरिद्वार पहुंचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बच कर निकलने की पूरी कहानी सुनाई। वास्तव में बाबा रामदेव को महिलाओं का सलवार पहन कर भागना पड़ा था, जिसका मीडिया में ख़ूब मज़ाक बना थ। मगर जल्दी ही रामदेव इस मजाक से उबर गए।

2014 के आम चुनाव से ठीक पहले देश भर में बाबा रामदेव ने नरेंद्र मोदी का जमकर गुनगान किया और यूपीए सरकार की जमकर आलोचना करते रहे। 4 जून 2013 को समाचार चैनल एबीपी के सवालों का जवाब देते हुए बाबा रामदेव ने कहा था, “नरेंद्र मोदी में तीन ऐसी बातें हैं जिनके चलते मैं उनका समर्थन कर रहा हूं। मोदी देश में स्थायी और मज़बूत सरकार दे सकते हैं। वे एक ऐसे शख्स हैं जो काले धन, भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दों पर सहमत हैं। इसके अलावा जितने भी सर्वे हुए हैं, उनमें वे सबसे आगे चल रहे हैं।”

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