भारत-चीनः शुरुआती बातचीत में नरमी के संकेत

विनित सप्रु

भारत-चीन व भुटान सीमा पर तनाव के बीच चीन के बीजिंग में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच औपचारिक बातचीत हुई है। सम्मेलन में रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका से वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अन्य प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा पर एक संवाद हुआ। इसी दौरान डोभाल की मुलाकात शी जिनपिंग और चीनी अधिकारियों संग हुई।
शुक्रवार को डोभाल ने चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यांग चिएच के साथ और वहां के अफसरों संग भी अलग-अलग बैठकें की। इन बैठकों के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे की परिस्थितियां समझी। हालांकि अभी महज इस शुरुआती बैठक से ही सीमा पर कायम तमाम विवाद के खत्म होने की उम्मीद नहीं की जा सकती, मगर ये जरूर है कि एक-दूसरे को समझने लगे हैं। दोनों देश इस पर सोच रहे हैं कि आगे क्या करना है। बीते छह हफ्ते में ये पहली बार है कि दोनों देशों के बीच सिक्योरिटी के मुद्दे पर बात हो रही है। दूसरी बात ये है कि चीन ने बार-बार कहा था कि जब तक डोकलाम से भारतीय सैनिक पीछे नहीं हटेंगे, हम किसी भी तरह की बात नहीं करेंगे। इसके बावजूद भी चीनी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के लोग डोभाल से अलग से मिले और इस मुद्दे पर मीटिंग की और भारत के साथ स्टैंडऑफ को लेकर चर्चा हुई।
जे हो, चीन अपने पुराने रवैये से थोड़ा तो नरम हुआ है। चीन ने भी ये संकेत दिए हैं कि वो इस मसले को सुलझाना चाहते हैं। लेकिन तय है कि चीन ये भी नहीं चाहेगा कि ये मुद्दा कल ही सुलझ जाए। क्योंकि एक अगस्त को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के 90 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर चीन में उत्साही माहौल रहेगा। लिहाजा, अचानक चीन कह दे कि कल तक हम जिसे दुश्मन मानते थे, जो हमारी जमीन पर चला आया था उससे हमारी एक रात में दोस्ती हो गई, ये बात चीनी सैनिकों को समझाना कठिन होगा। इसलिए चीन ये चाहता है कि धीरे-धीरे इस मुद्दे को सुलझाया जाए और भारत भी कुछ ऐसा ही चाहता है। अजित डोभाल में काउंटर टेररिज्म पर शुक्रवार को कहा था कि इस मुद्दे पर ब्रिक्स को काफी काम करना है और काफी आगे बढ़ना है। दूसरी ओर ठंड के दिनों में दोनों तरफ के सिपाहियों को हटना होगा, क्योंकि वहां बहुत कड़ाके की ठंड पड़ती है। लेकिन इससे पहले भी इस मुद्दे को सुलझाने की बात होगी। दूसरी ओर इस साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स को लेकर चीन यात्रा से पहले भारत के विदेश सचिव और विदेश मंत्री भी चीन जाएंगे और उन बैठकों में भी डोकलाम पर बात हो सकती है। दोनों ही देश अपनी-अपनी स्थिति को बचाने के लिए ब्रिक्स सम्मेलन से पहले त्रिपक्षीय बातचीत की घोषणा भी कर सकते हैं। इस त्रिपक्षीय बातचीत में समय लगेगा और यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 19वें अधिवेशन के पूरा होने के बाद ही कुछ समाधान निकाल पाएगी।

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